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10 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो सकते हैं Petrol-Diesel, एक्सपर्ट्स क्यों जता रहे हैं यह अनुमान?

Crude Oil Price: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ सकते हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि तेल 10 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। इसका असर महंगाई, ट्रांसपोर्ट, दूध, खेती और आम आदमी के घरेलू बजट पर पड़ेगा।

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भारत

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Pawan Jayaswal

May 16, 2026

Petrol Diesel Price

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और इजाफा हो सकता है। (PC: AI)

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के बाद अब डर इस बात का है कि आने वाले दिनों में तेल और महंगा हो सकता है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऐसे ही उछलती रहीं, तो पेट्रोल और डीजल 10 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो सकते हैं। इसका असर सिर्फ गाड़ियों की टंकी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रसोई से लेकर रोजमर्रा के हर खर्च पर भी पड़ेगा।

सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल के दाम 3 रुपये से ज्यादा बढ़ा दिए। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और मिडिल ईस्ट में जारी अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं। यही वजह है कि तेल कंपनियों पर भारी दबाव बन गया है। क्रूड ऑयल WTI 4.2 फीसदी बढ़कर 105.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। वहीं, ब्रेंट क्रूड 3.35 फीसदी बढ़कर 109.26 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचा है।

कितने महंगे हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल

फाइनेंशियल सर्विस कंपनी Emkay Global का अनुमान है कि तेल कंपनियों को नुकसान से बचाने के लिए आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल 10 रुपये प्रति लीटर तक महंगे किए जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल हर लीटर ईंधन पर करीब 17-18 रुपये का नुकसान उठा रही हैं। हालत यह है कि इस तिमाही में उन्हें 57 हजार से 58 हजार करोड़ रुपये तक का घाटा हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल कंपनियों के लिए मौजूदा हालात ज्यादा दिनों तक संभालना आसान नहीं होगा। इसलिए या तो एक साथ बड़ा दाम बढ़ाया जा सकता है या फिर अगले 2-3 हफ्तों में धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं।

कई चीजों में बढ़ सकती है महंगाई

अब चिंता सिर्फ तेल तक नहीं रही। दूध भी महंगा हो चुका है। अमूल और मदर डेयरी ने दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। यानी आम आदमी की जेब पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ पेट्रोल-डीजल का खर्च बढ़ रहा है, दूसरी तरफ घर का बजट भी बिगड़ता जा रहा है। ऊपर से ट्रांसपोर्ट महंगा होगा, तो सब्जियों से लेकर रोजमर्रा की चीजों के दाम भी धीरे-धीरे बढ़ने लगेंगे।

महंगाई दर पर कितना पड़ेगा असर?

अर्थशास्त्री संतोष मेहरोत्रा का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत हर 10 डॉलर बढ़ने पर भारत की खुदरा महंगाई करीब 0.3 फीसदी तक बढ़ सकती है। इसका असर GDP ग्रोथ और चालू खाता घाटे दोनों पर पड़ता है। यानी तेल की आग पूरी अर्थव्यवस्था को झुलसा सकती है। DBS बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव के मुताबिक, सिर्फ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से ही महंगाई दर में 0.15 से 0.25 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है।

वहीं, इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की मेघा अरोड़ा का मानना है कि ईंधन और दूध की कीमतों का संयुक्त असर महंगाई को करीब 0.42 फीसदी तक बढ़ा सकता है। CARE Edge Ratings की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा कहती हैं कि असली मार अप्रत्यक्ष तरीके से पड़ेगी। ट्रक भाड़ा बढ़ेगा, कैब और ऑटो किराया महंगा होगा, खेती की लागत बढ़ेगी और आखिरकार हर चीज की कीमत ऊपर जाएगी। उनका अनुमान है कि आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई 4.6 से 5 फीसदी के बीच रह सकती है।

कुल मिलाकर, महंगाई अब धीरे-धीरे नहीं, बल्कि दबे पांव घरों के बजट में घुस रही है। आम आदमी के लिए आने वाले महीने आसान नहीं दिख रहे। अगर मिडिल ईस्ट का तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो पेट्रोल पंप से लेकर किराना दुकान तक हर जगह जेब ढीली करनी पड़ सकती है।