
अमेरिकी बाजार में तेजी देखी जा रही है। (PC: AI)
AI Bubble: शेयर बाजार जब बिना रुके भागने लगे, तो पुराने निवेशकों को डर लगने लगता है। वॉल स्ट्रीट में इन दिनों कुछ ऐसा ही माहौल है। टेक शेयर रोज नए रिकॉर्ड बना रहे हैं, AI कंपनियों पर पैसा पानी की तरह बह रहा है और छोटे निवेशकों में जबरदस्त उत्साह दिख रहा है। लेकिन बाजार के पुराने खिलाड़ी कह रहे हैं, “कहीं इतिहास खुद को दोहरा तो नहीं रहा?”
कई अनुभवी विश्लेषकों को अब साल 1999 का दौर याद आने लगा है। वही दौर, जब इंटरनेट कंपनियों के नाम पर बाजार आसमान छू रहा था और बाद में पूरा बुलबुला फूट गया था। उस समय लाखों निवेशकों का पैसा डूब गया था। अब AI को लेकर बन रही दीवानगी ने वही पुरानी बेचैनी वापस ला दी है।
इंटरएक्टिव ब्रोकर्स के मुख्य रणनीतिकार स्टीव सॉस्निक का कहना है कि बाजार में एक तरह का “जेनरेशन गैप” साफ दिखाई दे रहा है। पुराने निवेशक, जिन्होंने डॉट-कॉम क्रैश देखा था, सावधान हैं। वहीं, नई पीढ़ी के निवेशक हर गिरावट को खरीदारी का मौका मान रहे हैं। मार्केट टेक्निकल एनालिस्ट हेलेन मेइसलर ने हाल ही में सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर आपने 1999-2000 का दौर नहीं देखा, तो अब शायद वैसा अनुभव करने का मौका मिल रहा है। उनका इशारा साफ था, बाजार में जरूरत से ज्यादा उत्साह खतरनाक भी साबित हो सकता है।
AI की कहानी इस पूरे उछाल के केंद्र में है। बड़ी टेक कंपनियां अरबों डॉलर डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कर रही हैं। निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले सालों में AI पूरी दुनिया बदल देगा। यही उम्मीद शेयरों को लगातार ऊपर धकेल रही है।
लेकिन दूसरी तरफ तस्वीर इतनी चमकदार भी नहीं है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। जॉब मार्केट कमजोर पड़ रहा है। महंगाई फिर सिर उठा रही है। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और मिडिल ईस्ट के युद्ध ने अनिश्चितता और बढ़ा दी है। इसके बावजूद टेक शेयर ऐसे दौड़ रहे हैं जैसे कोई खतरा ही नहीं हो। यही बात पुराने विश्लेषकों को परेशान कर रही है। उनका कहना है कि बाजार फिलहाल सिर्फ उम्मीदों पर भाग रहा है। कहावत है, “जब लालच बढ़ता है, तो खतरा भी पास खड़ा होता है।”
नैस्डैक इंडेक्स मार्च के निचले स्तर से 20 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है। वहीं, फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स में तो कुछ ही महीनों में करीब 70 फीसदी की तेजी आ गई। चिप कंपनियों के शेयरों में निवेशकों का उत्साह चरम पर है। दिलचस्प बात यह है कि यह तेजी उस समय है, जब आर्थिक स्थितियां सही नहीं नजर आ रहीं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने लंबे समय से ब्याज दरों में कटौती नहीं की है। उल्टा, बाजार को अब 2027 तक बड़ी राहत मिलने की उम्मीद भी कम दिखाई दे रही है। इसके बावजूद शेयर लगातार ऊपर जा रहे हैं। विश्लेषकों के मुताबिक यही सबसे बड़ा सवाल है। अगर महंगाई बढ़ रही है, तेल महंगा हो रहा है और कंज्यूमर सेंटीमेंट कमजोर पड़ रहा है, तो फिर बाजार आखिर किस भरोसे दौड़ रहा है?
कुछ निवेशक मानते हैं कि AI क्रांति अभी शुरुआती दौर में है। टेक सेक्टर के बड़े समर्थक डैन आइव्स का कहना है कि असली तेजी अभी शुरू हुई है। उनके मुताबिक AI आने वाले समय में दुनिया बदल देगा और टेक कंपनियों की कमाई कई गुना बढ़ सकती है। लेकिन हर कोई इतना आशावादी नहीं है।
माइकल बरी, जिन्होंने 2008 की हाउसिंग मार्केट तबाही का पहले ही अंदाजा लगा लिया था, उन्होंने भी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि मौजूदा रैली उन्हें 1999-2000 के बुलबुले के आखिरी महीनों जैसी लग रही है। बरी का मानना है कि बाजार फिलहाल सिर्फ इसलिए ऊपर जा रहा है, क्योंकि वह पहले से ऊपर जा रहा है। यानी निवेशक अब कमाई, नौकरियों या अर्थव्यवस्था के आंकड़ों से ज्यादा “मोमेंटम” पर भरोसा कर रहे हैं। यही चीज बुलबुले की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है।
हालांकि, इस बार एक फर्क जरूर है। 1999 में कई इंटरनेट कंपनियां सिर्फ सपनों पर चल रही थीं और उनके पास कमाई नहीं थी। लेकिन आज की बड़ी टेक और चिप कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं। उनके पास मजबूत कैश फ्लो भी है। यही वजह है कि कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि इस बार हालात पूरी तरह वैसे नहीं हैं।
फिर भी बाजार में डर बना हुआ है। क्योंकि जब उम्मीदें जरूरत से ज्यादा बड़ी हो जाएं, तो छोटी सी निराशा भी बड़ा झटका दे सकती है। फिलहाल वॉल स्ट्रीट में AI का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है।
Published on:
15 May 2026 06:02 pm
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