
पेट्रोल डीजल महंगा होने से खुदरा महंगाई बढ़ सकती है। (PC: AI)
Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते ही लोगों को सबसे पहले एक ही चिंता सताने लगती है, अब क्या-क्या महंगा होगा? क्योंकि भारत में तेल सिर्फ गाड़ियों का खर्च नहीं बढ़ाता, बल्कि रसोई से लेकर बाजार तक हर चीज पर असर डालता है। शुक्रवार को लंबे समय बाद देशभर में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए। पेट्रोल-डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगे हुए, जबकि दिल्ली और मुंबई में CNG के दाम 2 रुपये प्रति किलो बढ़ा दिए गए।
सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल की वजह से यह फैसला लेना पड़ा। पिछले कुछ महीनों में हालात तेजी से बदले हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने और ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित हुई है। इसका असर दुनियाभर के तेल बाजार पर पड़ा है। एक समय ऐसा था, जब कच्चा तेल 75 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना हुआ था। लेकिन अब कीमतें 100 डॉलर से ऊपर पहुंच चुकी हैं। कुछ दिनों पहले तो क्रूड ऑयल 120 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया था। सिर्फ तीन महीने में इसने 50 फीसदी से ज्यादा की छलांग लगाई। ऐसे में तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ना तय था।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां लगातार नुकसान झेल रही थीं, इसलिए कीमतें बढ़ना लगभग तय माना जा रहा था। हालांकि, बड़ा सवाल अभी भी यही है कि क्या यह सिर्फ एक बार की बढ़ोतरी है या आने वाले दिनों में और झटका लग सकता है। उनका मानना है कि सिर्फ 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से कंपनियों का पूरा नुकसान नहीं निकलेगा। ऐसे में आगे भी दाम बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यानी फिलहाल राहत की उम्मीद कम ही दिखाई दे रही है।
अब इसका असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा। असली चिंता महंगाई की है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने का मतलब है ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ना। ट्रांसपोर्ट महंगा हुआ तो सब्जी, दूध, अनाज, रोजमर्रा का सामान और ऑनलाइन डिलीवरी तक सब पर असर पड़ना तय है। कहावत है, “आग लगेगी तो धुआं दूर तक जाएगा।” तेल की महंगाई भी कुछ ऐसी ही होती है।
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की चीफ इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा के मुताबिक, इसका सीधा असर खुदरा महंगाई पर सीमित दिखाई देगा, लेकिन असली दबाव धीरे-धीरे अलग-अलग सेक्टर में देखने को मिलेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI में करीब 5 फीसदी हिस्सेदारी रखती हैं। ऐसे में 3 रुपये की बढ़ोतरी सीधे तौर पर महंगाई को ऊपर धकेलेगी।
जानकारों के मुताबिक, कृषि, FMCG, स्टील, ई-कॉमर्स, ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर पर इसका दबाव जल्दी दिख सकता है। क्योंकि इन सभी का बड़ा खर्च ट्रांसपोर्ट और ईंधन से जुड़ा हुआ है। मदन सबनवीस का कहना है कि पहले ही LPG और CNG महंगे हो चुके हैं। अब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई पर और दबाव बनेगा। खासतौर पर डीजल महंगा होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा, जिसका असर एग्रीकल्चर और खाद्य पदार्थों तक पहुंचेगा।
तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उम्मीद से कम ही बढ़ोतरी की है। ऐसे में कुछ अर्थशास्त्री इसे राहत की बात भी बता रहे हैं। आनंद राठी फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इकोनॉमिस्ट सुजन हाजरा का मानना है कि अगर तेल कंपनियां कीमतों का 60-70 फीसदी बोझ ही ग्राहकों पर डालती हैं, तब भी खुदरा महंगाई बहुत ज्यादा बेकाबू नहीं होगी। उनका अनुमान है कि CPI महंगाई 4.5 से 5 फीसदी के दायरे में रह सकती है।
लेकिन आम आदमी के लिए गणित इतना आसान नहीं होता। पेट्रोल-डीजल महंगा होने का मतलब जेब पर सीधा असर है। ऑफिस जाने का खर्च बढ़ेगा, बस-ऑटो का किराया बढ़ सकता है और खाने-पीने की चीजें भी धीरे-धीरे महंगी हो सकती हैं। यानी आने वाले दिनों में महंगाई का यह असर हर घर तक पहुंचने वाला है।
Updated on:
15 May 2026 03:45 pm
Published on:
15 May 2026 03:42 pm
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