सरकार ने सभी स्टेकहोल्डर्स से ड्राफ्ट नियमों पर 30-45 दिनों के भीतर टिप्पणियां मांगी हैं, जिसके बाद अंतिम नियमों को अधिसूचित किया जाएगा।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने चारों लेबर कोड्स के तहत ड्राफ्ट नियमों को अधिसूचित (notified) कर दिया है, जिससे इन कोड्स को व्यावहारिक रूप देने का रास्ता साफ हो गया है। ये ड्राफ्ट नियम वेज कोड (Code on Wages), सोशल सिक्योरिटी कोड (Code on Social Security), इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (Industrial Relations Code) और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड (Code on Occupational Safety, Health and Working Conditions) से जुड़े हैं।
मंत्रालय ने सभी स्टेकहोल्डर्स से ड्राफ्ट नियमों पर 30-45 दिनों के भीतर टिप्पणियां मांगी हैं, जिसके बाद अंतिम नियमों को अधिसूचित किया जाएगा। एक अधिकारी के मुताबिक - अंतिम नियमों को मार्च में अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है। इससे सभी लेबर कोड प्रावधान अगले वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे। पुराने नियम तब तक लागू रहेंगे जब तक नए नियमों की अंतिम अधिसूचना नहीं हो जाती।
सरकार ने इस साल नवंबर में सभी चार लेबर कोड्स को अधिसूचित कर दिया था, जो पांच साल पहले संसद से पारित हुईं थीं. इससे पहले 2020 और 2021 में ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए भेजा गया था, लेकिन उन्हें अधिसूचित नहीं किया गया था।
लेब कोड्स दरअसल, व्यापक कानूनी ढांचा तय करती हैं, जबकि ड्राफ्ट नियम इन कानूनों को जमीन पर कैसे लागू किया जाएगा, इसके बारे में विस्तार से बताते हैं। जिसमें वेतन, काम के घंटे, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षा मानक और विवादों का समाधान शामिल है।
2025 के ड्राफ्ट कोड ऑन वेज (सेंट्रल) रूल्स में न्यूनतम वेतन और फ्लोर वेज को कैसे तय करना है, गणना और संशोधित करहना है इस बारे में विस्तार से दिशानिर्देश दिए गए हैं।
यह कैलकुलेशन एक स्टैंडर्ड वर्किंग क्लास फैमिली की जरूरतों पर आधारित है, जिसमें भोजन करने, कपड़े, मकान का किराया, ईंधन, बिजली, शिक्षा, चिकित्सा खर्च और दूसरी बुनियादी जरूरतें शामिल हैं। केंद्र सरकार एक नेशनल फ्लोर वेज तय करेगी, जिससे नीचे कोई राज्य अपना न्यूनतम वेतन तय नहीं कर सकेगा, हालांकि राज्य स्थानीय हालातों के अनुसार इससे ज्यादा वेतन तय करने की शक्ति रखेंगे।
ड्राफ्ट नियमों में वेतन की परिभाषा भी साफ की गई है, जिसमें कुल कुल पारिश्रमिक का 50% से अधिक होने पर भत्तों को कैसे गिना जाएगा। कुछ भुगतान जैसे बोनस, इंसेंटिव और रीइंबर्समेंट वेतन की परिभाषा से बाहर रहेंगे, जबकि बेसिक-पे को कम करने के हथकंडों को रोकने के लिए प्रावधान किए गए हैं।
ड्राफ्ट नियमों में हफ्ते में 48 काकाजी घंटे की अधिकतम सीमा को लागू करने पर जोर दिया गया है। जिसमें सैलरी की कैलकुलेशन एक दिन में 8 घंटे काम के आधार पर की जाएगी। साथ ही, ओवरटाइम, रेस्ट डे और सब्सटिट्यूटेड रेस्ट डे के लिए वेतन कैसे दिया जाएगा, इसका भी प्रावधान है।
विशेष प्रावधानों में नाइट शिफ्ट्स के लिए सैलरी की कैलकुलेशन के बारे में बताया गया है। जिसमें अगर मध्यरात्रि के बाद काम किया जाता है तो किन नियमों का पालन होगा, इनके प्रावधान हैं। ये प्रावधान मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज, लॉजिस्टिक्स और आईटी जैसे सेक्टर्स के लिए महत्वपूर्ण हैं, जहां चौबीस घंटे काम चलता है। महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की इजाजत दी गई है, बशर्ते उनकी सहमति हो और अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हों।
ड्राफ्ट नियमों में वेतन भुगतान की समय-सीमाएं तय की गईं हैं और डिडक्शन पर कड़ी सीमाएं लगाई गई हैं। किसी भी वेतन अवधि में कुल डिडक्शन कर्मचारी के वेतन का 50% से ज्यादा नहीं हो सकते हैं. जुर्माना या डिडक्शन लगाने से पहले नियोक्ता को कर्मचारी को सूचित करना और सुनवाई का मौका देना होगा।
ड्राफ्ट नियमों में कंप्लायंस जरूरतों को और सख्त किया गया है, साथ ही 40 वर्ष से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों के लिए सालाना मेडिकल चेक-अप अनिवार्य किया गया है। जहां पर बच्चों के लिए क्रेच की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां प्रति बच्चे कम से कम 500 रुपये का क्रेच अलाउंस देने का प्रावधान है।