
नई दिल्ली। एचडीएफसी में बड़े चीनी निवेश के बाद भारत सरकार ( Government of India ) ने नई निवेश नीति ( New Investment Policy ) को लाकर खड़ा कर दिया था। तब किसी को इस बात की भनक नहीं थी कि भारत और चीन के बीच एलएसी ( India China Tension ) को लेकर विवाद खड़ा हो जाएगा। अब भारत सरकार इसी निवेश नीति के तहत चीन को झटका देने की तैयारी कर रहा है। सरकार चीन आए 50 बिजनेस प्रपोजल की स्क्रीनिंग ( Business Proposal from China ) कर रहा है। हो सकता है यह सभी प्रपोजल रिजेक्ट हो जाएं। जिससे चीन को बड़ा झटका लग सकता है। आपको बता दें सरकार की नई निवेश नीति के तहत पड़ोसी देशों को सरकार से निवेश की अनुमति लेनी होगी। जिसका बिजिंग की ओर से कड़ा विरोध किया गया था।
सरकार के पास आ चुके है 50 आवेदन
मीडिया रिपोर्ट केे अनुसार संबंधित डिपार्टमेंंट के अधिकारियों की ओर से कंपनियों का नाम तो नहीं बताया गया है, लेकिन नई निवेश नीति के बाद चीन की ओर से निवेश से संबंधित 40 से 50 आवेदन आ चुके हैं। जिनका रिव्यू किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर चीन में भारत के वाणिज्य दूतावास यानी कान्सुलेट समेत कई एजेंसियां निवेशकों और इनके प्रतिनीधियों से इन प्रस्तावों के संबंध में बातचीत कर रही हैं। कृष्णमूति एंड कंपनी नाम की एक लॉ फर्म के एक पार्टनर अलोक सोनकर के अनुसार कम से कम 10 चीनी क्लाइंट्स ने हालिया दिनों में भारत में निवेश पर लीगल एडवाइस मांगी है।
चीन को लगा है बड़ा झटका
भारत सरकार की ओर से नई निवेश नीति लाने के बाद दक्षिण एशियाई बाजार में चीनी बिजनेस के विस्तारीकरण के प्लान को बड़ा झटका लगा है। रिसर्च ग्रुप बुकिंग्स की मार्च की रिपोर्ट के अनुसार चीनी कंपनियों द्वारा मौजूदा और योजना वाले निवेश की कुल वैल्यू करीब 26 अरब डॉलर यानी करीब 2 लाख करोड़ रुपए है। आपको बता दें कि बीते सप्ताह केंद्र सरकार ने 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया था। इसमें बाइटडांस की पॉपुलर शॉर्ट वीडियो मेकिंग ऐप टिकटॉक और टेन्सेंट की वीचैट भी शामिल है।