कारोबार

Gujarat Women Empowerment: 31 दिन, 4 लाख लोग और 3 करोड़ की कमाई! गुजरात की इन महिलाओं ने रेगिस्तान में कैसे रची सुनहरी कहानी?

Gujarat Women Empowerment: गुजरात के धोरडो में लगे सखी क्राफ्ट बाजार में 31 दिनों में 4 लाख से ज्यादा लोगों ने शिरकत की और 3 करोड़ से अधिक की बिक्री हुई। जानिए महिलाओं की सफलता की कहानी।
2 min read
Jan 18, 2026
Gujarat Women Empowerment
Gujarat Women Empowerment (Photo- patrika)

Gujarat Women Empowerment: कच्छ के धोरडो जैसे रेगिस्तानी इलाके में जब सखी क्राफ्ट बाजार 2025 सजा, तो यह सिर्फ एक मेला नहीं था, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सपनों का मंच बन गया। 31 दिनों तक चले इस बाजार में करीब 4 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे और 3 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री ने साबित कर दिया कि अगर मौका मिले, तो गांव की महिलाएं भी बड़ी आर्थिक कहानी लिख सकती हैं।

345 स्वयं सहायता समूहों की एकजुट ताकत

इस बाजार में गुजरात और अन्य राज्यों के 345 से ज्यादा स्वयं सहायता समूह (SHG) शामिल हुए। किसी ने कच्छी कढ़ाई दिखाई, तो किसी ने हैंडलूम, तो किसी ने पारंपरिक पैकेज्ड फूड से लोगों का दिल जीत लिया। कुल 100 क्राफ्ट स्टॉल, 10 लाइव फूड स्टॉल और 5 लाइव डेमो आर्टिजन इस बात का सबूत थे कि यह बाजार हुनर और मेहनत का संगम था।

सीधे ग्राहक, सीधी कमाई

सखी क्राफ्ट बाजार की सबसे बड़ी खासियत रही डायरेक्ट मार्केट एक्सेस। यहां महिलाओं ने बिना बिचौलियों के सीधे ग्राहकों से जुड़कर अपने उत्पाद बेचे। इससे न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ी, बल्कि आत्मविश्वास भी। कई महिलाओं ने पहली बार देखा कि उनके हाथ का बना सामान हजारों लोगों को पसंद आ रहा है।

पर्यटन और आजीविका का अनोखा मेल

रण उत्सव के दौरान लगे इस बाजार ने पर्यटन को भी नया रंग दिया। देश-विदेश से आए पर्यटकों ने जब इन स्टॉल्स पर खरीदारी की, तो यह बाजार ग्रामीण आजीविका और पर्यटन के बीच एक मजबूत पुल बन गया। यही वजह है कि 31 दिनों में इतनी बड़ी फुटफॉल और रिकॉर्ड बिक्री संभव हो पाई।

सरकारी सहयोग से बदली तस्वीर

यह ग्रामीण विकास आयुक्तालय के सहयोग से आयोजित इस बाजार ने दिखाया कि सही नीति और मंच मिले, तो ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और लाइव डेमो जैसी पहल ने उनके उत्पादों को नई पहचान दी।

सुनहरी कहानी की शुरुआत

सखी क्राफ्ट बाजार 2025 सिर्फ बीते महीने की सफलता नहीं है, बल्कि आने वाले कल की नींव है। यह कहानी है उन महिलाओं की, जिन्होंने रेगिस्तान में भी मेहनत, हुनर और हौसले से सुनहरी कमाई की फसल उगा दी। यह साबित करता है कि आत्मनिर्भर भारत की असली ताकत गांव की महिलाओं में ही छुपी है।

Updated on:
18 Jan 2026 09:56 pm
Published on:
18 Jan 2026 09:56 pm