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Car Buying Tips: Salary के हिसाब से कितनी महंगी कार खरीदना सही? 50 हजार से 3 लाख रुपये तक की कमाई पर समझें बजट

Car Buying Rule: कार खरीदते समय सिर्फ EMI नहीं, बल्कि पेट्रोल, बीमा, सर्विस, पार्किंग और मौजूदा कर्ज को भी देखना चाहिए। 20/4/10 का नियम शुरुआती मदद दे सकता है।
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Sep 09, 2026
Car Buying Tips
कार खरीदते समय 20/4/10 नियम का ध्यान रखना चाहिए। (PC: AI)

Salary wise Car Budget: कार खरीदना सिर्फ उसकी EMI चुकाने का मामला नहीं है। असली सवाल यह है कि कार खरीदने के बाद आपकी बाकी जिंदगी आराम से चलती रहेगी या नहीं। घर के बाद कार आमतौर पर सबसे बड़े खर्चों में से एक होती है। इसलिए सिर्फ यह देखकर फैसला करना कि बैंक कितना लोन देने को तैयार है, सही तरीका नहीं है। आपकी सैलरी के साथ किराया, मौजूदा EMI, निवेश, बीमा, पेट्रोल या चार्जिंग और रोजमर्रा के खर्च भी मायने रखते हैं। यानी कार उतनी ही महंगी खरीदें, जिससे आपकी बचत और निवेश पर असर न पड़े।

कार खरीदने से पहले 20/4/10 का नियम समझें

निवेश एवं टैक्स सलाहकार बलवंत जैन के अनुसार, कार खरीदने के लिए एक आसान फॉर्मूला 20/4/10 नियम माना जाता है। इसके मुताबिक, कार की कीमत का कम से कम 20% डाउन पेमेंट करना चाहिए। कार लोन 4 साल या उससे कम अवधि का रखें। कार से जुड़े कुल मासिक खर्च को आपकी मंथली इनकम के करीब 10% तक रखने की कोशिश करें।

हालांकि, इस नियम को आंख मूंदकर लागू करना ठीक नहीं है। अगर आपके ऊपर होम लोन, पर्सनल लोन या परिवार की बड़ी जिम्मेदारियां हैं, तो कार का बजट इससे भी कम रखना बेहतर हो सकता है। अब सवाल आता है कि अलग-अलग सैलरी पर कितने बजट की कार खरीदना समझदारी होगी। आइए जानते हैं।

50,000 रुपये महीने की सैलरी पर 5 से 7 लाख की कार

जैन के अनुसार, अगर आपकी मंथली इनकम 50,000 रुपये है, तो कार खरीदते समय दिखावे से ज्यादा जरूरी है कि आपकी जेब पर दबाव न पड़े। इस इनकम में 5 से 7 लाख रुपये के आसपास की कार का बजट व्यावहारिक हो सकता है। छोटी हैचबैक, एंट्री लेवल कॉम्पैक्ट SUV या अच्छी कंडीशन वाली पुरानी कार बेहतर विकल्प हो सकती है। ध्यान रखें कि कार की EMI के अलावा पेट्रोल, बीमा और सर्विस का खर्च भी हर महीने आएगा। कोशिश करें कि कार आपके बजट की सबसे बड़ी जिम्मेदारी न बन जाए।

75,000 रुपये सैलरी है तो 7 से 10 लाख का बजट

75,000 रुपये की मासिक आय पर आपके पास कुछ ज्यादा गुंजाइश होती है। इस स्तर पर 7 से 10 लाख रुपये की कार का बजट रखा जा सकता है। इसमें अच्छी हैचबैक, कॉम्पैक्ट SUV या आपके इस्तेमाल के हिसाब से हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कार भी विकल्प हो सकती है। लेकिन एक बात गांठ बांध लें। सैलरी बढ़ने का मतलब यह नहीं कि हर बार EMI भी बढ़ा दी जाए। आज जिस बजट की कार आराम से खरीद सकते हैं, उसी के हिसाब से फैसला लें। अगले प्रमोशन और भविष्य की सैलरी को आधार बनाकर आज की कार न खरीदें।

1 लाख रुपये महीने की कमाई पर 10 से 14 लाख की कार

मासिक आय 1 लाख रुपये होने पर 10 से 14 लाख रुपये की कार बजट रखा जा सकता है। इस रेंज में बेहतर फीचर्स वाली SUV, सेडान और कुछ इलेक्ट्रिक कारों के विकल्प मिल सकते हैं। लेकिन यहां एक गलती भारी पड़ सकती है। कार की कीमत सिर्फ एक्स-शोरूम कीमत नहीं होती। रजिस्ट्रेशन, बीमा, एक्सेसरीज, सर्विस और फ्यूल का खर्च जोड़ने के बाद ऑन-रोड कीमत काफी बढ़ सकती है। इसलिए खरीदारी से पहले पूरा हिसाब लगाना जरूरी है।

1.5 लाख सैलरी पर 15 से 20 लाख तक की कार

अगर आपकी मंथली इनकम 1.5 लाख रुपये है, तो 15 से 20 लाख रुपये तक की कार का बजट संभव हो सकता है। इसमें प्रीमियम SUV, बड़ी फैमिली कार या बेहतर इलेक्ट्रिक कार जैसे विकल्प सामने आते हैं। लेकिन कार अपग्रेड करने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति जरूर देखें। खुद से तीन सवाल पूछें: क्या हर महीने पर्याप्त निवेश हो रहा है? क्या आपके पास इमरजेंसी फंड है? क्या मौजूदा लोन नियंत्रण में हैं? अगर इन सवालों का जवाब संतोषजनक नहीं है तो महंगी कार लेने के बजाय थोड़ा कम बजट रखना ही समझदारी होगी।

2 लाख रुपये सैलरी है तो 25 लाख की कार लेना जरूरी नहीं

जैन के अनुसार, 2 लाख रुपये महीने की कमाई निश्चित तौर पर आपको ज्यादा विकल्प देती है। इस आय पर 18 से 25 लाख रुपये तक की कार का बजट संभव हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि बैंक 25 या 30 लाख का लोन दे रहा है, तो उतनी महंगी कार खरीद लेनी चाहिए। अगर आपका लक्ष्य तेजी से वेल्थ बनाना है, तो कार का बजट 18 से 20 लाख के आसपास रखना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। इससे हर महीने निवेश के लिए ज्यादा पैसा बच सकता है।

3 लाख रुपये महीने सैलरी पर कितनी महंगी लें कार

3 लाख रुपये की मासिक आय पर 25 से 35 लाख रुपये या उससे ज्यादा कीमत की कार लेना संभव हो सकता है। इस स्तर पर प्रीमियम SUV, एंट्री लेवल लग्जरी कार और महंगी इलेक्ट्रिक कारें भी बजट में आ सकती हैं। लेकिन यहां कार की कीमत से आगे का हिसाब देखना जरूरी है। महंगी कार में बीमा, सर्विस, टायर और दूसरी देखभाल का खर्च भी ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा कार एक डेप्रिशिएटिंग एसेट है। यानी शोरूम से नीचे आते ही कार की कीमत घटना शुरू हो जाती है।

सिर्फ EMI देखकर कार खरीदना सबसे बड़ी गलती

मान लीजिए 15 लाख की कार की EMI आपको आसानी से चुकती हुई नजर आ रही है। फिर भी कार का असली मासिक खर्च इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। सिर्फ ईएमआई ही आपकी लागत नहीं है। इसके साथ ही पेट्रोल/चार्जिंग का खर्च, बीमा, नियमित सर्विस, पार्किंग, टायर और कार की कीमत में गिरावट को भी ध्यान में रखें।

एक जैसी सैलरी वाले दो लोगों के लिए कार का सही बजट अलग-अलग हो सकता है। मसलन, एक व्यक्ति हर महीने 30,000 रुपये किराया देता है, जबकि दूसरे पर किराए का कोई खर्च नहीं है। दोनों की सैलरी भले ही समान हो, लेकिन दोनों की कार खरीदने की क्षमता एक जैसी नहीं होगी।

कार बुक करने से पहले खुद से पूछें ये 5 सवाल

  1. आपके पास इमरजेंसी फंड मौजूद है या नहीं।
  2. महंगे कर्ज और मौजूदा EMI कंट्रोल में हैं या नहीं।
  3. आप हर महीने नियमित निवेश कर रहे हैं या नहीं।
  4. डाउन पेमेंट देने के बाद आपकी बचत लगभग खत्म तो नहीं हो जाएगी।
  5. कार का कुल खर्च आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर दबाव तो नहीं डालेगा।
Updated on:
09 Sept 2026 03:26 pm
Published on:
09 Sept 2026 03:20 pm