
भारत में सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का असर अवैध कारोबार के रूप में सामने आने लगा है। जुलाई से सितंबर 2026 के बीच देश में सोने का अवैध आयात करीब 1500 फीसदी बढ़ गया। यह आंकड़ा 3 टन से बढ़कर 50 टन पर पहुंच गया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों का हवाला देते हुए ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की तस्करी बढ़ने की बड़ी वजह सरकार की ओर से इंपोर्ट ड्यूटी में की गई बढ़ोतरी है। सोने पर ज्यादा टैक्स लगने से तस्करी के जरिए इसे भारत लाना ज्यादा फायदे का सौदा बन गया है। इस वजह से गैरकानूनी रास्तों से सोने की सप्लाई बढ़ी है।
अवैध आयात में तस्करी के अलावा यात्रियों के सामान के जरिए थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सोना लाना भी शामिल है। ऐसे तरीकों से सोने को आधिकारिक आयात शुल्क दिए बिना देश में लाया जाता है। पहले भी जब सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई थी, तब ऐसे गैरकानूनी रास्तों का इस्तेमाल बढ़ा था।
भारत में सोने के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई बदलाव हुए हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, 2012 और 2013 के बीच सरकार ने कई बार 2-2 फीसदी के अंतर से इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई थी। इसके बाद यह बढ़कर 10 फीसदी तक पहुंच गई। करीब छह साल तक इसमें कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई। जुलाई 2019 में सरकार ने फिर 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी की। इसके बाद इंपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का सिलसिला तेज हो गया।
मई 2026 से सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर टैक्स बढ़ा दिया है। अब इन दोनों कीमती धातुओं पर 10 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 फीसदी एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) लगता है। इस तरह कुल कस्टम ड्यूटी 15 फीसदी हो गई है, जो पहले 6 फीसदी थी। इसके अलावा, सोने के आयात पर 3 फीसदी इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) भी लगता है।
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। वहीं, चांदी के आयात के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार है। देश में सोने और चांदी की घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा आयात से ही पूरा होता है। इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद बाजार से जुड़े लोगों ने आशंका जताई थी कि इससे सोने की तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है। वजह यह है कि आधिकारिक रास्ते से सोना मंगाने पर ज्यादा टैक्स देना पड़ता है, जबकि तस्करी के जरिए लाए गए सोने पर यह खर्च बच जाता है। इससे गैरकानूनी कारोबार करने वालों का मुनाफा बढ़ सकता है।
सरकार ने मई में सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए किया था। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना विदेशों से खरीदता है। ऐसे में सोने का ज्यादा आयात देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालता है। इस साल भारतीय रुपये का प्रदर्शन भी एशिया की दूसरी प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कमजोर रहा है। ऐसे में सरकार की कोशिश सोने और चांदी की विदेशी खरीद को कम करने की रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारतीयों से सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। सरकार चाहती है कि लोग सोने की खरीदारी में कुछ कमी करें, ताकि देश का आयात खर्च कम किया जा सके।
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के साथ ही सोने की ऊंची कीमतों का असर भी भारतीय ग्राहकों की खरीदारी पर दिखाई दे रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की तीसरी तिमाही की गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान भारत में सोने के गहनों की खपत सालाना आधार पर 20 फीसदी घट गई। यह 2020 के बाद किसी तीसरी तिमाही में सोने के गहनों की सबसे कमजोर मांग रही। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच भी ज्वेलरी की मांग में सालाना आधार पर 18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की ऊंची कीमतें ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई हैं। इसके चलते लोगों ने भारी गहनों के बजाय हल्के वजन वाले, कम कैरेट और स्टडेड ज्वेलरी प्रोडक्ट्स को ज्यादा पसंद किया। ज्वेलरी कारोबारियों ने भी ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से अपने उत्पादों में बदलाव किया। 18 कैरेट, 14 कैरेट और 9 कैरेट के डायमंड ज्वेलरी प्रोडक्ट्स की मांग में बढ़ोतरी देखी गई। इससे कारोबारियों को कम मात्रा में सोना बेचने के बावजूद अपना मुनाफा बनाए रखने में मदद मिली।