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Explainer: 1 महीने में 50,000 रुपये सस्ती हुई चांदी, आज करीब 8000 रुपये टूटी, जानिए आगे कहां जा सकते हैं भाव

Silver Price Crash: चांदी की घरेलू वायदा कीमतों में आज जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। मंगलवार दोपहर भाव करीब 8,000 रुपये टूट गये। 1 महीने में कीमतें करीब 50,000 रुपये गिर गई हैं।
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भारत

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Pawan Jayaswal

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Updated: 3 Nov 2026, 3:33 PM IST

silver price outlook

चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है। (PC: AI)

Silver Price Today: चांदी की कीमतों में गिरावट रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। आज मंगलवार को भी चांदी के घरेलू वायदा भाव जबरदस्त गिरावट के साथ ट्रेड करते दिखे। एमसीएक्स एक्सचेंज पर दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर 4 दिसंबर की डिलीवरी वाली चांदी 4.26 फीसदी या 7,835 रुपये की गिरावट के साथ 1,75,994 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती दिखी। चांदी की कीमतों में बीते कुछ महीनों से जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। 3 जून 2026 को एमसीएक्स एक्सचेंज पर चांदी का वायदा भाव 2,80,445 रुपये प्रति किलोग्राम पर था। इस तरह 5 महीने में चांदी का भाव 1,04,451 रुपये प्रति किलोग्राम टूट गया है। वहीं, 3 अक्टूबर 2026 को एमसीएक्स पर चांदी का भाव 2,25,877 रुपये प्रति किलोग्राम पर था। इस तरह एक महीने में चांदी का भाव 49,883 रुपये प्रति किलोग्राम टूट चुका है।

9 महीने में 58% टूट गए चांदी के भाव

गरीबों का सोना कहा जाने वाली चांदी 29 जनवरी 2026 को एमसीएक्स एक्सचेंज पर 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के ऑल टाइम हाई लेवल पर पहुंच गई थी। इस स्तर से चांदी का भाव 2,44,054 रुपये प्रति किलोग्राम टूट चुका है। यानी करीब 9 महीने में ही चांदी की कीमतें 58 फीसदी से अधिक टूट चुकी हैं।

मई के बाद से चांदी की कीमतें 3 लाख से नीचे

चांदी की घरेलू वायदा कीमतें मई 2026 के बाद से 3 लाख के नीचे ही ट्रेड करती दिखी हैं। आखिरी बार 3 लाख से ऊपर भाव 14 मई 2026 को था। इस दिन 4 दिसंबर की डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव 3,10,090 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था।

क्यों लड़खड़ाकर गिरी चांदी?

चांदी की करीब 50 फीसदी डिमांड इंडस्ट्री से आती है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे उपकरणों में इसका यूज होता है। उच्च ब्याज दरों और अर्थव्यवस्था से जुड़ी अनिश्चितताओं के चलते इंडस्ट्री की डिमांड घटने का डर बढ़ा है। इससे कीमतों पर दबाव बना है। उधर सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियां कॉस्ट घटाने के लिए चांदी का पहले से कम इस्तेमाल कर रही है। इसे 'थ्रिफ्टिंग' कहते हैं। इससे इंडस्ट्री में चांदी की कुल डिमांड पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा सोने की कीमतों में गिरावट के लिए जिम्मेदार फैक्टर जैसे कच्चे तेल में तेजी, उच्च महंगाई दर और अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों से भी चांदी की कीमतों पर दबाव बन रहा है।

आगे कहां जा सकते हैं भाव?

मास्टर कैपिटल सर्विसेस लिमिटेड के चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ रवि सिंह ने पत्रिका डॉट कॉम को बताया कि चांदी इस समय शॉर्ट टर्म बाइंग अपॉर्च्युनिटी दे रही है। उन्होंने कहा कि निवेशक 1,72,000 रुयये प्रति किलोग्राम के आस-पास चांदी को 1,99,000 रुपये के शॉर्ट टर्म टार्गेट के लिए खरीद सकते हैं। डॉ रवि ने बताया कि साल 2027 में चांदी की सप्लाई सरप्लस रहने की उम्मीदें है। इसके अलावा, इंडस्ट्री से कम डिमांड और जूलरी की कमजोर मांग के चलते चांदी की कीमतों में रिकवरी सीमित रह सकती है। जबकि उच्च ब्याज दरें चांदी के लिए एक प्रमुख जोखिम बनी हुई हैं।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)