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आर्थिक मोर्चे पर चिंता: दुनिया में उथल-पुथल हम पर भारी, महंगाई बढ़ने और जीडीपी घटने के आसार

India Economic Growth: पश्चिम एशिया संकट और अल नीनो से प्रभावित कमजोर मानसून की आशंका के बीच आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है। वहीं महंगाई 5.1% रहने का अनुमान जताया गया है। रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखते हुए आरबीआई ने वैश्विक जोखिमों और आर्थिक चुनौतियों पर सतर्कता दिखाई है।

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Jun 06, 2026
Indian Economy
डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपए को मजबूत बनाने के लिए किए गए उपाय। (Photo- IANS)

Indian Economy: पश्चिम एशिया संकट और अलनीनो प्रभावित कमजोर मानसून की आशंका के चलते इस साल देश की अर्थव्यवस्था की बढ़ोतरी दर प्रभावित हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है। इसकी झलक शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से दी गई जानकारी से मिली जब चालू वित्तीय वर्ष के लिए देश की जीडीपी के अनुमान घटा दिए।

आरबीआई ने तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद मौजूदा हालात में तटस्थ रुख अपनाते हुए रेपो रेट 5.25% बरकरार रखी जिससे आम लोगों को बैंक कर्ज की ईएमआई पर कोई बदलाव नहीं होगा। आरबीआई ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है, वहीं खुदरा महंगाई 4.6 फीसदी के बजाय 5.1 की दर से बढ़ने का अनुमान बताया।

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने प्रेस वार्ता में कहा कि रिजर्व बैंक विकास को समर्थन देने और महंगाई को नियंत्रित करने के बीच मुश्किल संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। महंगाई और बाहरी जोखिमों पर आरबीआई नजर बनाए हुए है। आरबीआई ने विदेशी मुद्रा भंडार की चुनौती दूर करने और विदेशी और प्रवासी निवेश बढ़ाने के लिए कुछ उपायों की भी घोषणा की और कहा वह पूरी तरह सतर्क हैं।

जीडीपी ग्रोथ रेट 7.7% रही

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बीते वित्तीय वर्ष (2025-26) के वास्तविक आंकड़े जारी किए जिसमें कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी है। इस दौरान देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.7% रही, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में यह 7.1% थी। सांख्यिकी मंत्रालय के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की आखिरी तिमाही यानी मार्च तिमाही में जीडीपी 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी। स्थिर कीमतों पर आधारित रियल जीडीपी वित्त वर्ष 2025-26 में 323.12 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। वहीं मौजूदा बाजार भाव पर आधारित नॉमिनल जीडीपी वित्त वर्ष 2025-26 में 8.9% बढक़र 346.36 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई।

अध्यादेश: सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश पर एलटीसीजी खत्म

वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपए को मजबूत बनाने, विदेशी मुद्रा तथा निवेश की आवक बढ़ाने के लिए जरूरी उपाय किए हैं। इसके तहत शुक्रवार को राष्ट्रपति के अध्यादेश जारी कर आयकर कानून में जरूरी संशोधन किया। इससे सरकारी बॉन्ड में विदेशी संस्थागत निवेश पर दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) को खत्म कर दिया गया।

  • विदेशी संस्थागत निवेशकों को सरकारी बॉन्ड पर कैपिटल गेन टैक्स और ब्याज आय पर 20% विदहोल्डिंग टैक्स भी खत्म। क्या होगा: इससे निवेशक आकर्षित होंगे।
  • फुली एक्सेसिबल रूट (एफएआर) में 15, 30 और 40 साल की नई सरकारी प्रतिभूतियां शामिल, बॉन्ड बाजार खोला। क्या होगा: इससे विदेशी निवेशक बॉन्ड्स में बिना किसी सीमा के निवेश कर सकेंगे।
  • गैर-निवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) के लिए शेयर बाजार में निवेश की सीमा बढ़ाई। क्या होगा: निवेश व डॉलर की आवक
  • सरकारी कंपनियों को विदेश से कर्ज जुटाने के लिए 13 सितंबर 2026 तक रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा। क्या होगा: इससे फंड जुटाने में आसानी होगी, डॉलर आएगा।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, 'आरबीआई और सरकार द्वारा उठाए गए नए नीतिगत कदमों से देश में अधिक विदेशी पूंजी प्रवाह की उम्मीद है। हमारी सबसे बड़ी चिंता 'सप्लाई शॉक्स' की लंबी अवधि और कीमतों पर इसका प्रभाव है। इसके अलावा कमजोर मानसून और अल नीनो की स्थिति के कारण महंगाई पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को लेकर भी आरबीआइ सतर्क है। अन्य देशों की तुलना में भारत अच्छी स्थिति में है लेकिन वैश्विक उथलपुथल के दौर का उपयोग देश की आर्थिक लचीलेपन को और मजबूत करने के अवसर के रूप में करना चाहिए।'

Updated on:
06 Jun 2026 02:15 am
Published on:
06 Jun 2026 02:13 am