
Share Market आज गिरावट के साथ बंद हुआ है। (PC: AI)
Why Share Market Fall Today: भारतीय शेयर बाजार आज बुधवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुआ है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 0.92 फीसदी या 715 अंक गिरकर 76,755 पर बंद हुआ। बाजार बंद होते समय सेंसेक्स पैक के 30 शेयरों में से 8 शेयर हरे निशान पर और 22 शेयर लाल निशान पर बंद हुए। उधर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी आज 0.79 फीसदी या 191 अंक की गिरावट के साथ 23,996 पर बंद हुआ। सबसे अधिक गिरावट निफ्टी मीडिया में 2.68 फीसदी, निफ्टी रियल्टी में 2.63 फीसदी और निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.84 फीसदी दर्ज हुई।
बाजार पर सबसे बड़ा असर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ ऐलान का पड़ा। उन्होंने कहा है कि अमेरिका में आयात होने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर 1 अगस्त 2028 से 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा। इसके अगले साल से इसे बढ़ाकर 200 फीसदी कर दिया जाएगा। हालांकि 1 अगस्त 2026 से अगले दो साल तक जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ शून्य रहेगा, लेकिन उसके बाद इतनी बड़ी ड्यूटी लगाने की घोषणा ने फार्मा सेक्टर समेत पूरे बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने भी संकेत दिए हैं कि कई देशों पर नए टैरिफ की घोषणा जल्द हो सकती है। इससे वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।
मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की सेना ने कुवैत के अल-दौहा इलाके में अमेरिकी गोला-बारूद भंडार और लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए। दूसरी तरफ अमेरिका ने लगातार 11वीं रात ईरान पर हमले किए। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका जल्द ही पिकएक्स माउंटेन के पास कार्रवाई कर सकता है, जहां ईरान का अहम परमाणु संवर्धन केंद्र स्थित है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इस इलाके पर हमला हुआ तो युद्ध और फैल सकता है और अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगी भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। अमेरिका-ईरान संघर्ष और महंगे होते कच्चे तेल का असर आने वाले दिनों में भी शेयर बाजार पर दबाव बनाए रख सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी आई है। दोपहर 3 बजकर 50 मिनट पर ब्रेंट क्रूड 4.32 फीसदी बढ़कर 94.94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो इस साल 11 जून के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। तेल महंगा होने का सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ता है। इससे आयात बिल बढ़ने, महंगाई तेज होने और ब्याज दरों पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि निवेशकों का रुख सतर्क हो गया है।
महंगे कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में है। बुधवार को कारोबार के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 11 पैसे टूटकर 96.36 पर पहुंच गया। अब बाजार की नजर 29 जुलाई को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है। उसी के फैसले से डॉलर और उभरते बाजारों की मुद्राओं की अगली दिशा तय हो सकती है।
अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। डॉलर इंडेक्स 101 के ऊपर पहुंच गया है। वहीं, अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी सिर्फ चार कारोबारी सत्र में 4.545 फीसदी से बढ़कर 4.635 फीसदी हो गई है। जब अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिलता है और विदेशी निवेश की निकासी बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)
Updated on:
22 Jul 2026 04:11 pm
Published on:
22 Jul 2026 04:03 pm
