
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से सोने को सपोर्ट मिला है। (PC: AI)
Gold Silver Price: सोना और चांदी खरीदने की सोच रहे हैं तो अभी थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले कुछ हफ्तों तक दोनों की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसकी वजह है मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता। एक तरफ सुरक्षित निवेश की मांग सोने को सपोर्ट दे रही है, तो दूसरी ओर महंगा होता कच्चा तेल ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका बढ़ा रहा है। ऐसे में सोने की कीमतें दो विपरीत ताकतों के बीच फंसी हुई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अब बाजार की नजर दो बड़ी घटनाओं पर है। पहली- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव कहां तक जाता है। दूसरी- अगले हफ्ते होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत मिलते हैं। यही दोनों बातें तय करेंगी कि सोना और चांदी की अगली चाल क्या होगी।
अमेरिका-ईरान तनाव और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुस्ती ने सोने-चांदी को सपोर्ट दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल ईरान से बातचीत की संभावना से इनकार किया है और आगे भी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इससे सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी है। जब भी दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो सोना सेफ हैवन एसेट के रूप में मजबूत होता है और भाव ऊपर जाते हैं। साथ ही अमेरिका में प्राइवेट सेक्टर में रोजगार बढ़ने की रफ्तार लगातार चौथी बार धीमी रही है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को लेकर चिंता बनी हुई है।
क्रूड ऑयल की कीमत 95 डॉलर पर जा पहुंची है। इससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। यूएस फेड इस महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रख सकता है या इसमें बढ़ोतरी कर सकता है। उच्च ब्याज दरें सोने पर दबाव डालती हैं। इससे निवेशक बिना ब्याज वाले एसेट सोने से निकलकर ट्रेजरी बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले एसेट में पैसा लगाने लगते हैं। ऐसे में सोने की मांग कम होती है और कीमतें नीचे जाती हैं। इसलिए निवेशकों की नजर पूरी तरह फेडरल रिजर्व की बैठक पर है।
दिलचस्प बात यह है कि मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बावजूद पिछले सप्ताह सोना और चांदी में तेज गिरावट आई थी। गोल्ड फ्यूचर्स में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी। जबकि स्पॉट गोल्ड करीब 3 फीसदी टूट गया था। चांदी में तो गिरावट और ज्यादा रही। स्पॉट सिल्वर लगभग 8 फीसदी और कॉमेक्स सिल्वर फ्यूचर्स करीब 6.6 फीसदी लुढ़क गए थे। इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी रही। अमेरिका और ईरान के बीच हमलों और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव के चलते कच्चा तेल करीब 13 फीसदी महंगा हो गया।
महंगे तेल ने महंगाई बढ़ने की आशंका को फिर से हवा दी। इससे बाजार को लगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरें कम नहीं करेगा। जब ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की उम्मीद बढ़ती है, तब सोने और चांदी जैसे बिना ब्याज वाले निवेश इंस्ट्रूमेंट्स पर दबाव आ जाता है।
रॉयटर्स के सर्वे के मुताबिक, फेडरल रिजर्व 2026 तक अपनी प्रमुख ब्याज दरों में बदलाव नहीं कर सकता। हालांकि, अब बाजार का रुख पहले से बदल गया है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस साल ब्याज दर बढ़ने की संभावना पहले के मुकाबले ज्यादा हो गई है। यही वजह है कि अगले हफ्ते होने वाली फेड की बैठक को सोना और चांदी के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर माना जा रहा है।
पिछले सप्ताह की भारी गिरावट के बाद बुधवार को दोनों धातुओं की कीमतों में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 1.6 फीसदी की बढ़त के साथ 4,139.64 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं अगस्त डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 1.7 फीसदी बढ़कर 4,144.20 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। चांदी भी पीछे नहीं रही। स्पॉट सिल्वर 1.9 फीसदी चढ़कर 59.87 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। निवेशक भू-राजनीतिक हालात और अमेरिकी ब्याज दरों के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
ऑगमोंट रिसर्च की हेड रेनिशा चैनानी का कहना है कि फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल है। एक तरफ भू-राजनीतिक तनाव कीमतों को सहारा दे रहा है, जबकि दूसरी तरफ ऊंची ब्याज दरों की आशंका तेजी पर ब्रेक लगा रही हैं। उनके मुताबिक, अगर सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस (करीब 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम) के नीचे फिसलता है तो यह 3,900 डॉलर (करीब 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम) तक जा सकता है। वहीं, अगर सोना 4,200 डॉलर के ऊपर टिक जाता है, तो तेजी लौट सकती है और भाव 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम) तक पहुंच सकते हैं।
चांदी फिलहाल ऐसे स्तर पर है जहां साफ ट्रेंड नहीं दिख रहा। अगर यह 63 डॉलर प्रति औंस (करीब 2.35 लाख रुपये प्रति किलो) के ऊपर निकलती है, तो 70 से 71 डॉलर (करीब 2.51 लाख से 2.55 लाख रुपये प्रति किलो) तक जा सकती है। लेकिन अगर 55 डॉलर (करीब 2.14 लाख रुपये प्रति किलो) के नीचे फिसलती है तो भाव 50 डॉलर (करीब 2 लाख रुपये प्रति किलो) तक आ सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक इनमें से कोई बड़ा स्तर नहीं टूटता, तब तक सोना और चांदी दोनों में तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)
Updated on:
22 Jul 2026 05:15 pm
Published on:
22 Jul 2026 05:15 pm
