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India: एशिया का द्वार बनेगा भारत, इजराइल के साथ जल्द होगा बड़ा व्यापारिक समझौता

India Israel Free Trade Agreement : इजराइल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकत ने भारत को एशिया का प्रवेश द्वार बताया और जल्द ही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर मुहर लगाने के संकेत दिए।

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Mar 23, 2026
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ।( फाइल फोटो: IANS)

Gateway to Asia : भारत और इजराइल के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्ते एक नई ऊंचाई को छूने के लिए तैयार हैं (Bilateral Relations)। इजराइल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकत (Nir Barkat) ने नई दिल्ली में अपने बयान में भारत को 'एशिया का प्रवेश द्वार' (Gateway to Asia) करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) पर तेजी से काम कर रहे हैं, जिससे न केवल निवेश (Investment) के रास्ते खुलेंगे, बल्कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था (Economy) को नई गति मिलेगी। इस समझौते के जरिये इजराइली तकनीक (Israeli Technology) और भारतीय विनिर्माण (Indian Manufacturing) का बेजोड़ संगम देखने को मिलेगा।

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व्यापारिक साझेदारी का नया युग (Trade Pact)

इजराइल के मंत्री ने विश्वास जताया कि भारत के पास वह क्षमता है जो दुनिया के किसी अन्य देश के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यापार समझौता (Economic Cooperation) केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह दोनों देशों के उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। भारत की विशाल आबादी और इजराइल का नवाचार (Innovation) मिलकर वैश्विक बाजार में एक बड़ी ताकत बन सकते हैं। इस समझौते से ऑटोमोबाइल, एग्रीटेक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव आने की उम्मीद है।

नवाचार और तकनीक का आदान-प्रदान (High-Tech Synergy)

इजराइल, जिसे 'स्टार्टअप नेशन' के रूप में जाना जाता है, भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम (Startup Ecosystem) में गहरी रुचि दिखा रहा है। नीर बरकत के अनुसार, इजरायली कंपनियां भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक विनिर्माण केंद्र (Manufacturing Hub) के रूप में देख रही हैं। व्यापारिक समझौते के बाद, इजरायली तकनीक को भारत में स्थानीय स्तर पर विकसित किया जा सकेगा, जो 'मेक इन इंडिया' (Make in India) अभियान को और मजबूती देगा।

वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका (Global Supply Chain)

वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitics) स्थिति को देखते हुए, इजराइल भारत को एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखता है। इजराइल का मानना है कि एशिया में विस्तार करने के लिए भारत सबसे सुरक्षित और सबसे सक्षम विकल्प है। यह व्यापारिक संधि (Strategic Partnership) न केवल व्यापार को सुगम बनाएगी बल्कि दक्षिण एशिया में चीन के आर्थिक प्रभुत्व को संतुलित करने में भी मदद कर सकती है।

भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां (Future Prospects)

हालांकि, समझौते की बारीकियों पर अभी भी बातचीत जारी है, लेकिन दोनों पक्षों के सकारात्मक रुख से यह स्पष्ट है कि परिणाम सुखद होंगे। नीर बरकत ने संकेत दिया कि वे जल्द ही इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देना चाहते हैं ताकि व्यापारिक बाधाओं (Trade Barriers) को हटाया जा सके और शुल्क दरों (Tariffs) में कटौती की जा सके। इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार का स्तर कई गुना बढ़ सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि यह समझौता ऐसे समय में हो रहा है जब भारत मिडिल-ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसमें इजराइल की भूमिका अहम है। (इनपुट: ANI)




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