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Iranian Crude Oil: भारत ने दिया ट्रंप को बड़ा झटका, डॉलर के बजाय युआन में खरीदा ईरान का तेल, जानिए कैसे हुआ पेमेंट

Iranian Crude Oil Payment in Yuan: अमेरिकी प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट के दौरान इंडियन ऑयल और रिलायंस ने ईरानी तेल खरीदा। पेमेंट ICICI बैंक की शंघाई ब्रांच के जरिए चीनी युआन में हुई।

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Apr 17, 2026
Iranian Crude Oil Payment in Yuan
भारत ने ईरान से क्रूड ऑयल खरीदा है। (PC: AI)

Iranian Crude Oil: सात साल बाद भारत ने ईरान से तेल खरीदा और पेमेंट हुआ चीन की करेंसी में। यह खबर जितनी चौंकाने वाली है, उतनी ही अहम भी है। भारत के दो बड़े रिफाइनर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ईरानी तेल की खरीद की है और पेमेंट के लिए चीनी युआन को चुना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह पेमेंट ICICI बैंक के जरिए हुआ, जिसने अपनी शंघाई ब्रांच के जरिए यह रकम पहुंचाई।

रविवार को खत्म हो जाएगी छूट

अमेरिका और इजरायल की ईरान पर जंग के बाद तेल के दाम आसमान छूने लगे हैं। इसी को काबू में करने के लिए वॉशिंगटन ने 30 दिन की छूट दी थी। रूस और ईरान दोनों के तेल पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में थोड़ी ढील दी गई, ताकि दुनिया को सस्ता तेल मिल सके। लेकिन अब यह छूट खत्म हो रही है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने बुधवार को साफ कह दिया कि ईरानी तेल पर दी गई यह छूट रविवार को खत्म हो जाएगी और इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

IOC ने सात साल बाद खरीदा ईरानी तेल

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने इस महीने की शुरुआत में 20 लाख बैरल ईरानी तेल खरीदा। यह तेल VLCC टैंकर "जया" पर लदा था और इसकी कीमत करीब 20 करोड़ डॉलर बताई जा रही है। यह 2019 के बाद भारत की पहली ईरानी तेल खरीद थी। 2019 में अमेरिकी दबाव के चलते भारत ने ईरान से तेल लेना बंद कर दिया था। रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए भी चार जहाजों को ईरानी तेल लेकर भारतीय बंदरगाहों पर आने की अनुमति दी गई। इनमें से MT Felicity नाम का जहाज माल उतार भी चुका है।

ICICI की शंघाई ब्रांच से युआन में पेमेंट

इस सौदे की पेमेंट डॉलर में नहीं हुई। ICICI बैंक ने अपनी शंघाई ब्रांच के जरिए चीनी युआन में रकम ट्रांसफर की। बेचने वाले की पहचान अभी तक सामने नहीं आई है। IOC ने कार्गो की करीब 95 फीसदी रकम तब चुकाई जब जहाज भारतीय समुद्री सीमा में दाखिल हुआ। इसे "नोटिस ऑफ रेडीनेस" के आधार पर पेमेंट कहते हैं। सूत्रों का कहना है कि यह तरीका असामान्य है। आमतौर पर प्रतिबंधित देशों से आए तेल की पेमेंट माल उतरने के बाद होती है।

रूसी तेल में भी हो चुका है ऐसा

यह पहली बार नहीं है कि भारत ने युआन में तेल का सौदा किया हो। 2022 में रूस पर पश्चिमी प्रतिबंध लगने के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया। कुछ रूसी तेल सौदों की पेमेंट भी चीनी करेंसी में हुई थी। ईरानी तेल के मामले में भी वही फॉर्मूला अपनाया गया। प्रतिबंधों के चलते डॉलर में लेनदेन मुश्किल है, इसलिए युआन में पेमेंट हुआ।

अब नहीं है खरीद की योजना

IOC के एक सूत्र ने बताया कि अभी ईरानी तेल की कोई और खरीद की योजना नहीं है, क्योंकि छूट खत्म हो रही है। अब तक ईरानी तेल के सबसे बड़े खरीदार चीन के छोटे प्राइवेट रिफाइनर रहे हैं, जिन्हें "टीपॉट" कहा जाता है। भारत की यह खरीद एक अपवाद थी जो एक विशेष अवसर में हुई। ICICI बैंक, इंडियन ऑयल, रिलायंस और भारत के विदेश मंत्रालय ने इस मामले में कोई जवाब नहीं दिया है।

Published on:
17 Apr 2026 05:32 pm