Ethanol Blending India: भारत सरकार ने देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत अब पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20% (E20) से बढ़ाकर 85% (E85) और 100% (E100) करने की तैयारी है, जिससे वाहन बिना पेट्रोल के भी चल सकेंगे।
भारत सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा अब 20 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन (Government Draft Notification 2026) जारी किया है। इस ड्राफ्ट के जरिए देश में धीरे-धीरे E85 (85% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) और E100 (लगभग शुद्ध एथेनॉल) ईंधन के ढ़ाचे को लागू किया जाएगा।
फिलहाल देश में E20 (20% एथेनॉल) का व्यापक उपयोग हो रहा है। इसे 2025 में ही लागू किया गया था। अब सरकार का प्रयास है कि इसे बढ़ाकर E85 और E100 क्षमता तक लाना है, ताकि पेट्रोल के बिना ही इथेनॉल पर वाहन दौड़ाए जाए। सरकार के इस कदम को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर करने और बाहर से कच्चे तेल के आयात को कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही विशेषज्ञों ने इससे पानी की बर्बादी होने की आशंका जताई है।
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सरकार द्वारा जारी ड्राफ्ट में डीजल में भी बायोडीजल मिश्रण बी10 से बढ़ाकर बी100 तक करने का सुझाव है। इसके साथ ही अब पेट्रोल पंपों पर ईंधन के प्रकार की लेबलिंग बताने वाली प्रणाली में को भी E85 और E100 को आधिकारिक मान्यता देने की बात कही गई है। इसके साथ ही हाइड्रोजन ईंधन की शब्दावली 'हाइड्रोजन सीएन' से बदलकर 'हाइड्रोजन सीएनजी' करने और कुछ श्रेणियों में वाहन का अधिकतम वजन 3000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3500 किलोग्राम करने का प्रस्ताव भी शामिल है। ड्राफ्ट पर सार्वजनिक रूप से सुझाव मांगे गए हैं, जिसके बाद अंतिम फैसला होगा।
पेट्रोल और डीजल में होने वाली इस ब्लेंडिंग के बाद ग्राहकों को कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। सबसे अहम है भविष्य में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का चलन बढ़ेगा। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (Flex-Fuel Vehicles - FFVs) ऐसे वाहन होते हैं जिनके इंजन पेट्रोल और इथेनॉल के मिक्स ईंधन (E20 से लेकर E85 या E100 तक) पर चलने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। ये गाड़ियां एक ही टैंक में पेट्रोल और इथेनॉल का कोई भी अनुपात इस्तेमाल कर सकती हैं, जिससे वे ईंधन विकल्पों के मामले में लचीली (Flexible) होती हैं। इससे वाहनों की कीमत में बढ़ोतरी होने की आशंका है।
वहीं पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की अलग-अलग किस्मों के लिए अलग-अलग स्टोरेज और डिस्पेंसिंग सिस्टम की जरूरत होगी। इसके साथ ही पुराने वाहनो के लिए खरीदारों को ईंधन की लेबलिंग पर ध्यान देना होगा। एक राहत की बात यह है कि फिलहाल कुछ समय तक E20 मानक ही रहेगा।
एथेनॉल ब्लेंडिंग के पीछे सरकार का तर्क है कि इससे पर्यावरण प्रदूषण कम होता है साथ ही देश को ऊर्जा आयात में कमी आएगी और कच्चे तेल की निर्भरता में कमी होगी। लेकिन वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव (Environmental Impact of Ethanol) पड़ेगा।
IPCC के ऑथर अंजल प्रकाश कहते हैं कि एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से भारत में पानी की समस्या और बढ़ सकती है। वजह ये है कि एथेनॉल के लिए कच्चा माल जैसे गन्ना और मक्का की खेती में बहुत अधिक पानी लगता है। आंकड़ों के मुताबिक एक लीटर एथेनॉल बनाने में करीब 10,790 लीटर पानी खर्च होता है। 1 किलो चावल उगाने में ही 3,000-5,000 लीटर पानी लगता है और लगभग ढाई से 3 किलो चावल से एक लीटर एथेनॉल बनता है। वहीं मक्का में 4,670 लीटर और गन्ने में 3,630 लीटर पानी प्रति लीटर एथेनॉल लगता है। ऐसे में भूजल पर दबाव बढ़ेगा और पेयजल किल्लत और गंभीर हो सकती है।