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नितिन गडकरी का बड़ा बयान, अब पेट्रोल-डीजल से छुटकारा, सरकार क्यों बदल रही फ्यूल नीति?

केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने कहा कि पेट्रोल-डीजल वाहनों का भविष्य खत्म हो रहा है। सरकार हाइड्रोजन, एथेनॉल और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है ताकि आयात घटे और प्रदूषण कम हो सके।

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भारत

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Ankit Sai

Apr 29, 2026

Nitin Gadkari

सरकार हाइड्रोजन, एथेनॉल और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है फाइल फोटो-पत्रिका

Nitin Gadkari Fuel Policy: भारत में गाड़ियों के भविष्य को लेकर अब बड़ा बदलाव साफ दिखने लगा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने साफ शब्दों में कहा है कि पेट्रोल और डीजल (Petrol–Diesel) वाहनों का भविष्य अब नहीं है। उनका यह बयान सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि ऑटो सेक्टर (Auto Sector) के लिए दिशा बदलने का संकेत भी माना जा रहा है। गडकरी ने कहा कि देश हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये का खर्च पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर करता है। यह न सिर्फ आर्थिक बोझ है, बल्कि प्रदूषण का बड़ा कारण भी है। उन्होंने साफ किया कि भारत को ऐसे ईंधन की जरूरत है जो सस्ता हो, देश में ही बने और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए।

ऑटो कंपनियों को सीधी चेतावनी

नितिन गडकरी ने ऑटो कंपनियों को साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर कंपनियां सिर्फ पेट्रोल और डीजल गाड़ियों पर ही ध्यान देती रहीं, तो उनका भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्होंने कंपनियों से कहा कि अब समय है नई तकनीक और साफ ईंधन की तरफ तेजी से बढ़ने का।

हाइड्रोजन बना नई उम्मीद

गडकरी ने हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन बताया। सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। देश के कई बड़े रूट्स पर हाइड्रोजन बस और ट्रक चलाने के प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। इसमें टाटा मोटर्स, वोल्वो, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एनटीपीसी जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स के लिए सरकार ने करीब 500 करोड़ रुपये का बजट भी रखा है और देशभर में कई रिफ्यूलिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं।

एथेनॉल से भी बड़ी उम्मीद

गडकरी ने एथेनॉल को भी मजबूत विकल्प बताया। उन्होंने कहा कि भारत में एथेनॉल का उत्पादन कई स्रोतों से हो रहा है, जैसे टूटे चावल, मक्का, गन्ना और बांस। इस समय देश में 20% एथेनॉल मिश्रण यानी E20 लागू हो चुका है और अब E85 और E100 जैसे विकल्पों पर भी काम चल रहा है।

इलेक्ट्रिक और गैस आधारित गाड़ियों पर जोर

सरकार सिर्फ हाइड्रोजन और एथेनॉल तक सीमित नहीं है। सीएनजी, एलएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गडकरी का मानना है कि इन विकल्पों से न सिर्फ प्रदूषण कम होगा, बल्कि भारत की विदेशी ईंधन पर निर्भरता भी घटेगी।

आयात पर निर्भरता बनी बड़ी चुनौती

भारत अभी भी अपनी जरूरत का करीब 89 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। साल 2025 में देश ने 240 मिलियन टन से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से खरीदा। इसी वजह से सरकार अब घरेलू और सस्ते ईंधन विकल्पों पर जोर दे रही है। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में ऐसे इंजन और वाहन बाजार में आएं जो ज्यादा एथेनॉल या हाइड्रोजन पर चल सकें।
यह बदलाव धीरे-धीरे होगा।