उन्होंने कहा कि मैं (मुख्यमंत्री) उमर अब्दुल्ला से पूछना चाहती हूं कि 9 जुलाई 2015 को, जब वे राजस्व मंत्री थे, ऐसा आदेश क्यों जारी किया गया, जिसमें कहा गया था कि डिजिटलीकरण केवल अंग्रेजी में ही किया जाएगा। उर्दू को हटा दिया गया, और हम सभी जानते हैं कि इसके बाद हमें तहसीलदारों और पटवारियों से कई शिकायतें मिलीं, बढ़ती गड़बड़ियों को लेकर। यहां हरियाणा मॉडल लागू किया गया और इस तथ्य के बावजूद कि हमारे सभी दस्तावेज उर्दू में हैं, राजस्व विभाग पर अंग्रेजी थोप दी गई।