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‘भगवंत मान कोर्ट में हाजिर हो, अन्यथा जमानत होगी रद्द’, मानहानि केस में मानसा की कोर्ट की कड़ी चेतावनी

Bhagwant Mann vs Nazar Singh Manshahia: मानसा की अदालत ने पंजाब के सीएम भगवंत मान को कड़ी चेतावनी दी है। सुनवाई में लगातार अनुपस्थित रहने पर कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द करने के संकेत दिए हैं। जानें क्या है नजर सिंह मनशाहिया केस और BNSS की धारा 273 के तहत दायर नई अर्जी का पूरा मामला।
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Bhagwant Mann update news

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (ANI)

Punjab CM Bhagwant Mann: मानसा की एक स्थानीय कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए निर्देश दिया है कि वे एक चल मानहानि मामले की अगली सुनवाई में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें, अन्यथा उनकी जमानत रद्द कर दी जाएगी।

यह आदेश ACJM राजिंदर सिंह नागपाल की अदालत ने 'नज़र सिंह मनशाहिया बनाम भगवंत मान और अन्य' नामक मामले की सुनवाई करते हुए पारित किया। अदालत ने संज्ञान लिया कि आरोपी ने चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण बैठक का हवाला देते हुए व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट मांगी थी।

20 अक्टूबर 2022 के बाद से कोर्ट में नहीं हुए पेश

हालांकि, कोर्ट ने टिप्पणी की कि मान 20 अक्टूबर, 2022 के बाद से एक बार भी पेश नहीं हुए हैं, जिससे कार्यवाही की प्रगति में बाधा उत्पन्न हुई है। अदालत ने आगे कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का उनका पिछला अनुरोध पहले ही खारिज किया जा चुका था, और आरोपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था।

इसके अतिरिक्त, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 273 के तहत दायर एक आवेदन, जिसमें वकील के माध्यम से प्रतिनिधित्व करने की अनुमति मांगी गई है, को भी रिकॉर्ड पर ले लिया गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस आवेदन का जवाब 1 मई, 2026 तक दाखिल किया जाए।

क्या है मामला?

वर्ष 2019 में आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नजर सिंह मनशाहिया ने भगवंत मान और अन्य के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, भगवंत मान ने बयान दिया था कि मनशहिया ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने के बदले कांग्रेस से पैसे लिए थे।

मनशाहिया ने इन आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि पैसे लेकर पार्टी बदलने के आरोप निराधार है। ये केवल उन्हें परेशान करने और केवल छवि खराब करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं।

निचली अदालत ने मामले में संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को समन भेजा था। मीडिया से जुड़े कई सह-आरोपी राहत के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट चले गए थे। मार्च 2025 में कोर्ट ने पत्रकारों के खिलाफ दर्ज शिकायत को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि उनका मानहानि का कोई इरादा या सबूत नहीं है।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद कुछ आरोपियों के खिलाफ मामला खत्म हो गया है, लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और शेष के खिलाफ मानहानि का मामला अभी भी जारी है। अब सभी की निगाहें 1 मई पर टिकी हुई हैं, क्योंकि कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को उपस्थित होने का निर्देश दिया है।