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तेल संकट के बीच 85% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल की तैयारी कर रहा भारत, जानिए क्या हैं चुनौतियां

Flex Fuel: भारत सरकार फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की तैयारी में है जो E85 यानी 85% एथेनॉल पर चल सकें। होर्मुज स्ट्रेट में गोलीबारी और कच्चे तेल की उछलती कीमतों के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय बैठक कर रहा है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

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Updated: 20 Apr 2026, 5:27 PM IST

Ethanol Fuel

भारत एथेनॉल मिक्स्ड फ्यूल की तरफ बढ़ रहा है। (PC: AI)

E85 Ethanol: होर्मुज में गोलीबारी और कच्चे तेल की उछलती कीमतों के बीच भारत सरकार ने तय कर लिया है कि अब पेट्रोल पर निर्भरता कम करनी ही होगी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारी सोमवार को एक अहम बैठक में बैठे हैं। एजेंडा एक ही है- फ्लेक्स फ्यूल वाहनों यानी FFV को पूरे देश में फैलाने का रोडमैप तैयार करना। एक वर्किंग ग्रुप ने यह रोडमैप बनाया है और इस बैठक में उसे पेश किया जाएगा।

इस वर्किंग ग्रुप में तेल कंपनियों के प्रतिनिधि हैं, गाड़ी बनाने वाली कंपनियां हैं और कई मंत्रालयों के अधिकारी भी हैं। सिफारिशें SIAM यानी सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के सदस्यों और सरकारी तेल कंपनियों के बड़े अधिकारियों के सामने रखी जाएंगी।

E85 क्या है और यह बात क्यों हो रही है

FFV यानी फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल वो गाड़ियां होती हैं, जो E85 पर चल सकती हैं। E85 मतलब 85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल का मिश्रण। अभी देश में 20% एथेनॉल मिलाने का नियम लागू है, जो 2025 में शुरू हुआ। लेकिन इसे लेकर लोगों की शिकायतें भी आई हैं, माइलेज कम होने की और इंजन पर असर पड़ने की। तो सवाल यह है कि जब 20% पर ही विवाद है, तो 85% की बात क्यों हो रही है? जवाब सीधा है। बाहर के हालात बदल गए हैं।

तेल की कीमतें और होर्मुज का खतरा

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं। बाद में थोड़ी राहत मिली, लेकिन खतरा अभी भी टला नहीं है। उधर होर्मुज स्ट्रेट अभी भी बंद है। जहाजरानी मंत्रालय ने बताया कि दो जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से निकलते वक्त गोलीबारी की जानकारी मिली और उन्हें वापस फारस की खाड़ी लौटना पड़ा। यह खबर छोटी नहीं है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल पाता है और भारत भी उसी में शामिल है। ऐसे में तेल आयात पर निर्भरता एक जोखिम नहीं, खतरा बन रहा है।

देश में एथेनॉल है, बस गाड़ियां चाहिए

भारत गन्ना उगाता है, मक्का उगाता है। एथेनॉल बनता है। लेकिन अगर गाड़ियां ही उस पर नहीं चल सकतीं, तो फायदा क्या? FFV की पूरी कोशिश इसी कड़ी को जोड़ने की है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर देश में पेट्रोल की सबसे ज्यादा खपत करता है। अगर इसी सेक्टर में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ जाए, तो एक साथ दो फायदे होंगे। विदेशी तेल पर निर्भरता घटेगी और किसानों की फसल को बाजार मिलेगा।

राह आसान नहीं

लेकिन यह काम बोलने जितना आसान नहीं। 20% एथेनॉल पर ही लोग माइलेज की शिकायत कर चुके हैं। 85% पर जाना एक बड़ी छलांग है जिसके लिए इंजन तकनीक बदलनी होगी, पेट्रोल पंपों पर नई मशीनें लगानी होंगी और उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाना होगा। सोमवार की बैठक शायद उस लंबे सफर का पहला कदम है।