US Blockade Iran: अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल उद्योग गंभीर संकट में है। तेल निकालने के बावजूद वह निर्यात नहीं कर पा रहा, जिससे स्टोरेज भर रहा है। हालात ऐसे हैं कि उसे जल्द उत्पादन घटाना पड़ सकता है।
Iran oil production: जहां दुनिया एक तरफ तेल संकट से जूझ रही है, तो उधर ईरान तेल की ओवर सप्लाई से परेशान है। ईरान के सामने इस समय बड़ी दुविधा है। अमेरिकी नाकेबंदी ने उसके तेल कारोबार की कमर तोड़ दी है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि कुछ ही हफ्तों में उसे अपने ही तेल के कुएं बंद करने पड़ सकते हैं। ईरान के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वह तेल निकाल तो रहा है, लेकिन उसे बाहर भेजने का रास्ता बंद होता जा रहा है। टैंकर भरे खड़े हैं, लेकिन निकल नहीं पा रहे। ऊपर से स्टोरेज भी तेजी से भर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति जारी रही तो ईरान को 2-3 हफ्तों के भीतर उत्पादन कम करना या पूरी तरह रोकना पड़ सकता है।
यह सिर्फ अस्थायी समस्या नहीं है। असली खतरा आगे है। ईरान के ज्यादातर तेल कुएं पुराने हैं और उनकी हालत पहले से खराब है। अगर इन्हें बंद किया गया, तो दोबारा शुरू करना आसान नहीं होगा। कई कुएं तो हमेशा के लिए बंद हो सकते हैं। यही वजह है कि ईरान हर हाल में उत्पादन चालू रखना चाहता है, भले ही नुकसान क्यों न उठाना पड़े। कुएं बंद हुए तो नुकसान सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को होगा। तेल सप्लाई कम होने से दाम आसमान पर होंगे और महंगाई तेजी से बढ़ेगी।
उधर अमेरिका का दबाव और बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने सिर्फ प्रतिबंध ही नहीं लगाए, बल्कि समुद्र में भी निगरानी बढ़ा दी है। ईरानी तेल ले जा रहे टैंकरों को रोका जा रहा है। पहले से भेजे गए तेल पर भी कार्रवाई हो रही है। नए शिपमेंट लगभग ठप पड़ गए हैं। इससे ईरान की विदेशी कमाई पर सीधा असर पड़ा है, जो पहले से ही युद्ध और प्रतिबंधों से जूझ रही अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है।
ईरान की परेशानी अब सिर्फ उसकी नहीं रह गई है। ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई कम हो रही है। जेट फ्यूल की कमी के संकेत मिलने लगे हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने लगे हैं। यानी इसका असर आम लोगों की जेब तक पहुंच रहा है।
जानकारों के मुताबिक, ईरान ने पूरी तरह संकट आने से पहले ही धीरे-धीरे उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है। खार्ग द्वीप जैसे प्रमुख टर्मिनलों पर स्टोरेज की रफ्तार पहले जैसी नहीं रही, जिससे साफ संकेत मिलता है कि उत्पादन में गिरावट आ चुकी है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान के पास सिर्फ 12 से 22 दिन तक का अतिरिक्त स्टोरेज बचा है। इसके बाद मजबूरी में उत्पादन घटाना पड़ेगा। अगर नाकेबंदी लंबी चली, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। इससे लंबे समय तक तेल उद्योग को नुकसान हो सकता है।
अगर उत्पादन बंद हुआ तो सिर्फ अर्थव्यवस्था नहीं, सामाजिक हालात भी बिगड़ सकते हैं। तेल सेक्टर में नौकरियां जा सकती हैं। विरोध और असंतोष बढ़ सकता है। इसके अलावा, रणनीतिक इलाकों में तनाव बढ़ सकता है। इतिहास बताता है कि तेल उद्योग में हलचल, सत्ता पर भी असर डालती है।