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Investment में पैसा वापस निकालने की क्या होनी चाहिए रणनीति? एक गलत फैसला करा सकता है आपका नुकसान

Investment Plan: शेयर बाजार में निवेश करने के साथ-साथ निवेशक को एग्जिट स्ट्रेटेजी या रिडेम्प्शन प्लानिंग बनानी चाहिए। अधिकतर निवेशक एग्जिट स्ट्रेटेजी नहीं होने के कारण बाजार में आने वाली गिरावट से घबराकर नुकसान उठाते हैं।

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Wealth Creation के लिए निवेश करने के साथ सही समय पर निवेश को निकालना भी जरूरी है। (PC: Freepik)

Mutual Fund Planning: किसी भी निवेश की सफलता पैसा लगाने पर नहीं, उसे सही तरीके से निकालने पर भी टिकी होती है। म्यूचुअल फंड या किसी भी स्कीम में पैसा लगाकर बड़ी रकम जुटाना निवेश का सिर्फ आधा हिस्सा है। समझदारी इस बात में है कि आप उस पैसे को सही समय पर और सही रणनीति के साथ निकालें, ताकि आपके जीवन के बड़े लक्ष्य जैसे- बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना या रिटायरमेंट बिना किसी रुकावट के पूरे हो सकें। अगर आपकी एग्जिट स्ट्रेटजी यानी पैसा निकालने का प्लान सही नहीं है, तो सालो की मेहनत से जुटाया गया पैसा भी बाजार के उतार-चढ़ाव की भेंट चढ़ सकता है।

पैसा निकालना है समझदारी का काम

पैसा जमा करना और उसे निकालना दोनों के लिए अलग सोच की जरूरत होती है। पैसा निवेश करते समय आपको बाजार के उतार-चढ़ाव में भी धैर्य और अनुशासन के साथ टिके रहना होता है। जबकि, पैसा निकालते समय सही फैसले और पहले से बने प्लान की जरूरत होती है। निवेशकों को पहले से यह तय करना होता है कि इक्विटी में पैसा लगाना कब कम करना है, कब कितना निकालना है और क्या किस्तों में निकालना सही रहेगा।

पैसा निकालने की सही रणनीति क्यों जरूरी है?

इसे एक उदाहरण से समझें। दो निवेशकों ने 20 साल तक निवेश करके बिल्कुल एक बराबर रकम जोड़ी। पहला निवेशक अपने तय लक्ष्य के पास आने पर धीरे-धीरे पैसे को सुरक्षित फंड में ट्रांसफर करता है और बिना किसी तनाव के अपना लक्ष्य पा लेता है। वहीं, दूसरा निवेशक सही रणनीति न होने के कारण आखिरी वक्त पर बाजार की गिरावट या भारी-भरकम टैक्स के जाल में फंस जाता है।

पहले दिन से तय होना चाहिए पैसा निकालने का प्लान

पैसा कब और कैसे निकालना है, इसका प्लान उसी दिन बन जाना चाहिए जिस दिन आप पहला निवेश करते हैं। जब लक्ष्य तय होता है, तो आपको पता होता है कि कितना पैसा चाहिए और कितने समय बाद चाहिए। उदाहरण के लिए, बच्चों की हायर ऐजुकेशन के लिए पैसा जोड़ रहे माता-पिता को कॉलेज की पढ़ाई शुरू होने से दो-तीन साल पहले ही पैसे का एक हिस्सा डेट फंड में डालना शुरू कर देना चाहिए। इसी तरह रिटायर होने वाले व्यक्ति को एक साथ सारा पैसा निकालने के बजाय हर महीने निश्चित आय (SWP) का प्लान बनाना चाहिए।

प्लान होने से नहीं रहता बाजार का डर

पैसा निकालने के एक तय प्लान का फायदा यह होता है कि निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव से नहीं डरता। जब आपके पास एक रोडमैप होता है, तो आप न तो बाजार की गिरावट में घबराकर गलत फैसला लेते हैं और न ही बाजार में तेजी आने पर लालच में आते हैं।

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