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US Hormuz blockade: होर्मुज बंद हुई तो क्या अब रेल से चीन पहुंचेगा तेल? अमेरिका के सामने झुकने को तैयार नहीं ईरान

Iran US ceasefire: अमेरिका ने ईरान के सभी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है, जिससे ईरान का समुद्री व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। 10,000 से ज्यादा अमेरिकी जवान तैनात हैं।
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Apr 15, 2026
US Hormuz blockade
2016 में पहली मालगाड़ी चीन से ईरान पहुंची थी। (PC: AI)

US Iran blockade: दुनिया का 20 फीसदी तेल जिस रास्ते से गुजरता है, उसे अमेरिका ने बंद कर दिया है। यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डालने वाला फैसला है। सोमवार रात से अमेरिकी नौसेना ने ईरान के सभी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी। इसे 36 घंटे भी नहीं बीते थे कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने ऐलान कर दिया कि ईरान का समुद्री व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि ईरान की 90 फीसदी अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर टिकी है और अमेरिका ने उसी नस को दबा दिया है।

CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि 10,000 से ज्यादा अमेरिकी नौसैनिक, मरीन और वायुसेना के जवान इस ऑपरेशन में लगे हैं। पहले 24 घंटे में छह व्यापारिक जहाजों को वापस ईरानी बंदरगाह की तरफ मोड़ दिया गया। रॉयटर्स के मुताबिक मंगलवार को अमेरिकी नौसेना के एक विध्वंसक जहाज ने ईरान के चाबहार बंदरगाह से निकले दो तेल टैंकरों को रोका और रेडियो पर संपर्क करके उन्हें वापस लौटने का आदेश दिया।

दबाव बनाओ, समझौता कराओ की रणनीति

डोनाल्ड ट्रंप इस नाकेबंदी को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रही, उसके बाद ट्रंप ने यह कदम उठाया। मकसद साफ है। ईरान को मजबूर करना कि वह अमेरिका की शर्तों पर युद्ध खत्म करने के लिए राजी हो। लेकिन ईरान ने इसे गैरकानूनी कार्रवाई और समुद्री लूट करार दिया है।

ईरान को कितनी चोट लगेगी?

यहां एक दिलचस्प बात है। पिछले कुछ हफ्तों में ईरान की कमाई बढ़ी थी, घटी नहीं थी। फरवरी में जब यह युद्ध शुरू हुआ, ईरान हर दिन करीब 115 मिलियन डॉलर तेल से कमा रहा था। मार्च से अप्रैल के बीच ईरान ने 55 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल निर्यात किया और तेल का भाव $90 से $100 प्रति बैरल के बीच रहा। यानी एक महीने में करीब 4.97 अरब डॉलर की कमाई- पहले से 40 फीसदी ज्यादा। लेकिन अब नाकेबंदी के बाद यह सब रुक गया है।

व्यापार खुफिया एजेंसी Windward के मुताबिक इस वक्त समुद्र में ईरान का करीब 15.77 करोड़ बैरल तेल मौजूद है। इसमें से 97.6 फीसदी चीन की तरफ जा रहा था। यह सारा तेल अब अटक सकता है। दोहा इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर मोहम्मद एलमासरी का कहना है, "ईरान कम से कम उतना तेल तो नहीं बेच पाएगा जितना पहले बेच रहा था।" साथ ही वह टोल वसूली भी बंद हो जाएगी जो ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से ले रहा था।

सिर्फ तेल नहीं, बाकी चीजें भी फंसेंगी

ईरान चीन, भारत और यूएई को पेट्रोकेमिकल, प्लास्टिक और कृषि उत्पाद भेजता है। बदले में चीन, यूएई और तुर्किये से मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और खाद्य सामग्री मंगाता है। मार्च 2025 से जनवरी 2026 के बीच ईरान का गैर-तेल व्यापार 94 अरब डॉलर रहा। अगर यह व्यापार रुका तो घरेलू बाजार में सामान की किल्लत होगी, महंगाई बढ़ेगी और पहले से टूटी अर्थव्यवस्था और दबाव में आ जाएगी।

मिडिल ईस्ट काउंसिल के फ्रेडरिक श्नाइडर कहते हैं, "पिछले छह हफ्ते ईरान के लिए तेल राजस्व के लिहाज से काफी अच्छे थे। लेकिन नाकेबंदी से यह बदल जाएगा। हालांकि, ईरान के पास फरवरी में तैरते टैंकरों में करीब 12.7 करोड़ बैरल का बफर स्टॉक था।"

क्या रेल से चीन पहुंचेगा तेल?

हां, एक रास्ता है- रेलवे। ईरान और चीन ने मिलकर कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से होते हुए एक रेल मार्ग बनाया है। 2016 में पहली मालगाड़ी चीन से ईरान पहुंची थी। लेकिन रेल से कच्चा तेल ले जाना आसान नहीं है। इसमें बड़ी लॉजिस्टिक चुनौतियां हैं। अभी तक कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि ईरान से चीन को रेल रास्ते तेल भेजा गया हो। इसके अलावा "डार्क शिप" यानी वे जहाज जो अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके चलते हैं, वे भी एक विकल्प रहे हैं। लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी के सामने यह तरकीब कितनी काम आएगी, यह देखना होगा।

ईरान का रुख और तनाव की आशंका

तेहरान स्थित सेंटर फॉर मिडिल ईस्टर्न स्ट्रेटेजिक स्टडीज के अबास असलानी का कहना है कि ईरान के लोग मान रहे हैं कि अमेरिका नाकेबंदी का झटका देकर फिर बातचीत की तरफ इशारा कर रहा है। वजह यह है कि तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जाने के बाद दुनियाभर में हड़कंप मच गया है। असलानी ने साफ कहा- "युद्धविराम बहुत नाजुक है। यह नाकेबंदी उसे और उलझा सकती है।"

श्नाइडर ने भी चेताया, "ज्यादातर ईरानी टैंकर चीन की तरफ जा रहे थे। मुझे नहीं लगता चीन इस नाकेबंदी के आगे झुकेगा और अमेरिकी नौसेना भी इन जहाजों को जब्त करने या डुबोने की हिम्मत करेगी, यह भी मुश्किल लगता है।" उनका आकलन है- "यह स्थिति दो में से एक दिशा में जाएगी। या तो युद्धविराम और बातचीत, या फिर बमबारी और मिसाइल हमलों की वापसी।" जो भी हो, दुनिया की सांसें थमी हुई हैं।

Updated on:
15 Apr 2026 03:05 pm
Published on:
15 Apr 2026 12:14 pm