Kandla Port Development: दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी कांडला पोर्ट को विश्व स्तरीय बनाने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन, शिपबिल्डिंग, नई जेटी और हाइपरलूप पर काम कर रही है।
Kandla Port Development: गुजरात के कच्छ जिले में स्थित कांडला पोर्ट, जिसे अब दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA) के नाम से जाना जाता है, देश के प्रमुख समुद्री बंदरगाहों में शामिल है। केंद्र सरकार इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का आधुनिक पोर्ट बनाने की दिशा में बड़े पैमाने पर निवेश और नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रही है। शिपबिल्डिंग, कंटेनर टर्मिनल विस्तार और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे भविष्य से जुड़े प्रोजेक्ट्स इस बदलाव की नींव बन रहे हैं।
पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय की निगरानी में दीनदयाल पोर्ट के विस्तार और आधुनिकीकरण की कई योजनाएं चल रही हैं। इन योजनाओं के पूरा होने से न सिर्फ पोर्ट की कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ेगी, बल्कि कच्छ क्षेत्र और उत्तर भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। कई प्रोजेक्ट्स को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।
दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह के अनुसार, कांडला पोर्ट को नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में चिन्हित किया गया है। इस दिशा में निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों ने करीब 3,500 एकड़ भूमि भी ली है। आने वाले समय में यहां गीगा-स्केल पर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और उससे जुड़ी सप्लाई चेन विकसित की जाएगी। इस सेक्टर में करीब डेढ़ से दो लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई जा रही है।
पोर्ट क्षेत्र में मेगा शिपबिल्डिंग और शिप रिपेयर सुविधा विकसित करने की योजना भी तेज़ी से आगे बढ़ रही है। इसके लिए कुछ क्षेत्रों को खाली कराया गया है। सरकार का लक्ष्य बड़े समुद्री जहाजों, तेल टैंकरों और कंटेनर वेसल्स का निर्माण और रखरखाव देश में ही करना है। इस परियोजना को लेकर कोरियाई कंपनियों के साथ बातचीत भी हो चुकी है। हालांकि फिलहाल भारत में वीएलसीसी जैसे बड़े जहाज बनाना विदेशों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत महंगा पड़ रहा है, जिसे कम करने के उपायों पर विचार किया जा रहा है।
सुशील कुमार सिंह ने बताया कि सिंगापुर के ग्रीन कॉरिडोर के बेहद नज़दीक होने का फायदा कांडला पोर्ट को मिल सकता है। ग्रीन मेथेनॉल और ड्यूल फ्यूल पर चलने वाले जहाजों को यहां ईंधन की सुविधा देने की योजना है। इससे अधिक संख्या में जहाज पोर्ट पर आएंगे, कार्गो मूवमेंट बढ़ेगा और पोर्ट की वैश्विक पहचान मजबूत होगी।
फिलहाल कांडला पोर्ट पर 25 से 30 जहाजों को 10 से 15 दिनों तक वेटिंग में रहना पड़ता है, जिससे आर्थिक नुकसान होता है। इस समस्या के समाधान के लिए करीब 27,000 करोड़ रुपये की लागत से 6 किलोमीटर लंबी नई जेटी विकसित की जाएगी। इसके बनने के बाद एक साथ 15-16 अतिरिक्त जहाजों को बर्थिंग की सुविधा मिल सकेगी।
पोर्ट से रोजाना 7 से 8 हजार ट्रक निकलते हैं, जो कई बार 10 हजार से भी ज्यादा हो जाते हैं। ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए IIT मद्रास के सहयोग से हाइपरलूप टेक्नोलॉजी पर काम किया जा रहा है। इसका एक प्रोटोटाइप मॉडल तैयार किया जा चुका है। इसके अलावा मेट्रो अधिकारियों के साथ भी बैठकें हुई हैं, ताकि सड़क, रेल और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को और बेहतर बनाया जा सके। साथ ही पुराने जेटी और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के नवीनीकरण का काम भी लगातार जारी है।