
MCX Gold Price: सोने की चमक इस हफ्ते फीकी पड़ी है। एमसीएक्स एक्सचेंज पर सोने की कीमतों में शुक्रवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीति के संकेत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल और महंगाई की बढ़ती चिंता ने निवेशकों को सोने से दूरी बनाने पर मजबूर किया। अक्टूबर डिलीवरी वाला एमसीएक्स गोल्ड इस पूरे हफ्ते दबाव में रहा। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार तक इसका भाव करीब 3,500 रुपये गिरकर 1,50,891 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले वाले हफ्ते में सोने ने 1,597 रुपये की बढ़त दर्ज की थी। यानी इस हफ्ते की गिरावट पिछली तेजी के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा रही।
केडिया एडवाइजरी के एमडी अजय केडिया के अनुसार, सोने की कीमतों पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड से आया है। गुरुवार को अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड 19 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। वहीं, 30 साल की ट्रेजरी यील्ड भी 2004 के बाद के उच्चतम स्तर पर रही। दरअसल, निवेशक अब अमेरिकी बॉन्ड में पैसा लगाने के बदले ज्यादा रिटर्न मांग रहे हैं। इसके पीछे लगातार बनी हुई महंगाई, सरकारी खर्च और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कारोबार में कंपनियों की बढ़ती उधारी जैसी वजहें हैं।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने का सीधा असर सोने पर पड़ता है। सोना खुद कोई ब्याज नहीं देता। ऐसे में जब बॉन्ड और दूसरे ब्याज देने वाले निवेश ज्यादा आकर्षक नजर आते हैं, तो सोने में निवेश की मांग कमजोर पड़ सकती है।
केडिया के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों ने भी सोने पर दबाव बढ़ाया है। फेड गवर्नर माइकल बर्र ने इस सप्ताह अपने भाषण में कहा कि महंगाई को केंद्रीय बैंक के 2 फीसदी टार्गेट तक लाने के लिए आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। फेड अधिकारी जॉन विलियम्स ने भी संकेत दिया कि अब केंद्रीय बैंक पहले से तय दिशा बताने के बजाय आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर फैसले करेगा। अमेरिका में महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। ऐसे में ब्याज दरों को लेकर बाजार की नजर फेड के अगले कदम पर है।
सोने में इस गिरावट का असर सिर्फ इस हफ्ते तक सीमित नहीं रहा। सितंबर में अब तक की बढ़त भी कमजोर पड़ गई है। अगस्त में सोने ने जिस तरह की तेजी दिखाई थी, उसके मुकाबले सितंबर का प्रदर्शन पूरी तरह उलट तस्वीर दिखा रहा है। सोने को आमतौर पर महंगाई से बचाव और आर्थिक या भू-राजनीतिक अनिश्चितता के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन ब्याज दरें बढ़ने की संभावना इस फायदे को कुछ हद तक कमजोर कर देती है।
कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती भी बाजार के लिए अहम संकेत है। क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों से दुनिया भर में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि निवेशक फेड की ब्याज दर नीति को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं। हालांकि, ईरान को लेकर चल रही बातचीत से कुछ उम्मीद बंधी है। रॉयटर्स के मुताबिक, न्यूयॉर्क में बातचीत कर रहे पक्ष युद्ध से बाहर निकलने के चरणबद्ध रास्ते पर चर्चा कर रहे हैं। इसमें तेहरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर खोलना और अमेरिका की ओर से ईरान पर आर्थिक नाकाबंदी हटाना शामिल हो सकता है। इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमतें कम नहीं हो रही हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि हालिया गिरावट के बाद क्या सोना दोबारा 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच सकता है? ब्रोकरेज फर्म ICICI Global Markets के मुताबिक, घरेलू सोने की कीमतों की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी। इसके अलावा रुपये में होने वाला उतार-चढ़ाव भी घरेलू कीमतों में तेजी या गिरावट की वजह बन सकता है।
घरेलू बाजार में फिजिकल गोल्ड की मांग को आने वाले समय में त्योहारी और शादी के सीजन से सहारा मिल सकता है। भारत में इस दौरान सोने की खरीद बढ़ने से कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है। ब्रोकरेज ने अपनी राय बरकरार रखते हुए अनुमान जताया है कि 2026 के बाकी समय में घरेलू सोने की कीमतें 1,40,000 से 1,60,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में रह सकती हैं।
इसका मतलब है कि मौजूदा गिरावट के बावजूद 1.60 लाख रुपये का स्तर पूरी तरह तस्वीर से बाहर नहीं हुआ है। हालांकि, आगे सोने की चाल अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति, बॉन्ड यील्ड, डॉलर, रुपये की चाल, कच्चे तेल और वैश्विक तनाव जैसे कई फैक्टर तय करेंगे।
(यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)