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Antrix-Devas deal पर बोली निर्मला सीतारमण, यूपीए सरकार की नाक के नीचे हुआ देश की सुरक्षा से खिलवाड़

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 10 साल से ज्यादा पुराने Antrix Devas Deal मामले में यूपीए सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार की नाक के नीचे देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हुआ। उन्होंने कहा कि ये सौदा देश की सुरक्षा के खिलाफ था और इसमें बड़ा घोटाला हुआ है। वित्त मंत्री ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।

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Nirmala Sitharaman Says Antrix-Dewas deal against country's security

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 10 साल से अधिक पुराने Antrix Devas Deal मामले में मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मीडिया से बातचीत में वित्त मंत्री ने पूर्व की यूपीए सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। इस मामले के लिए वित्त मंत्रीने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकार को जिम्मेदार बताया और कहा कि यह भारत के साथ फ्रॉड हुआ था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार की गलतियों को सही करने में 11-12 साल लग गए। 2011 में जब इसे रद्द किया गया तब देवास अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में चला गया। भारत सरकार ने मध्यस्थता के लिए नियुक्ति नहीं की। 21 दिनों के अंदर मध्यस्थता के लिए नियुक्ति के लिए कहा गया, लेकिन सरकार ने तब भी इसको लेकर नियुक्ति नहीं की।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि जब 2005 में यह सौदा हुआ था, तब यूपीए की सरकार थी। डील में घोटाला हुआ है। इसे कैंसल करने में यूपीए सरकार को 6 साल लग गए। मामला इतना बढ़ा है कि एक सेंट्रल मिनिस्टर को गिरफ्तार करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि, तत्कालीन यूपीए ने इस सौदे की खबर कैबिनेट को भी नहीं दी। यूपीए की लालच की वजह से मोदी सरकार कई अंतराष्ट्रीय अदालतों में केस लड़ रही है।

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वित्त मंत्री ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 24 फरवरी 2011 को कहा था कि एंट्रिक्स और देवास डील को मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि ये कभी इस स्तर तक पहुंचा ही नहीं। सिर्फ दो सैटेलाइट को लॉन्च करने की बात कैबिनेट के संज्ञान में लाई गई। 2015 में मोदी सरकार ने नया मसौदा तैयार किया। भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसला का स्वागत किया।

सीतारमण ने कहा कि ये सौदा असल में एक धोखाधड़ी थी। पीएम मोदी की सरकार ने हर अदालत में इस फ्रॉड के खिलाफ लड़ाई की है। इस मामले को देवास आर्बिट्रेटर के पास लेकर गई, लेकिन तब की सरकार ने कभी आर्बिटरेटर अपॉइंट नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 17 जनवरी को दिए अपने फैसले में कहा है कि देवास मल्टीमीडिया को एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जीवाड़े के मकसद से ही बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक देवास भारत में सिर्फ 579 करोड़ रुपए लेकर आई, जबकि 85 फीसदी राशि भारत से बाहर भेज दी गई। इसमें कुछ हिस्सा अमरीका में कुछ सब्सिडियरी को बनाने के लिए भेज दिया गया। कुछ हिस्सा सर्विस और सपोर्ट के लिए भेजा गया। जबकि कुछ हिस्सा कानूनी लड़ाई में खर्च कर दिया गया।

क्या है देवास-एंट्रिक्स डील

ये मामला इसरो की Antrix Corp और देवास मल्टीमीडिया के बीच हुए एक सैटेलाइट सौदे से जुड़ा है। देवास मल्टीमीडिया और एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के बीच साल 2005 में सैटेलाइट सेवा से जुड़ी एक डील हुई थी। बाद में पता चला सैटेलाइट का इस्तेमाल मोबाइल से बातचीत के लिए होना था, लेकिन सरकार की इजाजत नहीं ली गई। देवास को इसरो के ही पूर्व साइंटिफिक सेक्रेटरी एमडी चंद्रशेखर ने बनाया था। इसे 2011 में फर्जीवाड़े के आरोपों को चलते रद्द कर दिया गया।

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डील कैंसल होने के बाद देवास ने भारत सरकार से अपने नुकसान की भरपाई करने की मांग की थी। खिंचता हुआ ये मामला इंटरनेशनल कोर्ट में पहुंच गया। यहां देवास की जीत हुई थी। इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स की कोर्ट ने भारत सरकार से कहा था कि वह देवास को 1.3 बिलियन डॉलर का भुगतान करे। इस रकम की रिकवरी के लिए देवास के विदेशी शेयरहोल्डर्स कनाडा और अमरीका समेत कई देशों में भारत सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर कर चुके हैं।

Updated on:
18 Jan 2022 06:05 pm
Published on:
18 Jan 2022 05:38 pm
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