
Paytm Share Price Today: डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम के शेयरों में गुरुवार, 8 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। पेटीएम की मूल कंपनी One97 Communications के शेयर करीब 10% तक टूट गए। इसकी बड़ी वजह यूपीआई पेमेंट पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर व्यवस्था लागू होने में संभावित देरी की खबर है। साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को आरबीआई एक्ट की सेकेंड शेड्यूल में शामिल शेड्यूल्ड बैंकों की लिस्ट से हटा दिया है।
एनएसई पर सुबह 9 बजकर 27 मिनट पर पेटीएम का शेयर 10 फीसदी या 173.20 रुपये की गिरावट के साथ 1558.80 रुपये पर ट्रेड करता दिखाई दिया।
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, माना जा रहा है कि एमडीआर लागू होने की तारीख 15 अक्टूबर 2026 से आगे खिसककर 1 जनवरी 2027 हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो पेटीएम समेत दूसरी पेमेंट कंपनियों को यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन से अतिरिक्त कमाई शुरू होने के लिए करीब ढाई महीने और इंतजार करना पड़ेगा। माना जा रहा है कि फेस्टिव सीजन में कारोबारियों पर किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क न पड़े, इसलिए एमडीआर लागू करने की तारीख को आगे बढ़ाने पर विचार हो रहा है। खुदरा कारोबारियों के संगठनों की ओर से भी इस व्यवस्था को लेकर आपत्ति जताई गई है।
एमडीआर को लेकर अनिश्चितता बढ़ने का असर सिर्फ पेटीएम पर नहीं पड़ा है। Pine Labs और One MobiKwik Systems के शेयरों में भी दबाव देखा गया है। निवेशक अब इस बात का दोबारा आकलन कर रहे हैं कि यूपीआई से कमाई बढ़ने का फायदा कंपनियों को कब से मिल पाएगा। दरअसल, सितंबर में जब यूपीआई के लिए प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था की घोषणा हुई थी, तब पेमेंट कंपनियों के शेयरों में तेजी आई थी। बाजार को उम्मीद थी कि इससे कंपनियों के लिए कमाई का एक नया रास्ता खुलेगा। पेटीएम के शेयर भी उस समय एक दौर में 7% से ज्यादा चढ़ गए थे। अब तस्वीर कुछ बदलती नजर आ रही है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र पर्सन टू मर्चेंट यानी P2M यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर लगाया जाना है। 75,000 रुपये या इससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा। खास बात यह है कि इसका बोझ आम ग्राहकों पर नहीं डाला जाना है। यानी ग्राहक पहले की तरह यूपीआई से भुगतान कर सकेंगे और उन्हें इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। यह शुल्क मुख्य रूप से मर्चेंट ट्रांजैक्शन से जुड़ा होगा और इसी वजह से पेमेंट कंपनियों को इससे अतिरिक्त आय की उम्मीद थी।
पेटीएम का मर्चेंट पेमेंट कारोबार काफी बड़ा है। ऐसे में कंपनी उन पेमेंट कंपनियों में शामिल थी, जिन्हें एमडीआर व्यवस्था लागू होने से सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद थी। कंपनी पहले भी संकेत दे चुकी है कि नए एमडीआर फ्रेमवर्क से उन मर्चेंट ट्रांजैक्शन से अतिरिक्त आय हासिल हो सकती है, जिन पर अभी तक कोई शुल्क नहीं लिया जाता था। यही वजह है कि शेयर में दूसरी पेमेंट कंपनियों की तुलना में ज्यादा तेज गिरावट देखने को मिली।
पेटीएम के शेयरों में गिरावट ऐसे समय में आई है, जब एक दिन पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) को आरबीआई एक्ट की सेकेंड शेड्यूल में शामिल शेड्यूल्ड बैंक्स की लिस्ट से हटा दिया था। यह कदम पेटीएम पेमेंट्स बैंक की बैंकिंग गतिविधियों को बंद करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले आरबीआई ने बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)