
Why PB Fintech Share Fall: इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए गुरुवार का कारोबारी सत्र भारी पड़ता दिख रहा है। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) के बीमा वितरण से जुड़े नए प्रस्ताव के सामने आने के बाद पीबी फिनटेक के शेयरों में तेज बिकवाली शुरू हो गई। पॉलिसीबाजार की पैरेंट कंपनी का शेयर सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर 28.1 फीसदी या 528 रुपये गिरकर 1357.90 रुपये पर ट्रेड करता दिखा। वहीं, Turtlemint Fintech Solutions का शेयर इस समय 20% टूटकर 109.04 रुपये के लोअर सर्किट पर पहुंच गया।
शेयर बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह इरडा का नया कंसल्टेशन पेपर है। रेगुलेटर ने 'Recalibrating Economics of Insurance Distribution' नाम से यह प्रस्ताव जारी किया है। इसमें इंश्योरेंस की बिक्री और वितरण से जुड़े खर्च, कमीशन, ग्राहकों के साथ व्यवहार, पारदर्शिता और डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर कई बदलाव सुझाए गए हैं।
सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, बाजार की चिंता खास तौर पर इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर्स को मिलने वाले कमीशन और उनकी कमाई के मॉडल को लेकर है। पीबी फिनटेक का कारोबार ऑनलाइन इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ा है, इसलिए प्रस्तावित बदलाव कंपनी की कमाई पर असर डाल सकते हैं। कुछ ब्रोकरेज रिपोर्ट्स ने भी कमीशन में संभावित कटौती को पीबी फिनटेक के लिए बड़ा जोखिम बताया है।
इरडा ने मौजूदा एक समान कमीशन व्यवस्था की जगह ऐसा फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है, जिसमें कमीशन की सीमा कई बातों को ध्यान में रखकर तय होगी। इसमें इंश्योरेंस का सेगमेंट, बिजनेस की कैटेगरी, डिस्ट्रीब्यूशन चैनल, प्रोडक्ट कितना जटिल है और उसे बेचने व सर्विस देने में कितना काम लगता है, जैसी चीजें शामिल होंगी। प्रस्ताव में अलग-अलग इंश्योरेंस प्रोडक्ट के लिए कमीशन की सीमाएं तय करने की बात कही गई है। उदाहरण के तौर पर हेल्थ इंश्योरेंस में नई पॉलिसी पर डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन को 15% से 20% तक सीमित करने का प्रस्ताव है। वहीं, रिन्यूअल और पोर्टिंग के मामले में यह सीमा 5% से 10% रखे जाने की बात कही गई है।
लाइफ इंश्योरेंस में पहले साल के कमीशन के लिए पॉलिसी की अवधि के आधार पर 5% से 20% तक की सीमा प्रस्तावित है। कुछ अनिवार्य कवर, जैसे थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस पर बहुत कम या शून्य कमीशन का भी प्रस्ताव रखा गया है।
इरडा ने Expense of Management यानी EoM के नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए कंपनी स्तर पर EoM सीमा को ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम यानी GDPI से जोड़ने की बात कही गई है। प्रस्ताव के मुताबिक यह सीमा दो साल में 15% और पांच साल में 12.5% तक लाई जा सकती है। जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के मामले में गणना का आधार ग्रॉस रिटन प्रीमियम से बदलकर घरेलू जीडीपीआई करने का प्रस्ताव है। इसके साथ पांच साल में EoM सीमा को 30% GWP से घटाकर 20% GDPI तक लाने की बात कही गई है। इरडा का कहना है कि इन बदलावों का मकसद इंश्योरेंस की कुल लागत कम करना और पॉलिसीधारकों के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित करना है।
इरडा ने इंश्योरेंस कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल होने वाले डार्क पैटर्न्स को लेकर भी सख्ती का प्रस्ताव रखा है। आसान भाषा में समझें तो डार्क पैटर्न ऐसी वेबसाइट या ऐप डिजाइन को कहा जाता है, जिससे ग्राहक को किसी ऐसे काम के लिए प्रेरित किया जाए जिसे वह शुरुआत में करना नहीं चाहता था। इरडा का प्रस्ताव है कि ग्राहकों को किसी इंश्योरेंस प्रोडक्ट की कीमत, फीचर्स और क्वालिटी से जुड़ी जानकारी देखने के लिए पहले अपनी निजी जानकारी देने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। रेगुलेटर ने व्यक्तिगत जानकारी मांगने को डार्क पैटर्न का एक उदाहरण बताया है।
यह बात निवेशकों के लिए समझना जरूरी है कि इरडा के ये प्रस्ताव अभी अंतिम नियम नहीं हैं। रेगुलेटर ने इस कंसल्टेशन पेपर पर इंडस्ट्री और दूसरे हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। इरडा ने सुझाव और आपत्तियां भेजने की अंतिम तारीख 25 अक्टूबर 2026 रखी है। इसके बाद प्रस्तावों में बदलाव हो सकते हैं और अंतिम नियम अलग रूप में सामने आ सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)