
किसान अगर खेती के लिए सोने के गहने गिरवी रखकर बैंक से लोन लेते हैं, तो आने वाले समय में बैंक उनसे ज्यादा दस्तावेज मांग सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एग्रीकल्चर लोन और प्राथमिकता वाले क्षेत्र को दिए जाने वाले लोन से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सोना गिरवी रखकर लिया गया कर्ज वास्तव में कृषि गतिविधियों के लिए ही इस्तेमाल हो रहा है।
आरबीआई के इस प्रस्ताव का असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं, बल्कि बैंकों पर भी पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक ने लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) के तहत डिस्काउंट किए गए बिलों को प्राथमिकता वाले क्षेत्र के कर्ज की गणना में शामिल करने का प्रस्ताव भी दिया है। इससे बैंकों के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कर्ज देने का टार्गेट बढ़ सकता है। आरबीआई ने 'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग टारगेट्स एंड क्लासिफिकेशन) डायरेक्शंस, 2026' का ड्राफ्ट जारी किया है। इस पर 26 नवंबर तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
आरबीआई के प्रस्ताव के मुताबिक, अगर बैंक किसी किसान को सोना गिरवी रखकर कृषि गतिविधियों के लिए लोन देते हैं, तो उन्हें कर्ज से जुड़ी कुछ अतिरिक्त जानकारियां अपने पास रखनी होंगी। इनमें किसान के खेती वाले खेत का स्थान, वहां उगाई जाने वाली फसल और जरूरत के मुताबिक फसल को बैंक के पास गिरवी रखने से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। सबसे अहम बात यह है कि बैंक सिर्फ गिरवी रखे गए सोने की कीमत देखकर लोन की रकम तय नहीं कर सकेंगे। उन्हें यह भी देखना होगा कि किसान को खेती के लिए वास्तव में कितने कर्ज की जरूरत है। लोन की रकम तय करते समय संबंधित फसल के लिए लागू स्केल ऑफ फाइनेंस और खेती से जुड़ी जरूरतों का आकलन करना होगा।
इसके अलावा, बैंक अधिकारियों को समय-समय पर खेतों का दौरा करना होगा। इन दौरों का रिकॉर्ड भी रखना होगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि लोन की रकम का इस्तेमाल उसी काम के लिए हो रहा है जिसके लिए कर्ज लिया गया है।
आरबीआई के प्रस्ताव में भूमिहीन कृषि मजदूरों और बटाईदार किसानों का भी ध्यान रखा गया है। ऐसे कई किसानों के पास जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज या लीज डीड नहीं होती हैं। ऐसे मामलों में बैंक को दूसरे सत्यापित दस्तावेज रखने होंगे, जिनसे यह साबित हो सके कि संबंधित व्यक्ति कृषि गतिविधियों से जुड़ा है और प्राथमिकता वाले क्षेत्र के तहत कर्ज पाने की पात्रता रखता है। आरबीआई के ड्राफ्ट में स्पष्ट किया गया है कि सिर्फ इसलिए किसी कृषि लोन को प्राथमिकता वाले क्षेत्र के वर्गीकरण से बाहर नहीं किया जा सकता कि उसके बदले सोने के गहने या आभूषण गिरवी रखे गए हैं।
आरबीआई का यह प्रस्ताव लागू होने पर सोना गिरवी रखकर कृषि लोन लेने वाले किसानों को ज्यादा दस्तावेज देने पड़ सकते हैं। बैंक उनसे खेती की जमीन, फसल और कर्ज के इस्तेमाल से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मांग सकते हैं। इससे लोन की जांच प्रक्रिया पहले के मुकाबले सख्त हो सकती है। हालांकि, सोने के गहने गिरवी रखने वाले किसानों के लिए कृषि लोन की पात्रता खत्म करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
फिलहाल ये बदलाव RBI के ड्राफ्ट प्रस्ताव का हिस्सा हैं। केंद्रीय बैंक ने 26 नवंबर तक इस पर सुझाव मांगे हैं। अंतिम नियम जारी होने के बाद ही साफ होगा कि इन बदलावों को किस रूप में लागू किया जाएगा।