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Gold Jewellery खरीदते समय मेकिंग चार्ज में कैसे बचाएं पैसे? इन 6 बातों को समझकर पा सकते हैं बेस्ट डील

Gold Making Charges: सोने की ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ता है। ज्वेलर्स इसे प्रति ग्राम या सोने की कीमत के प्रतिशत के रूप में वसूलते हैं। साधारण डिजाइन और मशीन से बने गहने सस्ते पड़ सकते हैं।
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भारत

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Pawan Jayaswal

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Updated: 6 Nov 2026, 3:35 PM IST

Gold Making Charges

मशीन से बनी गोल्ड जूलरी पर मेकिंग चार्ज कम होता है। (PC: AI)

सोने की कीमत बाजार में लगभग एक जैसी रहती है, लेकिन फिर भी समान वजन और समान कैरेट की जूलरी पर ज्वैलर्स आपसे अलग-अलग कीमत मांग सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह मेकिंग चार्ज है। कई बार कम मेकिंग चार्ज का ऑफर देखकर ग्राहक खरीदारी कर लेते हैं, लेकिन दूसरे खर्च जोड़ने पर वही ज्वेलरी महंगी पड़ सकती है। दरअसल, मेकिंग चार्ज सोने के गहने को तैयार करने, उसकी डिजाइनिंग और कारीगरी की लागत होती है। हर ज्वेलर इसे अपने हिसाब से तय करता है। कोई प्रति ग्राम के हिसाब से शुल्क लेता है, तो कोई सोने की कुल कीमत का एक निश्चित प्रतिशत वसूलता है। डिजाइन जितनी बारीक और काम जितना मुश्किल होगा, मेकिंग चार्ज भी उतना ही ज्यादा हो सकता है। इसलिए सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल सोने का भाव या मेकिंग चार्ज देखकर फैसला करना सही नहीं है। ग्राहक को बिल में शामिल सभी खर्चों की तुलना करनी चाहिए।

अलग-अलग ज्वेलरी पर कितना लगता है मेकिंग चार्ज?

हर तरह के सोने के गहने पर एक जैसा मेकिंग चार्ज नहीं लगता। यह गहने की डिजाइन, उसे बनाने में लगने वाली मेहनत और इस्तेमाल की गई तकनीक पर निर्भर करता है। मशीन से तैयार होने वाली साधारण सोने की चेन पर आमतौर पर मेकिंग चार्ज कम होता है। वहीं, पारंपरिक गहनों और हाथ से तैयार की गई ज्वेलरी पर ज्यादा शुल्क देना पड़ सकता है। इसकी वजह इनमें होने वाली बारीक कारीगरी और डिजाइन का काम है। इसकी तुलना में मशीन से बनने वाले गहनों को तैयार करना आसान होता है। यही अंतर मेकिंग चार्ज में भी दिखाई देता है।

क्या कम मेकिंग चार्ज वाला ऑफर हमेशा फायदे का सौदा है?

इसका जवाब है, नहीं। किसी ज्वेलर का मेकिंग चार्ज कम होने से जरूरी नहीं कि उसकी ज्वेलरी भी दूसरे ज्वेलर के मुकाबले सस्ती हो। कई बार कम मेकिंग चार्ज के बावजूद सोने का भाव या अन्य शुल्क ज्यादा होने से कुल कीमत बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, एक ज्वेलर 5% मेकिंग चार्ज ले रहा है और दूसरा 10% की छूट देने का दावा कर रहा है। ऐसे में केवल प्रतिशत देखकर खरीदारी करना नुकसानदेह हो सकता है। दोनों के यहां सोने का भाव, वजन और अन्य शुल्क अलग-अलग हो सकते हैं। धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों पर ज्वेलर्स कई तरह के ऑफर देते हैं। ऐसे में खरीदारी से पहले कुछ बातों की जांच जरूर करनी चाहिए।

  • ज्वेलर किस भाव पर सोना बेच रहा है?
  • गहने का वास्तविक वजन कितना है?
  • सोने की शुद्धता कितनी है?
  • मेकिंग चार्ज के अलावा कौन-कौन से शुल्क लग रहे हैं?
  • पत्थर या अन्य सजावटी सामग्री का वजन और कीमत कितनी है?
  • पुराने सोने को वापस बेचने या बदलने पर कितनी कटौती होगी?

जीरो मेकिंग चार्ज का ऑफर कितना फायदेमंद?

त्योहारों के दौरान ज्वेलर्स ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए जीरो मेकिंग चार्ज या मेकिंग चार्ज पर भारी छूट जैसे ऑफर देते हैं। पहली नजर में ये ऑफर काफी फायदेमंद लगते हैं, लेकिन खरीदारी से पहले इनकी शर्तें समझना जरूरी है। कई बार जीरो मेकिंग चार्ज का फायदा केवल चुनिंदा डिजाइन या ज्वेलरी पर मिलता है। कुछ मामलों में वेस्टेज चार्ज या दूसरे शुल्क अलग से जोड़ दिए जाते हैं। इससे ग्राहक को मिलने वाली वास्तविक छूट कम हो सकती है। ग्राहकों को यह देखना चाहिए कि ऑफर सभी तरह के गहनों पर लागू है या केवल कुछ चुनिंदा डिजाइन पर। इसके साथ ही किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क या दूसरी शर्त तो लागू नहीं है, इसकी जानकारी भी लेनी चाहिए। ज्वेलरी खरीदते समय बायबैक और एक्सचेंज की शर्तें समझना भी जरूरी है। पुराने गहने बेचने या बदलने पर ज्वेलर कितनी कटौती करेगा, यह पहले ही पता कर लेना चाहिए।

सोने की कीमत के अलावा GST भी देना पड़ता है

सोने की ज्वेलरी की अंतिम कीमत कई चीजों को जोड़कर तय होती है। इसमें गहने में इस्तेमाल हुए सोने का वजन, उसकी शुद्धता के हिसाब से बाजार भाव, मेकिंग चार्ज, वेस्टेज चार्ज और अगर कोई पत्थर लगा है तो उसकी कीमत शामिल होती है। इसके बाद जीएसटी भी देना पड़ता है। खुदरा बाजार में सोने की ज्वेलरी खरीदने पर सामान्य तौर पर कुल लेनदेन मूल्य यानी सोने की कीमत और मेकिंग चार्ज सहित पूरी रकम पर 3% GST लगता है।

वहीं, सोने और चांदी के सिक्कों या बार की कीमत मुख्य रूप से उस दिन के बाजार भाव, वजन और शुद्धता के आधार पर तय होती है। इन पर आमतौर पर ज्वेलरी की तरह मेकिंग चार्ज नहीं लगता। इसलिए सोना खरीदते समय बिल जरूर देखें। उसमें सोने की कीमत, मेकिंग चार्ज, अन्य शुल्क और GST का पूरा ब्योरा होना चाहिए।

कैसे बचा सकते हैं सोने की ज्वेलरी पर मेकिंग चार्ज?

ज्वेलर्स आमतौर पर दो तरीकों से मेकिंग चार्ज लेते हैं। पहला- हर ग्राम पर एक तय रकम ली जाती है और दूसरा- सोने की कुल कीमत का एक निश्चित प्रतिशत लिया जाता है। उदाहरण के लिए, कोई ज्वेलर प्रति ग्राम 300 रुपये मेकिंग चार्ज ले सकता है। वहीं, दूसरा ज्वेलर सोने की कुल कीमत का 12% मेकिंग चार्ज वसूल सकता है। दोनों तरीकों में ग्राहक के लिए कौन सा विकल्प सस्ता रहेगा, इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं।

5 नवंबर 2026 को 22 कैरेट सोने का भाव 13,435 रुपये प्रति ग्राम मान लेते हैं। अगर ग्राहक 10 ग्राम की ज्वेलरी खरीदता है तो सोने की कीमत 1,34,350 रुपये होगी। अब दोनों तरीकों से मेकिंग चार्ज की गणना करते हैं।

विवरणप्रति ग्राम 300 रुपये मेकिंग चार्जसोने की कीमत का 12% मेकिंग चार्ज
22 कैरेट सोने का भाव (प्रति 1 ग्राम)₹13,435₹13,435
ज्वेलरी का वजन10 ग्राम10 ग्राम
सोने की कुल कीमत₹1,34,350₹1,34,350
मेकिंग चार्ज₹3,000₹16,122
GST से पहले कुल कीमत₹1,37,350₹1,50,472
3% GST₹4,120.50₹4,514.16
GST सहित कुल कीमत₹1,41,470.50₹1,54,986.16

इस उदाहरण में प्रति ग्राम 300 रुपये मेकिंग चार्ज वाला विकल्प ग्राहक के लिए ज्यादा सस्ता है। दोनों विकल्पों के बीच करीब 13,516 रुपये का अंतर है। हालांकि, यह केवल उदाहरण के आधार पर की गई गणना है। वास्तविक कीमत ज्वेलर के भाव, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क के हिसाब से बदल सकती है।

कम मेकिंग चार्ज के लिए इन बातों का रखें ध्यान

  • जटिल डिजाइन के बजाय साधारण डिजाइन वाली ज्वेलरी चुनें।
  • हाथ से तैयार गहनों की तुलना में मशीन से बने गहनों का मेकिंग चार्ज कम हो सकता है।
  • एक से ज्यादा ज्वेलर्स के यहां कीमत और मेकिंग चार्ज की तुलना करें।
  • प्रतिशत के बजाय प्रति ग्राम के हिसाब से मेकिंग चार्ज देने का विकल्प भी देखें।
  • जीरो मेकिंग चार्ज के ऑफर में छिपे हुए शुल्क और शर्तों की जांच करें।
  • खरीदारी से पहले बायबैक और एक्सचेंज की पॉलिसी समझ लें।

मास्टर कैपिटल सर्विसेस लिमिटेड के चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ रवि सिंह के अनुसार, जो लोग मुख्य रूप से बचत या निवेश के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, वे सोने के मानकीकृत सिक्कों और बार पर भी विचार कर सकते हैं। इनमें ज्वेलरी की तरह डिजाइन और कारीगरी का अतिरिक्त खर्च नहीं होता।