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Real Estate News: किराए पर रहें या घर खरीद लें… समझ नहीं आ रहा? इस कैलकुलेशन में छिपा है आपका जवाब

Real Estate News: अगर आपके होम लोन की ईएमआई किराए की तुलना में दोगुनी या उससे ज्यादा है, तो रेंट पर रहना ही काफी बेहतर है। इससे आपका कैश फ्लो खराब नहीं होगा।

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Jan 16, 2026
मेट्रो सिटीज में घरों के दाम काफी ज्यादा बढ़ गये हैं। (PC: AI)

Real Estate News: देश में लाखों-करोड़ों लोग ऐसे हैं, जिन्हें नौकरी के लिए अपने शहर से बाहर जाना पड़ता है। धीरे-धीरे वे फैमिली को भी वहीं ले आते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह रहता है कि खुद का घर खरीदें या किराये का घर ही बेहतर है। इन दोनों के बीच चुनाव करना बड़ा मुश्किल हो जाता है। घर खरीदने जाओ तो कीमतें आसमान पर हैं। सालों-साल आपको होम लोन की ईएमआई भरनी पड़ेगी। किराए से रहें, तो रेंट तो जा ही रहा है और प्रॉपर्टी भी खुद की नहीं। आज इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे कि क्या ईएमआई पर घर खरीदना सही है या रेंट से रहना ज्यादा सही है।

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किराये पर रहना: एक समझदारी भरी शुरुआत

मेट्रो सिटीज में काम करने वाले युवा प्रोफेशनल्स के लिए किराये पर रहना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इससे हर महीने का खर्च कम रहता है और SIP, इमरजेंसी फंड और करियर में फ्लेक्सिबिलिटी बनाए रखने के लिए ज्यादा नकदी बचती है। पहली नौकरी या कम इनकम वालों के लिए यह अक्सर बेहतर शुरुआत साबित होती है।

ईएमआई Vs रेंट (मेट्रो सिटीज)

बेंगलुरु या मुंबई जैसे शहर में 2BHK फ्लैट की कीमत करीब 1.2 करोड़ रुपये पड़ती है। आप 80 फीसदी रकम यानी 96 लाख रुपये का 20 साल के लिए होम लोन 8.5% ब्याज दर पर लेते हैं, तो मंथली ईएमआई करीब 83,000 रुपये की बनेगी। वहीं, आपको यह फ्लैट 38,000 से 45,000 रुपये मंथली किराए पर मिल जाएगा। रेंट पर रहने से आपको हर महीने लगभग 40,000 रुपये की बचत होती है, जिसे आप म्यूचुअल फंड या NPS में निवेश कर सकते हैं।

PC: Pexels

कब खरीदना चाहिए पहला घर?

जब EMI और किराया लगभग बराबर हो या लंबे समय तक एक ही जगह रहने की योजना हो, तब घर खरीदना फायदेमंद होता है। जिन परिवारों की 10 साल या उससे ज्यादा समय तक एक ही शहर में रहने की योजना है, उनके लिए EMI एक तरह की “फोर्स्ड सेविंग” होती है और भविष्य में बढ़ते किराये से भी सुरक्षा देती है।

ईएमआई Vs रेंट (टियर-2 सिटीज)

इंदौर, कोयंबटूर या जयपुर जैसे शहरों में 2BHK फ्लैट की कीमत करीब 45 लाख रुपये है। अगर आप 36 लाख रुपये का होम लोन लेते हैं, तो मंथली ईएमआई करीब 31,000 रुपये की बनेगी। वहीं, आपको यह फ्लैट 18,000 से 22,000 रुपये प्रति माह किराए में मिल जाएगा। यहां EMI और किराये का अंतर ज्यादा नहीं होता, जिससे पहली बार घर खरीदने वालों के लिए मालिकाना हक ज्यादा आकर्षक बन जाता है।

फर्स्ट टाइम प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करने वाले समझें यह गणित

भारत में निवेशकों का एक थंब रूल है कि प्रॉपर्टी से मिलने वाला किराया EMI का कम से कम 50% होना चाहिए। उदाहरण के लिए अगर EMI 40,000 रुपये है, तो रेंट टार्गेट 20,000 या उससे ज्यादा होना चाहिए। इससे कैश फ्लो का दबाव कम होता है और प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने से लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलता है।

फर्स्ट टाइम बायर्स हिडन कॉस्ट का भी रखें ध्यान

घर खरीदना सिर्फ EMI तक सीमित नहीं है। इसके साथ और भी कई खर्चे आते हैं। इनमें रजिस्ट्रेशन और स्टांप ड्यूटी (5 से 7% फीसदी), मेंटेनेंस (3 से 6 रुये प्रति वर्ग फुट), प्रॉपर्टी टैक्स आदि। आप घर खरीद रहे हैं, तो इन खर्चों का जरूर ध्यान रखें।

घर खरीदने के लिए तैयार नहीं तो REITs है एक अच्छा ऑप्शन

पहली बार निवेश करने वाले भारतीयों के लिए REITs रियल एस्टेट में निवेश का आसान तरीका हैं।

  • यहां आप 10,000 से 15,000 रुपये में एंट्री ले सकते हैं।
  • यहां आपको 6 से 8% तक का मुनाफा मिलता है।
  • यहां न लोन की झंझट है, न किरायेदार की टेंशन है।

फिजिकल प्रॉपर्टी खरीदने से पहले यह एक स्मार्ट कदम हो सकता है।

क्या है निष्कर्ष:

-अगर EMI किराये से दोगुनी है, इनकम को लेकर अनिश्चितता है या नौकरी में स्थान बदलने की संभावना है, तो किराए पर रहना बेहतर है।

-अगर EMI आराम से चुकाई जा सकती है, लोन की अवधि लंबी है और उस शहर में आपके करियर की ग्रोथ मजबूत है, तो घर खरीदना बेहतर है।

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Published on:
16 Jan 2026 12:44 pm
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