rupee falls: अमेरिका ईरान युद्ध के बीच लगातार रुपये में गिरावट जारी है। लेकिन रुपये के गिरने का बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से ज्यादा FII की बिकवाली होना है।
शुक्रवार को भारतीय रुपया लगातार गिरता हुआ 28 पैसे टूटकर 94.24 के रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया। यह लगातार तीसरे दिन की गिरावट है, जिसमें मंगलवार को 93.76, बुधवार को 94.05 और अब 94.24 रुपये तक गिरा। इन तीन दिनों में कुल 48 पैसे की गिरावट दर्ज की गई। FII की बेरोकटोक बिकवाली और ईरान संकट मिलकर बाजार और करेंसी दोनों को डुबो रहे हैं।
तीन कारोबारी सत्रों में 48 पैसे की गिरावट सामान्य उतार-चढ़ाव नहीं है। बुधवार के सत्र में रुपया 93.86 से 94.08 के बीच झूलता रहा और अंत में अपने सबसे निचले बंद स्तर पर टिका। ट्रेडर्स के मुताबिक क्रूड की गिरावट, नरम डॉलर और मजबूत घरेलू बाजार जैसे सकारात्मक संकेत भी रुपये को गिरने से नहीं रोक पाए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बिकवाली का दबाव कितना भारी है।
आमतौर पर तीन चीजें रुपये को सहारा देती हैं, क्रूड की गिरावट, कमजोर डॉलर और मजबूत घरेलू शेयर बाजार। शुक्रवार को तीनों मौजूद थे। ब्रेंट क्रूड 108 से गिरकर 105.75 डॉलर प्रति बैरल पर आया था। डॉलर इंडेक्स के नरम होने और घरेलू बाजार में कुछ सुधार दिखने के बाद भी रुपया रिकॉर्ड लो पर था।
इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण है FII की भारी बिकवाली, इसके सामने बाकी सभी सकारात्मक संकेत बेअसर हो गए। विदेशी निवेशक इस महीने अब तक 93,000 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल चुके हैं और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
दरअसल, रुपया कमजोर होता है तो विदेशी निवेशकों का डॉलर में रिटर्न घट जाता है और वे बाजार में बिकवाली बढ़ा देते हैं। इस कारण रुपये पर दबाव बढ़ता है। यही वजह है कि शुक्रवार को क्रूड गिरने और डॉलर नरम होने के बावजूद रुपया नए रिकॉर्ड लो पर था।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के हेड ऑफ ट्रेजरी अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक RBI इस वित्त वर्ष में 94 के स्तर को बचाने की कोशिश करेगा और संभवतः रुपये को 93.30 से 92.80 तक वापस ले जाएगा। उन्होंने रुपये की ट्रेडिंग रेंज 93.25 से 94.25 बताई है। लेकिन डॉलर बेचकर रुपये को सहारा देने से विदेशी मुद्रा भंडार घटता है। और अगर FII की बिकवाली इसी रफ्तार से जारी रही तो RBI के लिए 94 का स्तर बचाना मुश्किल होता जाएगा।