कारोबार

Gen Z ने बदल दी नौकरी की परिभाषा, इनके लिए सैलरी नहीं है उतनी इंपोर्टेंट, फिर क्या देखते हैं?

Gen Z Job Market: जेन-ज़ी सैलरी से ज्यादा वर्क लाइफ बैलेंस को अहमियत दे रहे हैं। उनके लिए यह सबसे पहले है। वे फ्लेक्सिबिलिटी, मैनेजेबल वर्कलोड और टाइम पर अपने कंट्रोल को बेसिक उम्मीद के तौर पर देखते हैं।

3 min read
Jan 15, 2026
जेन ज़ी के लिए जॉब में वर्क लाइफ बैलेंस सबसे अहम हो गया है। (PC: AI)

देश में Gen Z कर्मचारियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। नौकरी को लेकर भी इस जनरेशन की अप्रोच अलग है। इन लोगों के लिए सवाल यह नहीं है कि 'इस नौकरी में सैलरी कितनी मिलेगी?', बल्कि यह है कि 'इस नौकरी की कीमत मुझे क्या चुकानी पड़ेगी?' यहां कीमत का मतलब पैसों से नहीं, बल्कि टाइम, एनर्जी, मेंटल पीस और इस बात से है कि क्या नौकरी से मुझे बाहर की जिंदगी जीने का समय मिलेगा या नहीं।

यह बदलाव अब आंकड़ों में भी साफ नजर आने लगा है। नौकरी डॉट कॉम की जेन ज़ी वर्क कोड रिपोर्ड 2026 के अनुसार, आधे जेन ज़ी कर्मचारियों का कहना है कि नौकरी चुनते वक्त उनके लिए सैलरी से ज्यादा अहम वर्क-लाइफ बैलेंस है। यह रोजगार को परखने के नजरिये में एक बड़ा बदलाव है और यही वजह है कि सैलरी बढ़ोतरी, पद या लंबे समय के वादे जैसे पारंपरिक रिटेंशन टूल्स अब पहले जितने असरदार नहीं रह गए हैं।

ये भी पढ़ें

Gold Silver Price Today: सोने की कीमतों में गिरावट, घरेलू और वैश्विक बाजार दोनों जगह टूटे भाव, जानिए लेटेस्ट दाम

क्या आपने पहले कभी ऐसा सुना था कि किसी कर्मचारी ने मेंटल हेल्थ के लिए छुट्टी ली हो? लेकिन अब समय बदल गया है। अगर आप मैनेजर हैं, तो आपने भी किसी वर्किंग डे की सुबह आया 'मैं आज ऑफिस नहीं आउंगा, क्योंकि मुझे मेंटल हेल्थ डे चाहिए' मैसेज देखा होगा।

बदला नौकरी को परखने का तरीका

पहले की पीढ़ियों के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस एक ऐसी चीज थी, जिसे मेहनत करके हासिल किया जाता था। लेकिन जेन ज़ी के लिए यह स्टार्टिंग पॉइंट है। फ्लेक्सिबिलिटी, मैनेजेबल वर्कलोड्स और समय पर अपना नियंत्रण अब किसी अतिरिक्त सुविधा की तरह नहीं, बल्कि बेसिक उम्मीद के तौर पर देखे जाते हैं। ऐसी नौकरी जो निजी जिंदगी के लिए जगह नहीं छोड़ती, भले ही वह अच्छी सैलरी दे, जेन ज़ी के लिए अब एक खराब डील मानी जाती है।

इसका मतलब यह नहीं कि जेन ज़ी की महत्वाकांक्षा कम हो गई है। बल्कि वह चाहता है कि काम और जिंदगी साथ-साथ चलें, न कि काम पूरी जिंदगी पर हावी हो जाए। जैसे ही यह संतुलन बिगड़ता है, असंतोष तेजी से बढ़ने लगता है।

ग्रोथ नहीं तो रुकना नहीं

वर्क-लाइफ बैलेंस जेन ज़ी को कंपनी तक लाता है, लेकिन वहां टिके रहना ग्रोथ पर निर्भर करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हर सात में से एक जेन ज़ी कर्मचारी को स्पष्ट करियर ग्रोथ नहीं दिखती, तो एक साल के भीतर नौकरी छोड़ देता है।

जेन ज़ी के लिए लर्निंग पद से ज्यादा मायने रखती है। आंकड़े बताते हैं कि 57% जेन ज़ी कर्मचारी प्रमोशन के बजाय स्किल-बिल्डिंग को प्राथमिकता देते हैं, जबकि सिर्फ 9% का मानना है कि तारीफ या रिकग्निशन पहचान (recognition) उन्हें कंपनी में रोके रखती है। कई कर्मचारियों के लिए पहला साल एक तरह का ट्रायल पीरियड होता है। अगर सीखने की रफ्तार थम जाती है या जिम्मेदारियां नहीं बढ़तीं, तो नौकरी छोड़ने की योजना बनना शुरू हो जाती है।

पारदर्शिता और निष्पक्षता से समझौता नहीं

रिपोर्ट के अनुसार 65% जेन ज़ी कर्मचारियों के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता किसी कंपनी की सबसे अहम वैल्यू है। यह आंकड़ा डाइवर्सिटी और इनक्लूजन (11%), पर्यावरण नीतियों (16%) और सोशल इम्पैक्ट (8%) से कहीं ज्यादा है।

खास बात यह है कि अनुभव के साथ यह मांग और मजबूत होती जाती है। 5-8 साल का अनुभव रखने वाले 71% जेन ज़ी कर्मचारियों ने पारदर्शिता को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। जबकि 0 से 2 साल के अनुभव वाले कर्मचारियों में यह आंकड़ा 63% रहा। आंकड़े साफ बताते हैं कि जितना ज्यादा जेन ज़ी काम करता है, उतनी ही उसकी अपारदर्शिता के प्रति सहनशीलता घटती जाती है।

नियोक्ताओं के लिए क्या संकेत हैं?

जब ग्रोथ और बैलेंस दोनों गायब होते हैं, तो Gen Z के पास रुकने की कोई बड़ी वजह नहीं बचती। नौकरी बदलना उनके लिए जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं, बल्कि एक रणनीतिक रीसेट होता है। नियोक्ताओं के लिए संदेश साफ है-

  • वर्क-लाइफ बैलेंस को कागजों तक सीमित न रखें, बल्कि उसे वास्तविक नीति बनाएं। फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स हों, वीकेंड पर कोई काम न हो।
  • कंपनी अपस्किलिंग के मौके और पर्सनलाइज्ड स्किल रोडमैप दें।
  • सिर्फ पैसे से नहीं, बल्कि सीखने के अवसरों के जरिए कर्मचारियों को पहचान दें।
  • मेंटॉरशिप प्रोग्राम बनाएं और नेटवर्किंग व विजिबिलिटी को बढ़ावा दें।

ये भी पढ़ें

40% से ज्यादा कमाई EMI में जा रही, खतरनाक स्तर तक पहुंचा परिवारों पर कर्ज का बोझ, चुकाने के लिए कर रहे ये जतन

Published on:
15 Jan 2026 11:16 am
Also Read
View All

अगली खबर