25 अक्टूबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

40% से ज्यादा कमाई EMI में जा रही, खतरनाक स्तर तक पहुंचा परिवारों पर कर्ज का बोझ, चुकाने के लिए कर रहे ये जतन

लोअर और मिडिल क्लास लोगों पर लोन का बोझ बढ़ता जा रहा है। लोग एक क्रेडिट कार्ड का कर्ज चुकाने के लिए दूसरे से कैश निकाल रहे हैं और यह रोटेशन खत्म ही नहीं हो रहा।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Pawan Jayaswal

•

Updated: 14 Jan 2026, 4:04 PM IST

can recovery agent threaten you

परिवारों पर लोन का बोझ बढ़ता जा रहा है। (PC: AI)

कम और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर लगातार कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। एक सर्वे के अनुसार 35,000 रुपए से 65,000 रुपए मासिक आय वाले कर्जदारों की ईएमआई 28,000 से 52,000 रुपए के बीच है। 85% कर्जदार अपनी मासिक आय का 40% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ ईएमआइ चुकाने में खर्च कर रहे हैं। जून से दिसंबर 2025 के बीच हुए सर्वे में यह सामने आया है।

निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर कर्ज का बोझ खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। 40% कर्जदार क्रेडिट कार्ड का घुमाव (रोटेशन) करते हैं। यानी एक कार्ड का बिल दूसरे कार्ड से भरते हैं। 22% लोगों को दोस्तों, परिवार या साहूकारों से मदद लेनी पड़ती है। ये उपाय अस्थायी राहत तो देते हैं, लेकिन 2 से 6 महीने बाद स्थिति और बिगड़ जाती है। नए कर्ज पर ब्याज का बोझ बढ़ जाता है।

कर्ज चुकाने के लिए लोग क्या कर रहे?

  • 40 फीसदी कर्जदार दूसरे क्रेडिट कार्ड से कैश निकाल लेते हैं।
  • 22 फीसदी कर्जदार परिवार-दोस्तों से कर्ज लेते हैं।
  • 65 फीसदी कर्जदार बेहद जरूरी खर्च में भी कटौती करते हैं।
  • 16 फीसदी कर्जदारों ने कंपनी से एडवांस सैलरी लोन लिया।
  • 15 फीसदी कर्जदारों की कर्ज नहीं चुकाने से गिरवी संपत्ति डूबी।
  • 15 फीसदी कर्जदारों ने ज्वैलरी-प्रॉपर्टी या शेयर बेचे।

72 फीसदी कर्जदारों ने सहा उत्पीड़न

जब कर्जदार कर्ज चुकाने में असमर्थ हो जाते हैं, तो रिकवरी एजेंटों का उत्पीड़न शुरू हो जाता है। 72 फीसदी कर्जदारों ने किसी न किसी तरह का उत्पीड़न झेला है। सर्वे में पता चला कि औसतन हर कर्जदार को महीने में 50 से 100 कॉल आती है।

  • 67 फीसदी कर्जदारों को बार-बार धमकी भरे कॉल आए।
  • 39 फीसदी कर्जदारों को एक ही उधारदाता से रोज कई कॉल आए।
  • 70 फीसदी कर्जदारों को मैसेज-व्हाट्सएप पर धमकी भरे कॉल आए।
  • 18 फीसदी कर्जदारों के परिवार को रिकवरी एजेंटों से धमकी मिली।
  • 12 फीसदी कर्जदारों के ऑफिस पहुंचकर एजेंटों ने प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया।
  • 22 फीसदी कर्जदारों के माता-पिता, रिश्तेदारों को जलील किया गया।