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हेल्पर से कंपनी के मालिक तक, दुनिया को प्रभावित कर रही केरल के इस शख्स की Success Story

From Kerala to Dubai success story: याह्या इब्राहिम ने कार सीट कवर की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। केरल से दुबई तक की उनकी सक्सेस स्टोरी लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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Yahya Ebrahim success story

(PC: AI/wellfitworld)

Yahya Ebrahim success story: केरल की गलियों में नंगे पैर दौड़ने वाला बच्चा जब अपनी दादी के घर से लौटता तो उसकी चाची एक बड़ा कटहल थमा देतीं। उस कटहल को सिर पर रखकर चलते हुए बच्चा खुद को विशाल साम्राज्य का शासक समझता। इस 'समझ' ने याह्या इब्राहिम (Yahya Ebrahim) को कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित किया। वह शहर के अमीरों के बीच अपनी जगह बनाना चाहते थे, लेकिन इससे भी बड़ी चाहत थी अपनी मां को किराये के घर से निकालकर खुद के घर में ले जाना। याह्या इब्राहिम को अहसास था कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी होगी। वह भारत से दुबई पहुंचे और आज उनकी सफलता दुनिया को प्रभावित कर रही है।

विरासत में मिली केवल मशीनों की आवाज

याह्या इब्राहिम केरल के कासरगोड जिले में स्थित थलंगारा के निवासी हैं। इसलिए वह अपने नाम के आगे थलंगारा (Yahya Thalangara) लगाना अधिक पसंद करते हैं। यह न केवल उनकी पहचान है, बल्कि जड़ों से जुड़ाव का प्रतीक भी है। याह्या बचपन से ही दुबई जाने के सपने देखा करते थे, लेकिन यह भी जानते थे कि बिना तैयारी के कोई भी काम सफल नहीं होता। वैसे तो याह्या के परिवार का कारोबार से नाता था, मगर उन्हें विरासत में मशीनों की आवाज से सिवा कुछ नहीं मिला। 1950 के दशक में उनके दादा इब्राहिम मुसलियार थलंगारा में एक कपड़ा यूनिट चलाते थे। बाद में उन्होंने अपना कारोबार याह्या के पिता और चाचा को सौंप दिया गया, लेकिन वह कारोबार ज्यादा लंबा नहीं चला सके।

पहले भारत, फिर कतर में की नौकरी

याह्या इब्राहिम सिलाई मशीनों की आवाज के बीच बड़े हुए। उन्होंने वर्कशॉप में लगी मशीनों को पकड़कर ही चलना सीखा था। इसलिए सिलाई के साथ उनका एक गहरा लगाव हो गया। पिता का कारोबार बंद हो चुका था, ऐसे में याह्या इब्राहिम ने 1972 में बेंगलुरु का रुख किया। यहां उनके एक रिश्तेदार की बैग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट थी। याह्या इस सोच के साथ बेंगलुरु आए कि घर के खर्चे के लिए पैसा आएगा और वह सिलाई के अपने हुनर को निखार पाएंगे। कुछ सालों तक इस कारखाने में हेल्पर की नौकरी करने के बाद वह कतर चले गए। इस खाड़ी देश में उन्होंने एक कार एक्सेसरीज शॉप में करीब एक साल काम किया।

पहले प्रयास में नहीं मिली सफलता

कार एक्सेसरीज में अच्छी जानकारी हासिल करने के बाद 1985 में याह्या इब्राहिम ने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर अपना कारोबार शुरू किया। हालांकि, यह प्रयोग सफल नहीं रहा। याह्या हार मानने वालों में से नहीं थे। उन्होंने दुबई में अपने दम पर एक कार कार एक्सेसरीज शॉप खोली। उनकी लाइफ का टर्निंग पॉइंट उस समय आया, जब एक अरब ग्राहक उनकी दुकान में पहुंचा। 1987 में एक अरब ग्राहक याह्या इब्राहिम की दुबई स्थित दुकान में आया और पूछा कि क्या आप मेरी टोयोटा कार के लिए सीट कवर सिल सकते हैं? अब तक याह्या केवल तैयार एक्सेसरीज ही बेचा करते थे। यह पहला मौका था जब किसी ने इस तरह की मांग की थी। उन्होंने हामी भरी और एक सप्ताह का समय मांगा। उन्होंने तुरंत एक पुरानी सिलाई मशीन का इंतजाम किया और सीट कवर सिलने में जुट गए।

इस तरह पलट गई जिंदगी

याह्या इब्राहिम ने हर काम खुद किया और वादे के मुताबिक 7 दिनों में सीट कवर तैयार कर दिए। अरब ग्राहक उनके काम से बेहद खुश हुआ। यहां से याह्या की लाइफ पूरी तरह बदल गई। उन्हें ऑडर मिलने लगे। यहां तक कि उनका प्रतिद्वंदी ईरानी दुकानदार भी उन्हीं से सीट कवर लेने को विवश हो गया। 1988 में वह रिटेल से थोक कारोबार में आ गए। उन्होंने दुबई में सीट कवर की थोक बिक्री शुरू कर दी। शुरुआत में वह दिन में केवल दो या तीन कवर ही तैयार करते थे। 1990 में उन्होंने कई कर्मचारियों को काम कर रखा और अपने कारोबार का विस्तार कर दिया। याह्या ने दुबई के बाहर भी कदम रखने शुरू किए। उन्होंने अजमान में एक नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना की, जहां शुरुआत में सिर्फ टोयोटा कारों के लिए सीट कवर बनाए जाते थे, लेकिन जल्द ही वह सभी कारों के सीट कवर तैयार करने लगे।

पैसा था पर घर नहीं खरीदा, बिजनेस बढ़ाया

याह्या इब्राहिम के पास अब इतना पैसा आ गया था कि वह किराये के मकान को छोड़कर अपना घर खरीद सकें, लेकिन उन्होंने मां से कुछ और समय मांगा। क्योंकि वह घर खरीदने के बजाए उस पैसे को कारोबार में लगाना चाहते थे। दरअसल, याह्या मार्केट की डिमांड को समझ गए थे। कस्टमाइज़ सीट कवर का उनका आइडिया ग्राहकों को काफी पसंद आ रहा था। वह उत्पादन बढ़ाना चाहते थे और साउथ कोरिया में मिलने वाली अत्याधुनिक मशीनें उनकी इस चाहत को पूरा कर सकती थीं। लेकिन समस्या थी मशीनों की कॉस्ट। इस बीच, याह्या की सफलता केरल में चर्चा का विषय बन गई। मीडिया में उनके बारे में लेख प्रकाशित होने लगे। ऐसा ही एक लेख पढ़कर नेशनल बैंक ऑफ फुजैराह के मैनेजर ने उनसे संपर्क किया। याह्या को लोन मिला और उन्होंने मशीनें खरीदकर अपने कारोबार को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

आज सीट कवर में Wellfit बड़ा नाम

वेबसाइट wellfitworld पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, याह्या इब्राहिम की कंपनी Wellfit कार सीट कवर की दुनिया में एक बड़ा नाम है। वेलफिट दुनिया भर में फ्रेंचाइजी वाली एक ग्लोबल कंपनी बन गई है। याह्या इब्राहिम लगातार अपने कारोबार का विस्तार कर रहे हैं। अजमान में दूसरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के साथ ही उन्होंने ऑटोफिट ब्रांडनेम से नई यूनिट शुरू की है। उनकी कंपनी प्रीमियम और बजट सहित कई तरह के सीट कवर उपलब्ध कराती है। उनका अगला कदम कार डिटेलिंग शॉप्स लॉन्च करना है, जहां कोटिंग और वॉशिंग से लेकर पॉलिशिंग तक, सभी तरह की सेवाएं एक ही आउटलेट में प्रदान की जाएंगी। कंपनी का पहला आउटलेट जल्द ही अजमान में खुलने वाला है।

मां के लिए थलंगारा में बड़ा घर

याह्या ने थलंगारा में अपनी मां के लिए एक बड़ा घर बनवाया है। याह्या इब्राहिम की कहानी बताती है कि पूरी शिद्दत के साथ यदि कोई काम किया जाए, तो सफलता मिलकर ही रहती है। उन्होंने तमाम परेशानियों का सामना किया, लेकिन आगे बढ़ना नहीं छोड़ा। पहला प्रयास असफल होने पर उन्होंने अकेले दूसरा प्रयास किया और सफलता हासिल की। याह्या की सक्सेस स्टोरी आज सैकड़ों लोगों को प्रभावित कर रही है।