
सोनू शर्मा पढ़ाई में अच्छे नहीं थे। (PC: AI)
Sonu Sharma motivational speaker journey: मार्कशीट पर लिखे नंबर किसी का भविष्य तय नहीं कर सकते। इसमें कोई दोराय नहीं है कि अच्छे नंबर आगे के सफर को आसान कर देते हैं, लेकिन इनका 'अच्छा' न होना किसी के भविष्य को अंधारमय कर देगा यह भी जरूरी नहीं। कई ऐसे लोग हैं, जो पढ़ाई में अच्छे नहीं रहे। किताबों के साथ उन्हें हर रोज संघर्ष करना पड़ा, मगर आज वह सफलता के एक ऊंचे पायदान पर बैठे हैं। एंटरप्रेन्योर और लाइफ कोच सोनू शर्मा भी उन्हें में शामिल हैं। सोनू शर्मा का पढ़ाई के साथ शुरुआती रिश्ता अच्छा नहीं रहा, उन्हें इसके लिए ताने भी सुनने पड़े पर आज उनकी सफलता सभी को प्रभावित करती है।
सोनू शर्मा डायनामिक इंडिया इन्फोनेट प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर एवं सीईओ हैं। यह कंपनी बिज़नेस सर्विसेज़, आईटी कंसल्टिंग और मोटिवेशनल ट्रेनिंग में शामिल है। डायनामिक इंडिया ग्रुप के बैनर तले काम करने वाली इस कंपनी को सोनू शर्मा ने 2009 में स्थापित किया था। सोने एक मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं, वह लोगों को उनकी असली क्षमता को पहचानने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करते हैं। डायरेक्ट सेल्स इंडस्ट्री में उनके 22 साल के रिसर्च ने कई संगठनों को ग्रोथ और सफलता के रास्ते पर पहुंचाया है। बीते कुछ सालों में भारत में 10 लाख से अधिक लोग उनके लाइव सेमिनार का हिस्सा बने हैं। यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर उन्हें सुनने वालों की लंबी-चौड़ी फौज है। हालांकि, शुरुआत उनके लिए भी अच्छी नहीं रही थी।
सोनू शर्मा पढ़ाई में अच्छे नहीं रहे। शुरुआती दिनों में उन्हें काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा। मूलरूप से फरीदाबाद से आने वाले सोनू ने 1998 में ग्रेजुएशन किया, लेकिन डिग्री हासिल करने से पहले उन्हें तीन बड़े झटके लगे। वह 9वीं क्लास में फेल हुए, इसके बाद 11वीं भी उनका परिणाम वही रहा -फेल। 12वीं करने के बाद जब वह ग्रेजुएशन में आए, तो पहले ही साल असफलता हाथ लगी। फर्स्ट ईयर का उनका रिजल्ट भी 'फेल' रहा। सोनू शर्मा बताते हैं कि उन्होंने मुश्किल से ग्रेजुएशन पूरा किया। 1998 में जब उन्हें डिग्री मिली, तो उनके लिए यह सुकून और राहत दोनों थी।
ग्रेजुएशन की डिग्री लेने के बाद जब सोनू शर्मा घर पहुंचे तो उन्हें एक और झटका लगा। उन्होंने अपने पिता को डिग्री दिखाते हुए तोहफे की मांग की। इस पर उनके पिता लोन के पेपर ले आए। उन्होंने कहा कि हमारे ऊपर तीन लाख का लोन है और तुम्हें अब इसे भरना है। 1998 के दौर में तीन लाख रुपए काफी बड़ी रकम होती थी। सोनू शर्मा के मन में ख्याल आया कि इससे तो ग्रेजुएशन न होती तो अच्छा था। हालांकि, उन्होंने इसे एक चैलेंज के तौर पर लिया। तीन लाख रुपए के कर्जे के साथ उन्होंने अपना करियर शुरू किया। शुरुआत में तमाम मुश्किलें आईं, लेकिन वह हिम्मत के साथ आगे बढ़ते रहे। मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर उन्होंने अपनी पहचान बनाई और फिर खुद की कंपनी भी खड़ी कर डाली। आज जब सोनू शर्मा बोलते हैं, तो लोग उन्हें पूरे ध्यान और गंभीरता से सुनते हैं। यह सबकुछ उन्होंने रातोंरात हासिल नहीं किया, लगातार मेहनत करते रहे और मुश्किलों का डटकर सामना करते रहे, तब कहीं जाकर सफलता की ऊंचाई को छूआ।
सोनू शर्मा खुद को खुशनसीब मानते हैं कि उन्होंने के गरीब परिवार में जन्म लिया। वह कहते हैं - अमीर होने का सुख भगवान गरीब को देता है। गरीब से अमीर बनने की खुशी को केवल वही व्यक्ति महसूस कर सकता है, जिसका जीवन अभावों में गुजरा हो। जो पहले से ही अमीर है, उसके पास इस खुशी को महसूस करने का अवसर नहीं होता। सोनू आज बतौर कॉर्पोरेट ट्रेनर टाटा, बजाज जैसी देश की 150 प्रतिष्ठित कंपनियों से जुड़े हुए हैं। उन्हें इसके लिए कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। हावर्ड ने कुछ साल पहले उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि दी थी।
पढ़ाई में अच्छा न होने के लिए सोनू शर्मा को हर रोज ताने सुनने को मिलते थे। स्कूल में लोग बोलते थे कि यह बर्बाद हो गया, जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएगा। सोने के पिता भी इस बात को लेकर उनसे नाराज रहा करते थे। वह कहते थे कि बेटा पढ़ लो वरना जिंदगी बर्बाद हो जाएगी, तुम कुछ करते नहीं हो। इस पर सोनू अक्सर कहा करते थे कि जो कुछ नहीं करता, वही तो कमाल करता है। आज उनकी यह बात एकदम सच साबित हुई है। सोनू के मुताबिक, कई लोगों को आश्चर्य होता है कि तीन बार फेल होने वाला व्यक्ति इतना सफल कैसे हो गया। सोनू मानते हैं कि स्कूल में पढ़ाई जाने वाली 90% बातें जिंदगी में काम नहीं आतीं।
Updated on:
03 Jan 2026 10:54 am
Published on:
03 Jan 2026 10:50 am
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