NSE ने पहली बार दिसंबर 2016 में अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। NSE ने अगस्त 2024 में IPO के लिए SEBI से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए दोबारा आवेदन किया था।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के IPO का इंतजार खत्म होने वाला है। SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि IPO के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने की प्रक्रिया बहुत एडवांस स्टेज में है। इस महीने के अंदर NOC को जारी किया जा सकता है। NSE के CEO आशीष चौहान की ओर से दिए गए एक पुराने बयान के मुताबिक NOC मिलने के बाद लिस्टिंग में 8-9 महीने लग सकते हैं, यानी IPO 2026 में ही आने की उम्मीद है।
यह NSE के IPO के लिए बड़ा अपडेट है, जो करीब 10 साल से को-लोकेशन विवाद और तमाम रेगुलेटरी मुद्दों की वजह से अटका हुआ था। NOC मिलने के बाद NSE ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दोबारा फाइल करेगा। NSE ने पहली बार दिसंबर 2016 में अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। NSE ने अगस्त 2024 में IPO के लिए SEBI से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए दोबारा आवेदन किया था।
अक्टूबर 2024 में, NSE ने ट्रेडिंग एक्सेस पॉइंट आर्किटेक्चर और नेटवर्क कनेक्टिविटी मामले को 643 करोड़ रुपये का जुर्माना देकर सुलझा लिया। सेबी चीफ ने एक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि एक्सचेंज ने उसके बाद कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं, जिनमें सीनियर मैनेजमेंट में बदलाव, बोर्ड का पुनर्गठन, कंप्लायंस फ्रेमवर्क को मजबूत करना और पिछले रेगुलेटरी मुद्दों का समाधान शामिल है।
मीडिया से बात करते हुए सेबी चीफ ने इन्वेस्टर अवेयरनेस एजुकेशन को लेकर एक जरूरी जानकारी दी। तुहिन कांत पांडे ने कहा “पिछली बार जुलाई में हमने जो सर्वे किए थे, उनमें से एक बहुत महत्वपूर्ण बात यह थी कि निवेशकों तक जागरुकता पहुंचाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम इसे बहुभाषी तरीके से करें।”
उन्होंने कहा कि आगे चलकर निवेशक जागरुकता अभियान मल्टीमीडिया, बहुभाषी और बहु-एजेंसी फॉर्मेट में होगा। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को आकर्षित करने वाले फॉर्मेट पर जाएंगे, शायद हम शॉर्ट्स का भी इस्तेमाल करेंगे, लेकिन संदेश पूरा होना चाहिए। हम इसे दिलचस्प भी बनाएंगे, क्योंकि युवा पीढ़ी सिक्योरिटीज मार्केट में रुचि दिखा रही है, इसलिए जो चीजें उन्हें पसंद आएंगी, उनमें हमारी भी रुचि होगी।
सेबी चेयरमैन ने यह भी बताया कि भारत के कैपिटल मार्केट में तेजी आई है, जिसमें इक्विटी, डेरिवेटिव्स, म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट और कॉर्पोरेट बॉन्ड शामिल हैं। यूनिक निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 2020 में 4.3 करोड़ से बढ़कर आज 13.7 करोड़ हो गई है।