
Retirement Planning India: भारत में 60 साल की उम्र पार करते ही कई लोगों के लिए जिंदगी का नया दौर शुरू होता है। इस उम्र में कमाई सीमित हो सकती है, लेकिन बैंक एफडी पर ज्यादा ब्याज, टैक्स में अतिरिक्त छूट, SCSS जैसी बचत योजनाओं और कुछ सेवाओं में रियायत जैसे फायदे मिल सकते हैं। हालांकि, सवाल यह भी है कि क्या ये सुविधाएं रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा के लिए पर्याप्त हैं? दिलचस्प बात यह है कि फिनलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और जापान जैसे देशों में बुजुर्गों के लिए पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और देखभाल की व्यवस्थाएं भारत से कहीं ज्यादा मजबूत है। ऐसे में आइए जानते हैं कि भारत में 60 की उम्र के बाद कौन-कौन से फायदे मिलते हैं और विदेशों में रिटायरमेंट के बाद बुजुर्गों के लिए कैसी व्यवस्था है।
60 साल की उम्र पार करते ही सबसे बड़ा फायदा सरकार की सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) में मिलता है, जिसमें फिलहाल 8.2 फीसदी सालाना ब्याज दिया जा रहा है। अगर कोई बुजुर्ग इसमें एकमुश्त 30 लाख रुपये जमा करता है, तो उसे हर तीन महीने में करीब 61,500 रुपये ब्याज मिल सकता है।
सिर्फ सरकारी स्कीम ही नहीं, बैंक और पोस्ट ऑफिस भी सीनियर सिटीजन को फिक्स्ड डिपॉजिट पर सामान्य ग्राहकों की तुलना में 0.25 से 0.75 प्रतिशत ज्यादा ब्याज देते हैं। बजाज जनरल इंश्योरेंस से रिटायर हुए भास्कर नेरुरकर का कहना है कि बैंक से मिलने वाला यह छोटा-सा अतिरिक्त ब्याज बैंक में FD पर बुजुर्गों के लिए बड़ी राहत बन जाता है।
पुराने टैक्स सिस्टम में सीनियर सिटीजन को हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 50,000 रुपये तक की छूट मिलती है, जबकि सामान्य लोगों के लिए यह सीमा सिर्फ 25,000 रुपये है। इसके अलावा डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज पर भी 50,000 रुपये तक की अलग छूट है। हालांकि, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के मुताबिक ज्यादातर बुजुर्गों के लिए नया टैक्स सिस्टम फायदेमंद है, क्योंकि इसमें 12 लाख रुपये तक की आय पूरी तरह टैक्स-फ्री हो जाती है।
टेलीकॉम सेक्टर में BSNL 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए रजिस्ट्रेशन चार्ज माफ कर देता है, वहीं MTNL लैंडलाइन पर 25 फीसदी तक छूट देता है। सफर की बात करें तो महाराष्ट्र की MSRTC बसों में 60 साल से ऊपर के लोगों को किराए में 50 फीसदी और 75 साल से ऊपर वालों को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है। कुछ एयरलाइंस भी घरेलू उड़ानों पर 25 फीसदी तक की छूट देती हैं।
भारत में बुजुर्गों की सुरक्षा का दायरा फिनलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और जापान जैसे देशों जितना बड़ा नहीं है। इन देशों में सिर्फ पेंशन ही नहीं, बल्कि सरकारी फंड से चलने वाली हेल्थकेयर और बुजुर्गों की देखभाल की सुविधाएं भी अपेक्षाकृत मजबूत हैं। इसकी तुलना में भारत में रिटायरमेंट के लिए अपनी बचत और निवेश पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है।
जापान में 65 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए लॉन्ग-टर्म केयर इंश्योरेंस की व्यवस्था है। इसके तहत घर पर देखभाल, डे-केयर सेंटर और संस्थागत नर्सिंग जैसी सेवाओं के लिए सहायता मिलती है। हालांकि, इन देशों में मिलने वाली मजबूत सामाजिक सुरक्षा के लिए लोगों को अपेक्षाकृत ज्यादा टैक्स और सोशल सिक्योरिटी योगदान भी देना पड़ता है।