
Why Share Market Fall Today: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को सेंसेक्स 1124 अंक गिरकर बंद हुआ था। मंगलवार को भी मार्केट में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 138 अंक की गिरावट के साथ 72,633 पर खुला। शुरुआती कारोबार में सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर यह 0.83 फीसदी या 607 अंक की गिरावट के साथ 72,181 पर ट्रेड करता दिखा। इस समय सेंसेक्स पैक के 30 शेयरों में से 4 शेयर हरे निशान पर और 26 शेयर लाल निशान पर ट्रेड करते दिखे। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी इस समय 0.76 फीसदी या 176 अंक की गिरावट के साथ 22,604 पर ट्रेड करता दिखा। बाजार में आई इस गिरावट से बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 4 लाख करोड़ रुपये घट गया है।
सेक्टोरल सूचकांकों की बात करें, तो सबसे अधिक गिरावट निफ्टी मीडिया में 1.40 फीसदी, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 1.23 फीसदी और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेस 25 /50 में 1.13 फीसदी दिखाई दी। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो में 0.68 फीसदी, निफ्टी एफएमसीजी में 1.05 फीसदी, निफ्टी आईटी में 0.95 फीसदी, निफ्टी मेटल में 0.64 फीसदी, निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.87 फीसदी, निफ्टी रियल्टी में 0.62 फीसदी, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1.08 फीसदी, निफ्टी केमिकल्स में 0.99 फीसदी और निफ्टी सीमेंट में 0.97 फीसदी की गिरावट देखने को मिली।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए खास तौर पर चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच मंगलवार सुबह ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड करता दिखाई दिया। तेल महंगा होने का सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी रहता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा ईंधन और ट्रांसपोर्ट पर ज्यादा खर्च करने वाली कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है। बाजार कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले हर बदलाव पर नजर रख रहा है, क्योंकि महंगा तेल कई स्तरों पर अर्थव्यवस्था और कंपनियों को प्रभावित कर सकता है।
सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, बाजार की एक बड़ी चिंता अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड है। अमेरिकी 10 साल की ट्रेजरी यील्ड हाल के वर्षों के ऊंचे स्तरों तक पहुंच गई है। जब अमेरिकी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो डॉलर में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए ये विकल्प ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। ऐसे में उभरते बाजारों के शेयरों में निवेश का आकर्षण प्रभावित हो सकता है।
महंगे कच्चे तेल की वजह से अगर महंगाई लंबे समय तक बनी रहती है, तो अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद भी कमजोर पड़ सकती है। बाजार में इस बात की चर्चा बढ़ी है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।
भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड, महंगा तेल और भू-राजनीतिक तनाव के बीच विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं। इसका असर खास तौर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों पर पड़ता है। अगर इंडेक्स में ज्यादा वजन रखने वाले बड़े शेयर एक साथ गिरते हैं, तो इसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर दिखाई देता है।
मार्केट एक्सपर्ट अभिषेक भिलवारिया के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार की धारणा को कमजोर रखने वाली प्रमुख वजहों में से एक है। घरेलू निवेश से कुछ सहारा जरूर मिल रहा है, लेकिन विदेशी पूंजी की निकासी दबाव बनाए हुए है।
शुरुआती कारोबार में बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयरों पर खास दबाव देखने को मिला। इन कंपनियों का सेंसेक्स और निफ्टी में अच्छा खासा वैटेज है। यही वजह है कि जब बैंक और बड़ी वित्तीय कंपनियों के शेयरों में एक साथ गिरावट आती है, तो इसका असर पूरे बाजार पर ज्यादा दिखाई देता है। छोटी कंपनियों के कुछ शेयरों में गिरावट की तुलना में इंडेक्स में भारी वजन रखने वाले शेयरों की गिरावट बाजार के प्रमुख सूचकांकों को ज्यादा नीचे खींच सकती है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)