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Gold Loan: सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने जा रहे हैं? पहले जान लें ये 5 जरूरी बातें

Gold Loan Interest Rate: भारत में गोल्ड लोन की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। जुलाई 2026 में बैंकों के गोल्ड लोन 88.1 फीसदी और NBFCs के 68.5 फीसदी बढ़े हैं। महंगे सोने, आसान प्रक्रिया और ज्यादा LTV लिमिट ने इस कर्ज को बढ़ावा दिया है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

•

Sep 28, 2026

Gold Loan Interest Rate

गोल्ड लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है। (PC: AI)

Gold Loan Rules: मुश्किल वक्त में घर में रखे सोने के गहने भारतीय परिवारों के लिए लंबे समय से काम आते रहे हैं। कोई बड़ा मेडिकल खर्च हो, नौकरी जाने का संकट हो, बच्चों की शादी हो या कारोबार में अचानक पैसे की जरूरत पड़ जाए, सोना कई परिवारों के लिए तुरंत पैसे जुटाने का जरिया रहा है। इसी वजह से गोल्ड लोन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड लोन की रफ्तार दूसरे रिटेल लोन्स से काफी तेज हो गई है।

जुलाई 2026 में बैंकों द्वारा गोल्ड ज्वेलरी के बदले दिए गए लोन में सालाना आधार पर 88.1% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, NBFCs के गोल्ड लोन में 68.5% का उछाल आया। इसके मुकाबले जुलाई में NBFCs के कुल रिटेल लोन 21.4% और बैंकों के पर्सनल लोन 16.2% बढ़े।

गोल्ड लोन का कारोबार कितनी तेजी से बढ़ा?

मुथूट फाइनेंस के एमडी जॉर्ज अलेक्जेंडर मुथूट के मुताबिक, कंपनी का स्टैंडअलोन गोल्ड लोन एयूएम 2025-26 में 50% बढ़कर 1.54 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले कुछ वर्षों में ग्रोथ लगातार तेज हुई है। 2022-23 में यह करीब 8%, 2023-24 में 18%, 2024-25 में 41% और 2025-26 में 50% रही। वित्तीय सलाहकार और गोल्ड लोन एक्सपर्ट प्रवीन सालियन के मुताबिक, कई कंपनियों के गोल्ड लोन कारोबार में औसतन 50% की बढ़ोतरी हुई है। कुछ कंपनियों ने एक साल में 100 से 150% तक की ग्रोथ भी दर्ज की है।

सोना महंगा हुआ तो उसी गहने पर मिल रहा ज्यादा लोन

गोल्ड लोन की बढ़ती मांग की सबसे बड़ी वजह सोने की कीमत में तेजी है। सितंबर 2024 में सोने की कीमत 74,152 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो सितंबर 2026 में बढ़कर 1,51,687 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। यानी करीब दो साल में कीमत लगभग दोगुनी हो गई। सोने की कीमत बढ़ने का सीधा असर लोन की रकम पर पड़ता है। गहने की समान मात्रा पर अब पहले के मुकाबले ज्यादा कर्ज लिया जा सकता है। FREED के फाउंडर और सीईओ रितेश श्रीवास्तव के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में घरेलू सोने की कीमत करीब 59% सालाना बढ़ी और औसत गोल्ड लोन 2023-24 के करीब 1 लाख रुपये से बढ़कर 2025-26 में लगभग 1.7 लाख रुपये हो गया।

जल्दी मिल जाता है गोल्ड लोन

गोल्ड लोन में ग्रोथ की एक बड़ी वजह इसकी आसान प्रक्रिया है। सोना गिरवी होने के कारण लोन देने वाले संस्थान को ग्राहक की जांच पर्सनल लोन की तुलना में कम करनी पड़ती है। गोल्ड लोन की ब्याज दर आम तौर पर करीब 8.5% से लेकर 20% के मध्य तक हो सकती है, जबकि पर्सनल लोन की दर 10% से 30% तक हो सकती है। हालांकि, वास्तविक ब्याज दर ग्राहक की प्रोफाइल और लोन की शर्तों पर निर्भर करती है।

छोटी रकम के गोल्ड लोन कुछ मामलों में उसी दिन जारी किए जा सकते हैं। 2.5 लाख रुपये तक के लोन में विस्तृत इनकम असेसमेंट और औपचारिक क्रेडिट जांच की जरूरत नहीं होती। इससे ज्यादा रकम के लोन के लिए पूरी क्रेडिट जांच और रिपेमेंट कैपेसिटी का आकलन किया जाता है।

2.5 लाख रुपये तक के गोल्ड लोन पर 85% LTV

LTV यानी Loan-to-Value यह बताता है कि गिरवी रखे गए सोने की कीमत के मुकाबले आपको कितने प्रतिशत तक लोन मिल सकता है। 1 अप्रैल 2026 से रेगुलेटेड कर्जदाताओं के लिए लोन की रकम के हिसाब से अलग-अलग एलटीवी सीमा लागू है। 2.5 लाख रुपये तक के लोन पर 85% तक एलटीवी, 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक के लोन पर 80% और 5 लाख रुपये से ज्यादा के लोन पर 75% तक एलटीवी की सीमा है।

युवा भी ले रहे गोल्ड लोन

गोल्ड लोन लेने वालों की प्रोफाइल में भी बदलाव आया है। Experian India के कंट्री मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष जैन के मुताबिक, युवा अब गोल्ड लोन को सिर्फ मजबूरी में लिया जाने वाला कर्ज नहीं, बल्कि एक वित्तीय साधन के रूप में भी देख रहे हैं। हालांकि, ट्रांसयूनियन सिबिल के भावेश जैन के मुताबिक उम्र के हिसाब से तस्वीर में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया है। 2025 में 30 साल से कम उम्र के लोगों की हिस्सेदारी गोल्ड लोन originations में 19% थी। 30 से 40 साल वालों की हिस्सेदारी 36%, 40 से 50 साल वालों की 26% और 50 साल से ज्यादा उम्र वालों की 19% थी। CRIF के मुताबिक, गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में महिलाओं की हिस्सेदारी अगस्त 2021 के 40.5% से बढ़कर अगस्त 2026 में 42.3% हो गई। 31 से 50 साल की उम्र वाले लोग कुल पोर्टफोलियो में करीब 60% हिस्सेदारी रखते हैं।

Gold Loan लेने से पहले ये बातें जरूर समझें

गोल्ड लोन लेना आसान हो सकता है, लेकिन इसे लंबे समय तक कर्ज चलाने के तरीके के तौर पर इस्तेमाल करना जोखिम बढ़ा सकता है। यह खासतौर पर तब समस्या बन सकता है जब नया गोल्ड लोन पुराने कर्ज या क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने के लिए लिया जा रहा हो।

सिर्फ ब्याज दर न देखें

लोन की पूरी लागत देखें। इसमें प्रोसेसिंग फीस, वैल्यूएशन चार्ज, रिन्यूअल फीस और फोरक्लोजर चार्ज भी शामिल हो सकते हैं। लोन लेने से पहले ब्याज के साथ कुल भुगतान, अवधि, रिपेमेंट शेड्यूल और डिफॉल्ट होने की स्थिति को समझना जरूरी है।

कर्ज न चुकाया तो नीलाम हो सकते हैं गहने

गोल्ड लोन में सबसे अहम जोखिम गिरवी रखे गहनों से जुड़ा है। अगर लोन नहीं चुकाया गया तो कर्जदाता गिरवी रखे सोने की नीलामी कर सकता है। कई परिवारों के लिए ये गहने सिर्फ आर्थिक संपत्ति नहीं बल्कि भावनात्मक और पीढ़ियों से चली आ रही संपत्ति भी होते हैं।

EMI या Bullet Repayment?

गोल्ड लोन आम तौर पर किस्तों या बुलेट रिपेमेंट के जरिए चुकाया जा सकता है। ईएमआई में हर किस्त के साथ मूलधन कम होता जाता है, इसलिए बाकी रकम पर ब्याज लगता है। बुलेट रिपेमेंट में मूलधन अवधि के अंत तक बना रहता है, इसलिए पूरे मूलधन पर ब्याज चलता रहता है।

बार-बार टॉप-अप और रिन्यूअल से बचें

गोल्ड लोन में बड़ी संख्या पुराने ग्राहकों की है। अगर कोई व्यक्ति मूलधन चुकाए बिना बार-बार लोन का टॉप-अप या रिन्यूअल करता रहे, तो कर्ज का चक्र लंबा होता जाता है और गहने ज्यादा समय तक जोखिम में रहते हैं।

जितना मिले, उतना लोन लेना जरूरी नहीं

अगर आपके सोने के बदले 1 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है और आप पूरी रकम उठा लेते हैं, तो आपके पास कोई अतिरिक्त गुंजाइश नहीं बचेगी। सोने की कीमत गिरने पर कुछ अतिरिक्त सोना गिरवी रखने या लोन का हिस्सा चुकाने की जरूरत पड़ सकती है।

(यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलााह नहीं है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

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