
Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में आज गुरुवार को जबरदस्त गिरावट दर्द हुई है। बीएसई सेंसेक्स आज करीब 550 अंक गिरकर खुला था और कारोबारी सत्र के दौरान यह गिरावट 1200 से अधिक अंकों तक पहुंच गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 1.65 फीसदी या 1238 अंकों की गिरावट के साथ 73,590 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 1.64 फीसदी या 383 अंक टूटकर 23,063 पर बंद हुआ। शेयर बाजार में आई इस गिरावट के कई कारण रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेज उछाल देखने को मिला है। गुरुवार दोपहर ब्रेंट क्रूड 2.48 फीसदी की बढ़त के साथ 105.6 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा। वहीं, WTI क्रूड इस समय 1.97 फीसदी या 1.82 डॉलर की बढ़त के साथ 93.98 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा। कच्चे तेल में आई इस तेजी ने महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। साथ ही भारत के आयात बिल को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अनिश्चितता ने तेल बाजार की चिंता बढ़ाई हुई है।
गुरुवार की गिरावट के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिकी बॉन्ड मार्केट से मिले संकेत हैं। अमेरिकी 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 5.10% के ऊपर पहुंच गई, जो 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। बुधवार को इसमें करीब 13.89 बेसिस पॉइंट की तेजी आई थी। दरअसल, सितंबर में अमेरिका की कारोबारी गतिविधियां उम्मीद से ज्यादा तेज रही हैं। एसएंडपी ग्लोबल का फ्लैश कंपोजिट पीएमआई बढ़कर 58.4 पर पहुंच गया, जो जुलाई 2021 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने बाजार में यह चिंता बढ़ा दी है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें और बढ़ानी पड़ सकती हैं। इससे भी शेयरों पर दबाव बढ़ा है।
अमेरिकी फेड की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीद भी अचानक बदली है। फेड फंड्स फ्यूचर्स के मुताबिक, अक्टूबर में एक और रेट हाइक की संभावना 66% तक पहुंच गई, जबकि दिन की शुरुआत में यह करीब 53% थी। ब्याज दर बढ़ने की आशंका शेयर बाजार के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि इससे कंपनियों के लिए कर्ज महंगा हो सकता है। दूसरी तरफ, बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ने से निवेशकों के लिए इक्विटी के मुकाबले डेट इंस्ट्रूमेंट ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। यही वजह है कि अमेरिकी यील्ड में तेज उछाल का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर देखने को मिला।
शेयर बाजार में बिकवाली और महंगे कच्चे तेल के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में रहा। गुरुवार को कारोबार के दौरान रुपया 11 पैसे कमजोर होकर 95.84 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया। सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और तेल की कीमतों ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है। सरकारी बैंकों की डॉलर बिक्री ने हालांकि गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया।
गिरते बाजार में बैंकिंग और NBFC शेयरों पर खास दबाव देखने को मिला। बजाज फाइनेंस सेंसेक्स के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में रहा और इसमें 5% से ज्यादा की गिरावट आई। इसके अलावा एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व के शेयर 3 से 4% तक नीचे आए। इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक और ट्रेंट में भी गिरावट दर्ज की गई।
बाजार की अगली दिशा फिलहाल दो बड़े ग्लोबल संकेतकों पर काफी हद तक निर्भर करती दिख रही है- कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेस के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड का 105 डॉलर से ऊपर जाना और अमेरिकी 10 साल की यील्ड का करीब 5.11% तक पहुंचना बाजार पर दबाव डाल रहा है। उनके मुताबिक, जब तक ये दोनों दबाव बने रहते हैं, बाजार में तेज रिकवरी की गुंजाइश सीमित रह सकती है। उनके मुताबिक, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी हाल के दिनों में बनी हुई है, लेकिन इन शेयरों का आगे का रुख कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड की चाल से प्रभावित हो सकता है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)