
Closing Auction Session: अगर आप शेयर बाजार में F&O यानी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में ट्रेडिंग करते हैं, तो 3 अगस्त 2026 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यह कई सालों में सबसे बड़ा ऑपरेशनल बदलाव माना जा रहा है। सेबी और एनएसई मिलकर Closing Auction Session (CAS) शुरू करने जा रहे हैं। इसके बाद F&O शेयरों की क्लोजिंग प्राइस पहले की तरह नहीं, बल्कि ऑक्शन के जरिए तय होगी। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर F&O ट्रेडर्स, ब्रोकर्स, बड़े निवेशकों, म्यूचुअल फंड और ETF पर पड़ने की उम्मीद है। आम इन्वेस्टर्स जो लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करते हैं, उन पर ज्यादा असर नहीं दिखेगा। लेकिन बाजार बंद होने के आखिरी 25 मिनट का पूरा तरीका बदल जाएगा।
3 अगस्त के बाद सभी सेगमेंट एक साथ बंद नहीं होंगे। अलग-अलग कैटेगरी के लिए क्लोजिंग टाइम अलग तय किया गया है। यानी अब निवेशकों को इस बात का खास ध्यान रखना होगा कि वे किस सेगमेंट में ट्रेडिंग कर रहे हैं।
NSE ने इक्विटी डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग का समय 10 मिनट बढ़ा दिया है। पहले ट्रेडिंग 3:30 बजे खत्म होती थी, अब यह 3:40 बजे तक चलेगी। इसका मकसद कैश मार्केट में होने वाले नए ऑक्शन सिस्टम के साथ डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को जोड़ना है।
अब F&O से जुड़े शेयरों में लगातार खरीद-बिक्री 3:15 बजे तक ही होगी। इसके बाद शेयर सीधे Closing Auction Session में चले जाएंगे। इस दौरान निवेशकों के ऑर्डर इकट्ठा किए जाएंगे और एक तय कीमत पर उनका मिलान होगा। यही कीमत उस दिन की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस मानी जाएगी। हालांकि, जो शेयर F&O सेगमेंट में शामिल नहीं हैं, उनमें पहले की तरह 3:30 बजे तक सामान्य ट्रेडिंग जारी रहेगी।
नया ऑक्शन सिस्टम तय टाइमलाइन के अनुसार काम करेगा।
अब तक F&O शेयरों की क्लोजिंग प्राइस आखिरी हिस्से में हुई ट्रेडिंग के Volume Weighted Average Price (VWAP) के आधार पर तय होती थी। 3 अगस्त से यह व्यवस्था बदल जाएगी। अब सभी खरीद और बिक्री के ऑर्डर एक साथ इकट्ठा किए जाएंगे और जिस संतुलित कीमत पर सबसे ज्यादा ऑर्डर पूरे होंगे, वही उस शेयर की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस होगी। सेबी का कहना है कि इससे बाजार की वास्तविक मांग और सप्लाई के आधार पर ज्यादा सटीक क्लोजिंग प्राइस मिलेगी।
डेरिवेटिव्स के लिए यूज होने वाले VWAP के कैलकुलेशन की टाइमिंग भी बदल रही है। पहले यह ट्रेडिग सेशन के आखिरी 30 मिनट में होती थी। यह समय 3:30 बजे तक खत्म होता था। अब यह विंडो 3:10 PM से 3:40 PM तक की रहेगी।
नए सिस्टम के बाद ट्रेडर्स को अतिरिक्त समय मिलेगा, जिससे वे ओपन पोजिशन की बेहतर हेजिंग कर सकेंगे। कैश मार्केट ऑक्शन के बाद अपने ट्रेड में बदलाव कर सकेंगे। इंट्राडे पोजिशन आसानी से बंद कर सकेंगे। एक्सपायरी वाले दिन बढ़े हुए उतार-चढ़ाव को बेहतर तरीके से संभाल सकेंगे। साथ ही ऑक्शन से तय क्लोजिंग प्राइस के आधार पर फैसला ले सकेंगे।
मार्केट रेगुलेटर का मानना है कि एक ही ऑक्शन में सभी खरीद और बिक्री के ऑर्डर इकट्ठा होने से क्लोजिंग प्राइस ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। इससे किसी एक समय पर हुई ट्रेडिंग का असर कम होगा और बाजार की असली स्थिति सामने आएगी।
Zerodha के को-फाउंडर नितिन कामथ का कहना है कि नया सिस्टम इंडेक्स फंड और ETF के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि ये फंड अक्सर बाजार बंद होने से ठीक पहले बड़ी मात्रा में खरीद-बिक्री करते हैं, ताकि उनका पोर्टफोलियो इंडेक्स के बराबर रहे। ऐसे बड़े सौदों से कई बार शेयरों की कीमत प्रभावित हो जाती है और ट्रैकिंग एरर बढ़ जाता है। उनके अनुसार, क्लोजिंग ऑक्सन सेशन में सभी ऑर्डर पहले इकट्ठा होंगे और फिर एक ही कीमत पर उनका मिलान होगा। इससे बाजार बंद होने के समय कीमतों को प्रभावित करना पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो जाएगा और बड़े सौदों का असर भी सीमित रहेगा।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)