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SSY और PPF से कैसे अलग है NPS Vatsalya? बच्चों के भविष्य के लिए जुटा सकते हैं बड़ा फंड, जानिए नियम

NPS for Children: एनपीएस वात्सल्य बच्चों के लिए शुरू की गई लंबी अवधि की पेंशन योजना है, जिसमें माता-पिता सालाना सिर्फ 250 रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं। यह शेयर मार्केट से जुड़ी योजना है, इसलिए इसमें रिटर्न फिक्स नहीं होता है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Sep 19, 2026

NPS Vatsalya

एनपीएस वात्सल्य में 250 रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं। (फोटो: AI)

NPS Vatsalya Scheme: बच्चों के भविष्य के लिए निवेश की शुरुआत करने के लिए हमेशा बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती। महज 250 रुपये से भी माता-पिता अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर एनपीएस वात्सल्य अकाउंट शुरू कर सकते हैं। खास बात यह है कि लंबे समय तक निवेश करने पर इसमें कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है, यानी निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे रिटर्न कमाने में काम आता है।

एनपीएस वात्सल्य को बच्चों के लिए लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है। इसमें माता-पिता या कानूनी अभिभावक नाबालिग बच्चे के नाम पर अकाउंट खोलते हैं और उसे ऑपरेट करते हैं।

सालाना 250 रुपये से शुरू कर सकते हैं निवेश

एनपीएस वात्सल्य में न्यूनतम सालाना योगदान 250 रुपये से शुरू किया जा सकता है। निवेश की अधिकतम सीमा तय नहीं है। यानी माता-पिता अपनी क्षमता के हिसाब से इसमें ज्यादा पैसा भी जमा कर सकते हैं। इस स्कीम की खासियत लंबी निवेश अवधि है। बच्चा जब तक छोटा है, तब तक जमा किया गया पैसा बाजार से जुड़े निवेश में लगाया जाता है। लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिलने से छोटी रकम भी आगे चलकर बड़ा फंड बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, शेयर मार्केट से जुड़ी स्कीम होने के कारण यहां रिटर्न तय नहीं होता।

PPF और SSY से कैसे अलग है NPS Vatsalya?

फिलहाल सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2 फीसदी और पीपीएफ पर 7.1 फीसदी ब्याज मिल रहा है। दोनों योजनाओं में ब्याज दर सरकार तय करती है। इसके मुकाबले एनपीएस वात्सल्य शेयर मार्केट से जुड़ी योजना है। यही वजह है कि इसमें पीपीएफ या सुकन्या योजना की तुलना में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है, लेकिन जोखिम भी रहता है। इसमें जमा रकम को चुने गए पेंशन फंड के जरिए अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश किया जाता है।

निवेशक की चुनी हुई योजना के आधार पर इक्विटी में 100 फीसदी तक निवेश का विकल्प हो सकता है। दूसरे विकल्पों में इक्विटी, सरकारी सिक्योरिटीज, डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में अलग-अलग अनुपात में पैसा लगाया जा सकता है।

जरूरत पड़ने पर क्या पैसे निकाल सकते हैं?

एनपीएस वात्सल्य में पैसा लंबे समय के लिए लगाया जाता है, लेकिन कुछ खास जरूरतों के लिए आंशिक निकासी की सुविधा भी दी गई है। अकाउंट खुलने के तीन साल पूरे होने के बाद आंशिक निकासी की जा सकती है। इसमें बच्चे के खुद के जमा किए गए योगदान का अधिकतम 25 फीसदी तक निकाला जा सकता है। इस गणना में निवेश से मिला रिटर्न शामिल नहीं होता।

पैसा कुछ तय जरूरतों के लिए ही निकाला जा सकता है। इनमें बच्चे की शिक्षा, कुछ निर्धारित गंभीर बीमारियों का इलाज और 75 फीसदी से अधिक दिव्यांगता की स्थिति शामिल है। ध्यान देने वाली बात यह है कि बच्चे के 18 साल का होने से पहले अधिकतम दो बार आंशिक निकासी की जा सकती है।

बच्चा 18 साल का होने पर क्या होगा?

18 साल की उम्र पूरी होने के बाद एनपीएस वात्सल्य अकाउंट को लेकर बच्चे के पास विकल्प होते हैं। वह इसे 21 साल की उम्र तक जारी रख सकता है या जमा पूरी रकम को सामान्य एनपीएस में ट्रांसफर कर सकता है। अगर बच्चा एनपीएस वात्सल्य से बाहर निकलना चाहता है, तो रकम के आकार के आधार पर नियम अलग होंगे। अगर जमा फंड 8 लाख रुपये से कम है तो पूरी रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। वहीं, अगर कॉर्पस 8 लाख रुपये या उससे ज्यादा है तो अधिकतम 80 फीसदी रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है और बाकी 20 फीसदी रकम से एन्‍युटी खरीदनी होगी।

टैक्स में भी मिल सकता है फायदा

एनपीएस वात्सल्य में किए गए योगदान पर पुराने टैक्स रिजीम में सालाना 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त टैक्स कटौती का लाभ मिलता है। नई टैक्स रिजीम में यह कटौती उपलब्ध नहीं है। आंशिक निकासी के मामले में खुद के योगदान की 25 फीसदी तक की रकम दोनों टैक्स रिजीम में टैक्स से मुक्त रहती है। अकाउंट से बाहर निकलते समय कॉर्पस के 60 फीसदी तक एकमुश्त निकासी पर दोनों टैक्स रिजीम में टैक्स छूट का प्रावधान है। वहीं एन्‍युटी खरीदने में इस्तेमाल की गई रकम पर खरीद के समय टैक्स नहीं लगता।

अगर बच्चे की मृत्यु हो जाए तो पैसे का क्या होगा?

अगर एनपीएस वात्सल्य के सदस्य बच्चे की मृत्यु हो जाती है तो उसकी पूरी पेंशन वेल्थ अभिभावक, नॉमिनी या कानूनी वारिस को दी जाती है। पैसा प्राप्त करने वाले व्यक्ति के पास इसे अपने एनपीएस अकाउंट में ट्रांसफर करने का विकल्प भी रहता है।

छोटी रकम से लंबी तैयारी

एनपीएस वात्सल्य का सबसे अहम पहलू इसकी लंबी निवेश अवधि है। बच्चे के कम उम्र में निवेश शुरू करने से माता-पिता को लंबे समय तक पैसा जमा करने और कंपाउंडिंग का फायदा उठाने का मौका मिलता है। हालांकि, यह बाजार से जुड़ी योजना है, इसलिए इसमें मिलने वाला रिटर्न पहले से तय नहीं होता और निवेश से पहले जोखिम को समझना जरूरी है।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सूचना मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

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