
होम लोन की ईएमआई सैलरी के 40 फीसदी तक सीमित होनी चाहिए। (PC: AI)
Home Loan EMI Calculator: घर खरीदना जिंदगी के बड़े फैसलों में शामिल है। लेकिन अगर घर की कीमत का बड़ा हिस्सा होम लोन से पूरा हो रहा है, तो असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बैंक कितना लोन देने को तैयार है, बल्कि यह है कि आपकी जेब हर महीने कितनी ईएमआई आराम से उठा सकती है। कई बार बैंक आपकी आय देखकर बड़ी रकम का लोन मंजूर कर देता है। मगर मंजूरी मिल जाना और उस ईएमआई को लंबे समय तक आराम से चुकाना, दोनों अलग बातें हैं। घर खरीदने से पहले यह हिसाब लगाना जरूरी है कि ईएमआई भरने के बाद आपके पास रोजमर्रा के खर्च, निवेश, बच्चों की जरूरत और इमरजेंसी के लिए कितना पैसा बचेगा।
बैंकबाजार के सीईओ अधिल शेट्टी के मुताबिक, बैंक आमतौर पर यह देखते हैं कि आपकी आय का कितना हिस्सा पहले से मौजूद ईएमआई और नई होम लोन ईएमआई समेत दूसरी तय देनदारियों में जा रहा है। इसे फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेश्यो यानी FOIR के जरिए देखा जाता है। आम तौर पर कुल फिक्स्ड देनदारियां आय के करीब 30 से 50 फीसदी तक हो सकती हैं। हालांकि, यह सीमा बैंक, आपकी आय और प्रोफाइल के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।
होम लोन ईएमआई के लिए ऐसा कोई एक नियम नहीं है जो हर व्यक्ति पर लागू हो। आमतौर पर नेट इनकम की आधी से कम ईएमआई रखना एक बेंचमार्क माना जाता है, लेकिन असली तस्वीर इस बात से पता चलती है कि कर्ज चुकाने और जरूरी खर्च निकालने के बाद आपके पास कितना पैसा बच रहा है।
सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, अगर आपके ऊपर पहले से कोई दूसरा लोन नहीं चल रहा है, तो कुल ईएमआई को मासिक आय के करीब 40 फीसदी तक रखना एक सामान्य बेंचमार्क माना जा सकता है। मसलन, अगर आपकी मासिक आय 1 लाख रुपये है, तो करीब 40,000 रुपये की EMI एक शुरुआती गणना का आधार हो सकती है। लेकिन इसे अंतिम सीमा नहीं मानना चाहिए। किराया, बच्चों की फीस, मेडिकल खर्च, बीमा, निवेश और दूसरे घरेलू खर्च आपकी वास्तविक क्षमता को बदल सकते हैं।
| मासिक आय | अनुमानित EMI |
|---|---|
| ₹50,000 | ₹20,000 |
| ₹1,00,000 | ₹40,000 |
| ₹2,00,000 | ₹80,000 |
होम लोन अक्सर 15, 20 या 25 साल तक चलता है। इसलिए फैसला सिर्फ आज की आय देखकर करना ठीक नहीं है। आगे चलकर ब्याज दर बढ़ सकती है, नौकरी या आय में रुकावट आ सकती है और परिवार के खर्च भी बढ़ सकते हैं। यही वजह है कि एक्सपर्ट लोन लेने से पहले कम से कम अगले कुछ साल की अपनी वित्तीय स्थिति पर भी नजर डालने को कहते हैं।
होम लोन लेने के बाद पूरा पैसा ईएमआई में झोंक देना समझदारी नहीं है। नितिन ललवानी के मुताबिक, कुछ महीनों की जरूरी देनदारियों और खर्चों को संभालने के लिए अलग से पर्याप्त नकदी का इंतजाम होना चाहिए। इसके साथ हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस जैसी सुरक्षा भी जरूरी है। सरल भाषा में कहें तो ऐसा होम लोन लें, जिसकी ईएमआई भरने के बाद भी आपके पास मुश्किल वक्त के लिए पैसा बचा रहे।
कई लोग यह सोचकर बड़ी ईएमआई ले लेते हैं कि आने वाले सालों में प्रमोशन होगा या नौकरी बदलने पर सैलरी बढ़ जाएगी। लेकिन सिर्फ उम्मीद के भरोसे बड़ा लोन लेना जोखिम भरा हो सकता है। अगर आय बढ़ने की उम्मीद काफी मजबूत है, तो Step-up Home Loan जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इसमें समय के साथ ईएमआई बढ़ाने की व्यवस्था होती है, ताकि बढ़ती आय के साथ लोन का भुगतान भी बढ़ाया जा सके। लोन की गणना करते समय उस आय को ज्यादा महत्व दें जिसके मिलने का भरोसा हो। संभावित बोनस, भविष्य की नौकरी या अनुमानित वेतन वृद्धि को आधार बनाकर ऐसी ईएमआई नहीं चुननी चाहिए जिसे मौजूदा आय से संभालना मुश्किल हो।
घर खरीदना जरूरी लक्ष्य हो सकता है, लेकिन उसके लिए अपनी पूरी वित्तीय आजादी दांव पर लगाना ठीक नहीं। सही होम लोन वही है जिसे चुकाते हुए आप इमरजेंसी के लिए बचत, नियमित निवेश और परिवार के दूसरे जरूरी खर्च भी जारी रख सकें। आखिरकार मकसद सिर्फ अपना घर खरीदना नहीं है। मकसद ऐसा घर खरीदना है जिसकी ईएमआई आपकी जिंदगी को बोझ न बना दे।
Updated on:
19 Sept 2026 05:12 pm
Published on:
19 Sept 2026 05:12 pm
