
Share Market News: करीब नौ महीने तक सुस्ती झेलने के बाद भारतीय शेयर बाजार के लिए अब माहौल बदलता नजर आ रहा है। महंगे वैल्यूएशन, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, वैश्विक अनिश्चितता और एआई शेयरों की जबरदस्त रैली जैसे कारणों ने बाजार को दबाकर रखा था। ये कारण अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहे हैं। ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में बाजार में अच्छी खरीदारी दिख सकती है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, अब कई ऐसे संकेत एक साथ सामने आ रहे हैं, जो इक्विटी बाजार के लिए सकारात्मक माने जाते हैं। वैल्यूएशन पहले की तुलना में काफी सस्ती हुई है, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, विदेशी निवेशकों की बिकवाली धीमी पड़ी है और देश के आर्थिक आंकड़े भी मजबूती का इशारा कर रहे हैं।
पिछले कुछ महीनों में भारतीय शेयर बाजार कई मोर्चों पर दबाव में रहा। कंपनियों की कमाई की रफ्तार धीमी हुई, जीडीपी ग्रोथ की गति घटी, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने लगातार पैसा निकाला और अमेरिका के टैरिफ फैसलों से लेकर मिडिल ईस्ट के तनाव तक कई वैश्विक घटनाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसी दौरान दुनियाभर में AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयरों में आई तेज उछाल ने भी विदेशी निवेश का बड़ा हिस्सा अपनी ओर खींच लिया था।
इस साल अब तक सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांक करीब 9 फीसदी तक फिसल चुके हैं। वहीं, 24 जून तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से करीब 2.73 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का मानना है कि बाजार में आई गिरावट के बाद शेयरों की कीमतें अब काफी संतुलित स्तर पर पहुंच गई हैं। पहले जहां बाजार लगभग 24 गुना वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा था, वहीं अब यह करीब 18 गुना के आसपास आ गया है। ब्रोकरेज का कहना है कि अगर कंपनियों की कमाई 14 से 15 फीसदी की रफ्तार से बढ़ती है तो मौजूदा वैल्यूएशन पर भी शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के कई आर्थिक संकेतक पहले से मजबूत हुए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी। इस बढ़त में पूंजीगत निवेश की अहम भूमिका रही। इसके अलावा चालू खाता सरप्लस में पहुंच गया है। सर्विस एक्सपोर्ट और विदेशों से आने वाली रकम में बढ़ोतरी इसका बड़ा कारण रही। वहीं, 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 6.9 फीसदी से नीचे आ गई है और रुपया भी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है।
कच्चे तेल का भाव 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब आना भारतीय बाजार के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल सस्ता होने से आयात बिल घटता है, महंगाई पर दबाव कम होता है और कंपनियों की लागत भी घटती है। इसका सीधा फायदा शेयर बाजार को मिल सकता है।
मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के बाद विदेशी निवेशकों की बिकवाली में भी नरमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में जो बिकवाली हुई, वह कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित रही। अब विदेशी निवेशकों का रुख पहले की तुलना में बेहतर होता दिख रहा है।
दुनियाभर में एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में पिछले एक साल से जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। लेकिन अब इस रैली की रफ्तार धीमी होती दिखाई दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों से लेकर कोरिया की AI कंपनियों तक शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। कुछ कंपनियों के आईपीओ के बाद कीमतों में गिरावट, बढ़ते कर्ज और प्रतिस्पर्धा की चिंता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
हालांकि, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का कहना है कि इससे वैश्विक शेयर बाजार में किसी बड़े संकट की आशंका फिलहाल नहीं दिखती। बड़ी टेक कंपनियों की मजबूत बैलेंस शीट और AI की लगातार बनी हुई मांग इस सेक्टर को सपोर्ट दे सकती है।
ब्रोकरेज फर्म ने चेताया है कि 2026 में अल नीनो की आशंका और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से साल के आखिर तक ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी जैसे जोखिम अभी भी बने हुए हैं। अगर ऐसा होता है तो विदेशी निवेश और बाजार की धारणा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।