
Why Share Market Rise Today: शेयर बाजार में गुरुवार की भारी गिरावट के बाद शुक्रवार को जबरदस्त रिकवरी आई है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, IT शेयरों में खरीदारी और वैश्विक तनाव कम होने की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी दर्ज हुई है। एक दिन पहले बाजार में आई गिरावट से निवेशकों की 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति साफ हो गई थी, लेकिन शुक्रवार की तेजी ने नुकसान की काफी भरपाई कर दी।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 1.23 फीसदी या 879 अंक की बढ़त के साथ 72,472 पर बंद हुआ है। बाजार बंद होते समय सेंसेक्स पैक के 30 शेयरों में से सिर्फ 1 शेयर लाल निशान पर और 29 शेयर हरे निशान पर थे। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी-50 1.30 फीसदी या 288 अंक की बढ़त के साथ 22,520 पर बंद हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच संघर्ष खत्म करने को लेकर सकारात्मक बातचीत हो रही है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि ईरान के साथ बातचीत उपयोगी साबित हो रही है। इस बयान से निवेशकों को उम्मीद मिली कि मिडिल ईस्ट में तनाव कुछ कम हो सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड का भाव 103 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि WTI क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है, रुपये पर दबाव आता है और कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। इसके उलट, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंता कुछ कम होती है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में गिरावट को भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत के तौर पर देखा गया।
भारतीय IT शेयरों में तेजी की एक बड़ी वजह TCS के दूसरी तिमाही के नतीजे रहे। कंपनी ने वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 15% की बढ़त के साथ 13,884 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया। टीसीएस के नतीजों से आईटी सेक्टर के प्रति निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। इसके बाद इन्फोसिस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली।
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 23 पैसे मजबूत होकर 96.65 के स्तर पर पहुंच गया। डॉलर में नरमी और भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप को इसकी वजह माना गया। एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च विश्लेषक जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो रुपये में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है।
हाल के दिनों में वैश्विक बॉन्ड बाजार में भारी बिकवाली के कारण यील्ड कई वर्षों के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी। शुक्रवार को इसमें कुछ नरमी देखने को मिली। अमेरिका के 30 साल के बॉन्ड की यील्ड 5.6% से नीचे आ गई। वहीं, 10 साल के बॉन्ड की यील्ड करीब 5.2% और दो साल के बॉन्ड की यील्ड 4.75% तक पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों को निश्चित आय वाले निवेश विकल्पों में ज्यादा आकर्षण दिखाई दे सकता है। इससे शेयर बाजार में निवेश के लिए उपलब्ध रकम पर असर पड़ता है, खासकर उभरते बाजारों में। यील्ड में नरमी से शेयर बाजार को कुछ राहत मिली।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)