
Pension Tax Rules: रिटायर्मेंट के बाद नियमित वेतन बंद हो जाता है, ऐसे में केई सीनियर सिटीजन इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरना बंद कर देते हैं। लेकिन समझने वाली बात ये है कि रिटायर्मेंट के बाद भी इनकम के कई दूसरे स्रोत बने रहते हैं। पेंशन, बैंक जमा का ब्याज, किराया, शेयर और म्यूचुअल फंड से होने वाला लाभ रिटायर्ड व्यक्ति की आय का हिस्सा हो सकता है। ऐसे में इनमें से कुछ इनकम पर इनकम टैक्स नियमों के तहत टैक्स देनदारी बन सकती है। आइए जानते है कि ऐसे कौन-से इनकम के स्त्रोत हैं, जिनपर टैक्स देनदारी बनती है।
रिटायर्मेंट के बाद मिलने वाली अनकम्यूटेड पेंशन आम तौर पर वेतन आय के रूप में टैक्स योग्य होती है। लागू नियम और चुनी गई टैक्स व्यवस्था के अनुसार इस पर स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिल सकता है। इसके अलावा सेविंग अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), रिकरिंग डिपॉजिट (RD), पोस्ट ऑफिस जमा और सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS) से मिलने वाला ब्याज भी टैक्स के दायरे में आता है। पुराने टैक्स रिजीम में पात्र सीनियर सिटीजन सेक्शन 80TTB के तहत 50 हजार रुपये तक की ब्याज आय पर कटौती का दावा कर सकते हैं। नई टैक्स रिजीम में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। यहां ध्यान रखने वाली बात ये भी है कि Form 15H जमा करने का मतलब ब्याज से होने वाली इनकम को टैक्स फ्री करना नहीं है। यह पात्र शर्तें पूरी होने पर FD और अन्य जमा के ब्याज पर TDS कटौती रोकने में मदद करता है। लेकिन आय की टैक्स देनदारी खत्म नहीं करता।
रिटायर्मेंट के बाद किराये से होने वाली आय भी टैक्स के दायरे में आती है। किराये पर दी गई आवासीय संपत्ति पर लागू शर्तों के अनुसार 30 प्रतिशत स्टैंडर्ड डिडक्शन और पात्र होम लोन ब्याज जैसी कटौतियां मिल सकती हैं। कमर्शियल प्रॉपर्टी से किराया भी नियमों के तहत टैक्स योग्य है। इसी तरह शेयर, म्यूचुअल फंड, अचल संपत्ति या अन्य कैपिटल एसेट बेचने से हुए लाभ पर होल्डिंग पीरियड और संपत्ति के प्रकार के आधार पर कैपिटल गेन टैक्स लग सकता है। ऐसे लेनदेन की जानकारी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में भी दिखाई देती है।
इंश्योरेंस कंपनी से मिलने वाली एन्युटी या पेंशन आम तौर पर टैक्स योग्य होती है। शेयरों से मिलने वाला डिविडेंड भी टैक्स योग्य आय है। इसके अलावा क्यूम्युलेटिव FD पर जमा हुआ इंटरेस्ट, इनकम-टैक्स रिफंड पर मिलने वाला इंटरेस्ट, परिवार को मिलने वाली फैमिली पेंशन और कंसल्टेंसी या पार्ट टाइम काम से होने वाली इनकम भी टैक्स के दायरे में आ सकती है।