शादी से पहले पैसों पर खुलकर बातचीत करना आज के समय में रिश्तों की मजबूती के लिए अहम माना जा रहा है। इनकम, जिम्मेदारियां, कर्ज और भविष्य के लक्ष्यों पर पारदर्शिता से भरोसा और स्थिरता बढ़ती है।
वर्तमान समय में बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती महंगाई और करियर की अनिश्चितता के बीच शादी अब केवल भावनात्मक नहीं बल्कि आर्थिक साझेदारी भी बन चुकी है। पहले जहां पैसों की बातें शादी के बाद धीरे-धीरे सामने आती थीं, वहीं अब युवा कपल्स पहले से ही फाइनेंशियल पारदर्शिता को अहम मानने लगे हैं। प्रोमोर की को-फाउंडर निशा सिंघवी के अनुसार, शादी से पहले इनकम, खर्च, लोन, जिम्मेदारियों और भविष्य के लक्ष्यों पर खुलकर बात करना रिश्ते में भरोसा और स्थिरता लाने में मदद करता है।
सिंघवी बताती हैं कि शादी की शुरुआत में ही इनकम, ईएमआई, सेविंग्स और खर्च करने की आदतों पर ईमानदारी से चर्चा करने से भविष्य में गलतफहमियों की गुंजाइश कम हो जाती है। कई बार जब छिपी हुई फाइनेंशियल सच्चाई बाद में सामने आती है, तो यही तनाव का कारण बनती है। शुरुआत में ही इन बातों पर चर्चा करने से कपल्स के बीच एक—दूसरे के लिए डर और संकोच दूर हो जाते हैं।
भारत में शादी केवल दो लोगों तक सीमित नहीं रहती। माता-पिता, भाई-बहन और जॉइंट फैमिली से जुड़ी जिम्मेदारियां भी साथ मिलती हैं। ये सभी फाइनेंशियल प्लानिंग का हिस्सा होती हैं, जैसे माता-पिता या भाई-बहन की जिम्मेदारी किस तरह उठाई जाएगी इत्यादि। यदि इन अपेक्षाओं पर पहले ही बात हो जाए तो आगे चलकर किसी एक पार्टनर पर बोझ या पार्टनर से टकराव की स्थिति नहीं बनती।
सिंघवी ने बताया कि कई रिश्तों में एक पार्टनर की इनकम ज्यादा और दूसरे की कम होती है। यदि इसे अहंकार या पावर बैलेंस से जोड़ा जाए तो तनाव बढ़ सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि कपल्स अपनी भूमिकाओं को समझदारी से स्वीकार करें। शादी जैसे महत्वपूर्ण रिश्ते में आर्थिक या भौतिक योगदान को समान महत्व देने से रिश्ते की स्थिरता बनी रहती है।
कुछ लोग खर्च करने में सहज होते हैं, जबकि कुछ बचत और निवेश को प्राथमिकता देते हैं। इन अलग-अलग मानसिकताओं को लेकर अपने पार्टनर की कमियां निकालने की बजाय दोनों की सोच में संतुलन बनाना जरूरी है। सिंघवी ने बताया कि बजट के प्रति अपनी मानसिकता को साझा करने से आनंद और सुरक्षा दोनों संभव हो पाते हैं।
घर खरीदना, बच्चों की प्लानिंग, करियर, यात्रा या बिजनेस जैसे फैसले फाइनेंशियल तैयारी से जुड़े होते हैं। यदि कपल्स मिलकर लक्ष्य तय करते हैं तो आगे चलकर टकराव नहीं होता और रिश्ते में तालमेल बना रहता है। इसलिए यह भी जरूरी है कि भविष्य की योजनाएं मिल-बैठकर बनाई जाएं।