
Credit Utilisation Ratio: अगर आपका कोई क्रेडिट कार्ड लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो उसे बंद करना आपको आसान रास्ता लग सकता है। लेकिन यही फैसला आगे चलकर आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। खासकर तब, जब आपके पास दूसरे क्रेडिट कार्ड भी हों और उन पर बकाया राशि चल रही हो। कार्ड बंद करने से आपकी कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट कम हो जाती है। अगर आपके दूसरे कार्ड पर खर्च पहले जैसा ही रहता है, तो कुल क्रेडिट यूटिलाइजेशन बढ़ सकता है। इसका असर आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर पड़ सकता है। इसलिए सिर्फ इसलिए कि कार्ड इस्तेमाल नहीं हो रहा, उसे तुरंत बंद करना जरूरी नहीं है।
क्रेडिट यूटिलाइजेशन का मतलब है कि आपकी कुल क्रेडिट लिमिट में से आपने कितनी राशि इस्तेमाल की है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपके सभी क्रेडिट कार्ड की कुल लिमिट 5 लाख रुपये है और आपने 1 लाख रुपये खर्च किए हैं। ऐसे में आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन 20 फीसदी होगा। अब अगर आप इनमें से एक कार्ड बंद कर देते हैं और उसकी लिमिट भी कुल सीमा से हट जाती है, लेकिन आपका बकाया 1 लाख रुपये ही रहता है, तो आपकी कुल क्रेडिट लिमिट कम हो जाएगी। नतीजा यह होगा कि क्रेडिट यूटिलाइजेशन का प्रतिशत बढ़ जाएगा।
आमतौर पर कम क्रेडिट यूटिलाइजेशन को बेहतर माना जाता है। 30 फीसदी का आंकड़ा अक्सर एक सामान्य गाइडलाइन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसे कोई पक्का नियम या ऐसी सीमा नहीं माना जा सकता जिसके ऊपर जाते ही क्रेडिट स्कोर निश्चित रूप से गिर जाए।
अगर जिस कार्ड को आप बंद करने जा रहे हैं, वह आपके सबसे पुराने क्रेडिट अकाउंट में से एक है, तो उसे बंद करने का फैसला सोच-समझकर करना चाहिए। Zaggle के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन राज पी नारायणम के मुताबिक, इस्तेमाल नहीं होने वाले कार्ड को बंद कराना आपको सही लग सकता है, लेकिन इससे कुल क्रेडिट लिमिट कम हो सकती है और क्रेडिट यूटिलाइजेशन बढ़ सकता है। अगर वह कार्ड सबसे पुराना है, तो क्रेडिट हिस्ट्री की लेंथ पर भी असर पड़ सकता है। नारायणम के मुताबिक, अगर कार्ड पर कोई बड़ी सालाना फीस नहीं है, तो उसे चालू रखकर कुछ महीनों में एक छोटी खरीदारी की जा सकती है और उसका पूरा भुगतान समय पर किया जा सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर इस्तेमाल न होने वाला क्रेडिट कार्ड हमेशा चालू ही रखना चाहिए। कुछ परिस्थितियों में उसे बंद करना सही कदम हो सकता है। मसलन, अगर कार्ड की सालाना फीस काफी ज्यादा है और उसके बदले मिलने वाले फायदे बहुत कम हैं, तो उसे जारी रखने का कोई खास फायदा नहीं हो सकता। इसी तरह अगर कार्ड आपको जरूरत से ज्यादा खर्च करने के लिए उकसाता है और आप उस पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं, तो कार्ड बंद करना एक विकल्प हो सकता है।
बैंक बाजार के सीईओ अधिल शेट्टी के मुताबिक, सिर्फ इस्तेमाल न होने के कारण क्रेडिट कार्ड को बंद करना हमेशा समझदारी नहीं है। कार्ड बंद करने से कुल उपलब्ध लिमिट घट सकती है और इससे क्रेडिट यूटिलाइजेशन बढ़ सकता है। उनके अनुसार, अगर कार्ड पर ज्यादा सालाना शुल्क नहीं है, तो छोटी और जिम्मेदार खरीदारी करके उसे चालू रखना लंबे समय में मददगार हो सकता है।
क्रेडिट कार्ड बंद करने का फैसला लेने से पहले कुछ चीजों को एक बार जरूर देख लें।
दूसरे कार्ड की कुल लिमिट: कार्ड बंद करने के बाद आपकी कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट कितनी रह जाएगी?
कुल बकाया: दूसरे क्रेडिट कार्ड पर अभी कितनी रकम बकाया है?
सालाना फीस: जिस कार्ड को बंद करने की सोच रहे हैं, उसकी एनुअल फीस कितनी है?
कार्ड के फायदे: क्या कार्ड पर कोई रिवॉर्ड, कैशबैक, एयरपोर्ट लाउंज या दूसरे उपयोगी फायदे मिल रहे हैं?
कार्ड कितना पुराना है: अगर यह आपका सबसे पुराना कार्ड है, तो इसे बंद करने से पहले क्रेडिट हिस्ट्री पर संभावित असर समझ लें।
खर्च करने की आदत: अगर कार्ड आपके लिए अनावश्यक खर्च का कारण बन रहा है, तो इसे चालू रखना भी सही फैसला नहीं हो सकता।
अगर कार्ड पर कोई भारी सालाना शुल्क नहीं है और आप उसे जिम्मेदारी से संभाल सकते हैं, तो उसे चालू रखा जा सकता है। जरूरी नहीं कि हर महीने बड़ी खरीदारी करें। कभी-कभार छोटी खरीदारी करें और बिल की पूरी रकम समय पर चुका दें। इससे कार्ड सक्रिय रखने में मदद मिल सकती है और अनावश्यक ब्याज से भी बचा जा सकता है। अगर समस्या सालाना शुल्क है, तो बैंक से बात करके फीस माफ कराने या कार्ड को लाइफटाइम फ्री विकल्प में बदलने की जानकारी ली जा सकती है। कुछ मामलों में कार्ड को कम शुल्क वाले दूसरे वेरिएंट में बदलने का विकल्प भी मिल सकता है।