अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली एनसीआर, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और पुणे जैसे शहर औद्योगिक और वेयरहाउसिंग मार्केट के हॉटस्पॉट बन रहे हैं।
भारत के औद्योगिक और वेयरहाउसिंग बाजार में तेजी से बूम आ रहा है। यह बूम नीति प्रोत्साहन, इंफ्रास्ट्रक्टर के विस्तार, उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव, सप्लाई चेन का पुनर्गठन और टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाने के कारण आ रहा है। रियल एस्टेट रिसर्च फर्म कॉलियर्स की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 30 शहरों को औद्योगिक और वेयरहाउसिंग हॉटस्पॉट के रूप में पहचाना गया है। इनमें प्रमुख, उभरते और नए हब शामिल हैं। ये हॉटस्पॉट भविष्य में उद्योग और वेयरहाउसिंग की बढ़ती मांग को पूरा करेंगे, जिससे निवेशकों और डोवलपर्स को नए अवसर मिलेंगे।
जो शहर वेयरहाउसिंग के भविष्य के हॉटस्पॉटबन सकते हैं, उनमें प्रमुख हब अहमदाबाद, बेंगलूरु, चेन्नई, दिल्ली एनसीआर, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और पुणे शामिल हैं। उभरते हुए हब में भोपाल, इंदौर, भुवनेश्वर, कोयम्बटूर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, नासिक, पटना, सूरत, विशाखापट्टनम शामिल हैं। जबकि नवजात यानी अभी नए बन रहे हब में अमरावती, गुवाहाटी, होसूर, जम्मू, जमशेदपुर, कानपुर, नागपुर, प्रयागराज, रायपुर और विजयवाड़ा को शामिल किया गया है।
देश में औद्योगिक और वेयरहाउसिंग सेक्टर के लिए 30 उच्च पोटेंशियल शहरों की पहचान पांच प्रमुख मापदंडों पर आधारित है। जिनमें औद्योगिक और माल परिवहन गलियारों के माध्यम से उन्नत कनेक्टिविटी, आगामी औद्योगिक स्मार्ट शहर, प्रस्तावित मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, समुद्र और हवाई अड्डे लिंक का विस्तार, बड़े एकीकृत टेक्सटाइल हब का विकास शामिल हैं। इन हब का विकास न केवल डेवलपर्स के लिए, बल्कि राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।
भारत का औद्योगिक और वेयरहाउसिंग क्षेत्र तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है, जिसे थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स कंपनियों और विभिन्न क्षेत्रों जैसे ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, एफएमसीजी, ई-कॉमर्स आदि में मजबूत मांग से समर्थन मिल रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2030 तक टॉप-8 शहरों (प्रमुख हब) में ग्रेड ए वेयरहाउसिंग स्पेस की वार्षिक मांग 5 करोड़ वर्ग फुट से अधिक होने का अनुमान है।