
म्यूचुअल फंड के नियमों में बदलाव हुआ है। (PC: AI)
सेबी ने म्यूचुअल फंड के नियमों में बदलाव किया है। सेबी ने एक सर्कुलर जारी कर म्यूचुअल फंड स्कीम्स के कैटेगराइजेशन के पुराने ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है। इस निर्णय का असर इन्वेस्टर्स की निवेश रणनीति पर पड़ेगा। सेबी ने सॉल्यूशन ओरिएंटेड कैटेगरी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। वहीं, टार्गेट बेस्ड इन्वेस्टमेंट के लिए नया लाइफ साइकिल फंड शुरू किया गया है। साथ ही इक्विटी और हाइब्रिड स्कीमों के लिए निवेश की लिमिटेशंस भी नए सिरे से तय कर दी गई हैं।
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एक्टिव इक्विटी स्कीम्स को सोना और चांदी में निवेश का विकल्प मिलने से फंड मैनेजरों को बाजार की अस्थिरता से निपटने में ज्यादा लचीलापन मिलेगा। अब तक इक्विटी स्कीम्स को अपने कुल निवेश का 20 से 35 फीसदी तक हिस्सा नॉन-इक्विटी इंस्ट्रूमेंट जैसे डेट रियल एस्टेट, इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट्स) और इनविट में लगाने की अनुमति थी। अब इस मिक्स में सोना और चांदी को भी शामिल किया जा सकेगा।
सेबी ने अपने सर्कुलर में यह भी साफ किया है कि म्यूचुअल फंड स्कीमों के नाम उनके काम के आधार पर ही होंगे। फंड कंपनियां ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी, जो केवल रिटर्न का लालच देते हों। सेबी ने एक्टिव इक्विटी और हाइब्रिड कैटेगरीज की संख्या 11 से बढ़ाकर 12 कर दी है। अब फंड हाउस को वैल्यू व कॉन्ट्रा और बैलेंस्ड व एग्रेसिव हाइब्रिड फंड दोनों तरह की योजनाएं पेश करने की अनुमति मिल गई है। नए नियमों का पालन करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है।
सेबी ने 'सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीम' कैटेगरी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इस कैटेगरी में वे म्यूचुअल फंड स्कीम्स आती हैं, जिन्हें खास तौर पर बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट जैसे लक्ष्यों के लिए बनाया गया था। सेबी के इस फैसले का मतलब यह है कि अब इस श्रेणी की कोई नई योजना नहीं आएगी और जो योजनाएं पहले से चल रही हैं, वे अब नए निवेश स्वीकार नहीं करेंगी। धीरे-धीरे इन योजनाओं को अन्य समान प्रकृति वाली म्यूचुअल फंड योजनाओं में मिलाया जाएगा।
सेबी ने निवेशकों को टार्गेट बेस्ड इन्वेस्टमेंट का नया विकल्प देने के लिए 'लाइफ साइकिल फंड नाम से नई कैटेगरी भी शुरू की है। ये फंड लंबी अवधि के निवेश के लिए बनाए जाएंगे और समय के साथ-साथ अपने आप जोखिम कम करते जाएंगे। उदाहरण के तौर पर शुरुआत में इनमें इक्विटी का हिस्सा ज्यादा होगा, लेकिन जैसे-जैसे लक्ष्य की तारीख नजदीक आएगी, निवेश धीरे-धीरे सुरक्षित विकल्पों में शिफ्ट हो जाएगा। इन फंड्स की अवधि कम से कम 5 साल और अधिकतम 30 साल तक हो सकती है। इससे निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्यों, जैसे बच्चों की शिक्षा या रिटायरमेंट के लिए बेहतर और व्यवस्थित तरीके से निवेश करने में मदद मिलेगी।
Published on:
27 Feb 2026 12:32 pm
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